एफटीए और निर्यात प्रोत्साहन मिशन के दम पर भारत ने वित्त वर्ष 2027 में रखा 1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य

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नई दिल्ली। भारत वित्त वर्ष 2027 में देश के निर्यात को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर काम कर रहा है। इसके लिए सरकार प्रस्तावित निर्यात प्रोत्साहन मिशन और नए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर भरोसा कर रही है। यह जानकारी शुक्रवार को एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने दी। एनडीटीवी प्रॉफिट से बातचीत में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में निर्यात वृद्धि पिछले साल की तुलना में तेज रहेगी, और लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवश्यक 10-15 प्रतिशत की आवश्यक वृद्धि दर से भी अधिक निर्यात विस्तार हासिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अग्रवाल ने कहा कि प्रस्तावित निर्यात प्रोत्साहन मिशन भारत की व्यापार रणनीति का एक बड़ा स्तंभ बनने जा रहा है। इसके जरिए निर्यातकों को सहायता मिलेगी, विदेशी बाजारों तक पहुंच बेहतर होगी और घरेलू कारोबारों को वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, “हाल ही में हुए एफटीए समझौतों के लागू होने से आने वाले महीनों में निर्यात को अतिरिक्त बढ़ावा मिलने की संभावना है।” वाणिज्य सचिव के मुताबिक, वैश्विक सप्लाई चेन में हो रहे बदलावों का फायदा उठाने की स्थिति में भी भारत मजबूत स्थिति में है। दुनिया की कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब पारंपरिक केंद्रों से बाहर विनिर्माण और सोर्सिंग के विकल्प तलाश रही हैं। अग्रवाल ने कहा, “बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में भारत धीरे-धीरे एक भरोसेमंद और विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहा है।” इससे पहले वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यातकों से व्यापार समझौतों के जरिए मिलने वाले नए अवसरों का आक्रामक तरीके से फायदा उठाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि भारत को वित्त वर्ष 2027 में 1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का आंकड़ा पार करने का लक्ष्य रखना चाहिए। भू-राजनैतिक अनिश्चितताओं, कमजोर वैश्विक मांग और अमेरिका की ओर से लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बावजूद भारत का वस्तु और सेवा निर्यात वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 863.11 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि साल के दौरान मर्चेंडाइज निर्यात में सीमित वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन सेवा निर्यात कुल व्यापार वृद्धि का मुख्य आधार बना रहा। गोयल ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 का लक्ष्य हासिल करने के लिए लगभग 16-17 प्रतिशत निर्यात वृद्धि की जरूरत होगी। उन्होंने बताया कि भारत के संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के साथ एफटीए पहले से लागू हैं। वहीं, कई अन्य देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ बातचीत जारी है, ताकि भारत की वैश्विक व्यापार पहुंच को और मजबूत किया जा सके।

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