-बाल मुकुन्द ओझा
राष्ट्रीय डेंगू दिवस प्रतिवर्ष 16 मई को पूरे भारत में मनाया जाता है। डेंगू के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और बचाव के तरीके समझाने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है। हमारे देश में हमने काफी हद तक डेंगू पर काबू पाने का सफल प्रयास किया है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र के मुताबिक भारत में डेंगू के वर्ष 2025 में 1 लाख 21 हजार 824 मामले दर्ज़ किये गए। इनमें 131 लोगों की मौत हुई। जबकि वर्ष 2024 में दर्ज़ 2 लाख 33 हजार 519 मामलों से ये काफी कम है। वर्ष 2024 में 297 लोगों की मृत्यु हो गई थी। मृत्यु का आंकड़ा भी कम हुआ है। इस वर्ष 2026 के शुरूआती दो महीनों में 6927 मामले दर्ज़ हुए। इस अवधि में मौतों की संख्या दस रही। ये आंकड़े बताते है हमारे देश में साल दर साल डेंगू पर नियंत्रण के प्रभावी प्रयास सफलीभूत हुए है।
गर्मियों की शुरुआत के साथ रही घरों में और आसपास मच्छरों की संख्या बढ़ने लगती है। ये मच्छर कई रोग की वजह बन सकते हैं। मच्छरों से डेंगू-मलेरिया फैलता है। खासकर बारिश में डेंगू का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि डेंगू के मच्छर पानी में पनपते हैं। गर्मियों की शुरुआत के साथ रही घरों में और आसपास मच्छरों की संख्या बढ़ने लगती है। ये मच्छर कई रोग की वजह बन सकते हैं। मच्छरों से डेंगू-मलेरिया फैलता है। खासकर बारिश में डेंगू का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि डेंगू के मच्छर पानी में पनपते हैं। डेंगू एक ऐसी बीमारी है, जिसका इलाज शुरू से नहीं हुआ तो यह जानलेवा हो सकता है। `
मौसम परिवर्तन और बीमारियों का चोली दामन का साथ है। तापमान में भी घटत बढ़त होता है। इस वर्ष मौसम के अजब गजब नज़ारे देखने को मिल रहे है। कभी गर्मी कभी आंधी और बारिश तो कभी ठण्ड ने मौसम का मिज़ाज़ बिगाड़ रखा है। इस वर्ष मार्च और अप्रैल में भीषण गर्मी देखने मिली। इस अवधि में अनचाही बारिश ने गर्मी का प्रकोप नियंत्रित कर दिया। मई माह के पहले पखवाड़े में तापमान 48 डिग्री को पार कर गया। इसी के साथ डेंगू जैसी बीमारियां फैलते देर नहीं लगी। यह सर्व विदित है डेंगू मच्छर के कारण फैलता है और मच्छर गंदगी और ठहरे हुए पानी में पनपते हैं, तो आवश्यक है कि अपने आसपास स्वच्छता का पर्याप्त ध्यान रखा जाए।
जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी को तीन से चार दिन तक उल्टी, तेज बुखार और चक्कर आ रहे हैं तो इसे नजरंदाज न करें। तुरंत ब्लड सैंपल की जांच कराएं। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई है तो इलाज कराएं। इस मामले में बिलकुल भी लापरवाही न बरतें। डेंगू फीवर जिसे ‘हड्डी तोड़ बुखार भी कहां जाता हैं, भारत में तेजी से अपने पैर पसार रहा है। हर साल इस खतरनाक बीमारी के अनियंत्रित हो जाने का मुख्य कारण यह हैं कि इसकी वैक्सीन अभी तक उपलब्ध नहीं हैं। डेंगू की भयावहता का अंदाजा इसी पहलू से लगाया जा सकता है कि समय से उपचार न मिलने के कारण रोगी की मौत भी हो जाती है। विशेषकर जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है वे मौसमी बीमारियों का शिकार हो जाते है। देशभर से मिलने वाली खबरों के मुताबिक मौसम परिवर्तन के साथ ही मौसमी बीमारियां और वायरल बुखार का प्रकोप पैर पसारने लगा है, जिसके चलते चिकित्सालय में मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। मौसम परिवर्तन के साथ ही सर्दी, खांसी- जुकाम, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू, स्क्रब डेंगू, वायरल बुखार, उल्टी- दस्त के रोगियों की संख्या बढ़ी है। मच्छरों का प्रकोप भी बीमारियां बढ़ाने में सहायक हो रहा है। डॉक्टरों के अनुसार तापमान में उतार-चढ़ाव के चलते मौसमी बीमारियां बढ़ी हैं। इस मौसम में जोड़ों में दर्द, बदन दर्द, सिरदर्द, खांसी, जुकाम एवं बुखार होता है। बदलते मौसम में खान पान में सतर्कता रखनी जरूरी है।

डेंगू पर नियंत्रण के प्रभावी प्रयास
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