बोर्ड में राज्य के लिए पूर्णकालिक सदस्य पद किया जाए सृजित, देश में आदर्श जल प्रबंधन मॉडल के रूप में बीबीएमबी होगा अधिक सशक्त – जल संसाधन मंत्री

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जयपुर। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड का स्थापना दिवस (स्वर्ण जयंती समारोह) शुक्रवार को पंचकुला के इंद्रधनुष सभागार में आयोजित हुआ। समारोह में जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड अपनी स्थापना (15 मई 1976) से राजस्थान, पंजाब और हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों के मध्य जल वितरण, सिंचाई प्रबंधन और जल-विद्युत प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रावत ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान के 13 जिले पेयजल व सिंचाई के लिए रावी-ब्यास-सतलुज नदी प्रणाली के जल पर ही निर्भर है। विगत दशकों से इस परियोजना ने राजस्थान के मरु प्रदेश को हरा-भरा बनाने और आर्थिक समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि रावी-ब्यास-सतलुज प्रणाली में राजस्थान का हिस्सा निर्धारित है। राजस्थान इस प्रणाली के अंतिम छोर पर स्थित है। इसलिए जल वितरण वास्तविक आवश्यकता अनुरूप पारदर्शिता, समयबद्धता और निष्पक्षता से अंतिम छोर तक पहुंचाया जाए।
जल संसाधन मंत्री ने दिए आवश्यक सुझाव
जल संसाधन मंत्री ने कहा कि बांध सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए बांधों के अधिकतम भराव स्तर तक जल-संग्रहण के लिए वांछित अध्ययन शीघ्र कराकर उचित निर्णय लिया जाए। नवीनतम तकनीकी के क्षेत्र में फ्लोटिंग सोलर एवं पम्प्ड स्टोरेज पावर प्लांट की उपयोगिता का आकलन कर क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। डिजिटल युग में रियल-टाइम डिस्चार्ज मॉनिटरिंग, स्वचालित गेज प्रणाली, सैटेलाइट आधारित जल प्रबंधन, डिजिटल डेटा रिकॉर्डिंग तथा पारदर्शी ऑनलाइन डेटा शेयर का व्यापक उपयोग किया जाना चाहिए। इससे राज्यों में विश्वास और पारदर्शिता मजबूत होगी।
बीबीएमबी में राज्य को स्थाई सदस्य बनाया जाए
श्री रावत ने कहा कि राजस्थान सदैव संवाद, सहयोग और राष्ट्रीय हित की भावना में विश्वास करता है। उन्होंने केन्द्रीय विद्युत एवं आवास एवं शहरी कार्य मंत्री के समक्ष भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में राजस्थान को स्थाई सदस्य बनाए जाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान का रावी-ब्यास जल में 52.69 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद अब तक राज्य के किसी अधिकारी को बोर्ड में सदस्य नियुक्त नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान की सिंचाई, पेयजल तथा अन्य आवश्यकताएं बीबीएमबी प्रणाली पर निर्भर हैं। ऐसे में राजस्थान को बोर्ड में उचित भागीदारी मिलनी आवश्यक है। जल संसाधन मंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि राजस्थान के लिए बीबीएमबी में एक अतिरिक्त पूर्णकालिक सदस्य पद सृजित कर राज्य को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए। समारोह में केन्द्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल, पंजाब के जल संसाधन मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल, हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रृति चौधरी, केन्द्र सरकार के सचिव (विद्युत) श्री पंकज अग्रवाल और बोर्ड के अध्यक्ष श्री मनोज त्रिपाठी सहित विभिन्न राज्यों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

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