दुनिया की आधी आबादी जल संकट का शिकार

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बाल मुकुंद ओझा
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में बताया गया कि दुनिया में आधी आबादी यानी करीब 4 अरब लोग जल संकट से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दुनिया के 100 सबसे बड़े शहरों में आधे शहरों को गंभीर पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इनमें दिल्ली, बीजिंग, न्यूयॉर्क और रियो जैसे बड़े शहर शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नदियां और झीलें सिकुड़ रही हैं, भूमिगत जल स्तर गिर रहा है और वाटरलैंड सूख रही हैं। जमीन धंस रही है सिंकहोल बन रहे हैं और रेगिस्तान फैल रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र शोधकर्ताओं के मुताबिक पिछले कई दशकों के दौरान सिमटते भूजल स्रोतों, अत्यधिक दोहन, भूमि क्षरण, बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से उपजी बाधाओं की वजह से, दुनिया अब जल संकट की अवस्था से आगे बढ़कर ‘वैश्विक जल दिवालिएपन’ की स्थिति में क़दम रख चुकी है।
गर्मी और पानी का चोली दामन का साथ है। भारत की बात करे तो इस समय गर्मी अपने चरम पर है और देशभर में पानी के लिए त्राहि त्राहि मची हुई है। देश की राजधानी दिल्ली सहित विभिन्न प्रदेशों से मिल रही खबरे बेहद चिंताजनक है। अनेक स्थानों पर पानी की किल्लत से परेशान लोग आंदोलन कर रहे है। केंद्रीय जल आयोग की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि भारत में इस समय कुल 63.232 अरब घन मीटर पानी उपलब्ध है, जो सामान्य भंडारण से लगभग 24 प्रतिशत अधिक है, लेकिन 30 अप्रैल 2026 तक देश के 166 जलाशयों में कुल 71.082 अरब घन मीटर (बीसीएम) पानी बचा था, जो उनकी कुल क्षमता का 38.72 प्रतिशत था। अब 14 मई की रिपोर्ट में यह घटकर 63.232 बीसीएम रह गया है, यानी केवल 34.45 प्रतिशत। महज दो हफ्तों में करीब 8 बीसीएम पानी कम हो गया। केंद्रीय जल आयोग का कहना है कि मौजूदा जल भंडारण पिछले वर्ष और 10 साल के औसत से अभी भी बेहतर है, लेकिन लगातार गिरता स्तर यह संकेत दे रहा है कि गर्मी बढ़ने और मानसून आने में देरी होने पर कई राज्यों में पेयजल, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन पर गंभीर दबाव पड़ सकता है। मई के अंत तक हालात और कठिन हो सकते हैं, खासकर उन राज्यों में जहां जलाशय पहले ही आधे से नीचे पहुंच चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। कई राज्य हैं जो भूजल की कमी के चरम बिंदु को पार कर चुके हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में 2026 तक गंभीर रूप से भूजल संकट गहरा सकता है। जल के बिना मानव जिन्दा नहीं रह सकता। क्योंकि मानव शरीर का एक बड़ा हिस्सा जल होता है। यह सब मानव को मालूम होते हुए भी जल को बिना सोचे-विचारे हमारे जल-स्रोतों में ऐसे पदार्थ मिला रहा है जिसके मिलने से जल प्रदूषित हो रहा है। जल हमें नदी, तालाब, कुएँ, झील आदि से प्राप्त हो रहा है। जल की उपलब्धता को लेकर वर्तमान में भारत ही नहीं अपितु समूचा विश्व चिन्तित है। जल ही जीवन है। जल के बिना सृष्टि की कल्पना नहीं की जा सकती। मानव का अस्तित्व जल पर निर्भर करता है। जनसंख्‍या में तेजी हो रही वृद्ध‍ि, शहरीकरण, औद्योगीकरण, जलवायु परिवर्तन और अकुशल जल प्रबंधन प्रथाओं जैसे कारकों के संयोजन की वजह से पानी की कमी की व्यापक समस्या पैदा होती जा रही है। आशंका जताई जा रही है क‍ि आने वाले समय में पानी की कमी के गंभीर और दूरगामी पर‍िणाम हो सकते हैं।
भूजल की वर्तमान स्थिति को सुधारने के लिये भूजल का स्तर और न गिरे इस दिशा में काम किए जाने के अलावा उचित उपायों से भूजल संवर्धन की व्यवस्था हमें करनी होगी। पानी की कमी के चलते निरन्तर खोदे जा रहे गहरे कुओं और ट्यूबवेलों द्वारा भूमिगत जल का अन्धाधुन्ध दोहन होने से भूजल का स्तर निरन्तर घटता जा रहा है। देश में जल संकट का एक बड़ा कारण यह है कि जैसे-जैसे सिंचित भूमि का क्षेत्रफल बढ़ता गया वैसे-वैसे भूगर्भ के जल के स्तर में गिरावट आई है। भूजल दोहन के अंधाधुंध दुरुपयोग को यदि समय रहते रोका नहीं गया, तो आने वाली पीढियों को इसके भयानक परिणाम भुगतने होंगे। सरकार को जनता में जागरूकता लाने के लिए विशेष प्रबन्ध और उपाय करने होंगे। आवश्यकता इस बात की है कि हम जल के महत्व को समझे और एक-एक बूंद पानी का संरक्षण करें तभी लोगों की प्यास बुझाई जा सकेगी।

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