जयपुर के बिचून में बनेगा माटीकला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस माटी कलाकारों को मिलेगा प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक की मिलेगी जानकारी

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जयपुर,। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की घोषणाओं से माटी कला को नई पहचान मिली है। बोर्ड को पिछले 2 वर्षों में पिछले 10 वर्षों से भी अधिक बजट मिला है। जयपुर के बिचून औद्योगिक क्षेत्र में माटी कला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। यादे माटी कला बोर्ड अध्यक्ष प्रहलाद राय टाक ने यह बात गुरुवार को उद्योग भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से माटी कलाकारों के लिए आधुनिक तकनीक के माध्यम से नए रोजगार के द्वार खुलेंगे। राज्य में माटी कला के सभी कलाकारों, कामगारों के आर्टिजन कार्ड बनाए जाएंगे। इसके लिए बोर्ड द्वारा शिविर लगाए जाएंगे। टाक ने प्रजापत-कुम्हार समाज की आराध्या एवं कुलदेवी यादे माता का पैनोरमा बनाए जाने की घोषणा के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इससे माटी कलाकार प्रजापति समाज में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
5,000 विद्युत चालित चाक और मिट्टी गूंथने की मशीनों का वितरण होगा
टाक ने बताया कि राज्य बजट घोषणा वर्ष 2026-27 के तहत 5,000 विद्युत चालित चाक और मिट्टी गूंथने की मशीनों का वितरण किया जाएगा, इससे उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ेगी। इस वर्ष माटी कला के 100 प्रशिक्षक तैयार करने का लक्ष्य है। इसके लिए राज्य से बाहर विभिन्न स्थानों पर विशेष ट्रेनिंग दिलवाई जाएगी। पिछले वर्ष 25 लोगों को उत्तर प्रदेश के खुर्जा से प्रशिक्षण दिलवाया गया है। प्रेस वार्ता के बाद यादे माटी कला बोर्ड अध्यक्ष प्रहलाद राय टाक, उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त नीलाभ सक्सेना ने उद्योग भवन परिसर में परिण्डे लगाए और प्रदेशवासियों से भी परिण्डे लगाने का आह्वान किया।
माटी कला बोर्ड की उपलब्धियां एवं कार्ययोजना
– मुख्यमंत्री द्वारा ‘माटी राजस्थान री’ पुस्तक का विमोचन किया गया है, जिसमें बोर्ड द्वारा दो वर्षों में किए गए उत्कृष्ट कार्यों एवं योजनाओं की जानकारी है। – बोर्ड द्वारा प्रदेश की विभिन्न माटी कला विधाओं में उत्कृष्ट 45 कलाकारों को ‘माटी के लाल’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। – आवा-कजावा पद्धति से काम करने वाले माटीकला कामगारों के लिए प्रमुख 8 विभागों से विचार विमर्श कर, वर्ष 2016 में बनी गाइडलाइन की पालना सुनिश्चित की जाएगी। – माटी कलाकारों के बच्चों को छात्रवृत्ति व स्कूटी योजना का लाभ दिलाने का राजस्थान सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।- उद्योग भवन में निर्मित होने वाली ‘एक जिला-एक उत्पाद‘ वॉल में माटी कला के उत्पादों का भी प्रदर्शन होगा। – मिट्टी के बर्तनों से होने वाले लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए माटीकला मेलों और प्रदर्शनियों का एमएसएमई पॉलिसी के माध्यम से आयोजन किया जाएगा।

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