जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि भिवाड़ी में दलित नाबालिग बालक के साथ पुलिस की बर्बरता अत्यंत अमानवीय है और भाजपा सरकार की दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाती है। जयपुर के चिकित्सालय में बालक की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है। यह निंदनीय है कि पुलिस ने परिजनों की प्राथमिकी (FIR) तक दर्ज नहीं की। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली द्वारा पुलिस महानिदेशक से बात करने के बाद FIR दर्ज हुई। ऐसे में न्याय की आशा कैसे की जा सकती है? यह एक गंभीर प्रश्न है। गहलोत ने यहां जारी एक बयान में कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने ‘अनिवार्य FIR’ का नियम इसीलिए बनाया था ताकि पीड़ितों को न्याय मिलने का विश्वास रहे। इस कारण अपपाध के आंकड़े भले ही बढ़े परन्तु पीड़ितों को न्याय मिलना सुनिश्चित हुआ और शिकायत लेकर जयपुर आने वाले पीड़ितों की संख्या बेहद कम हो गई। किंतु वर्तमान में राजस्थान की स्थिति ऐसी हो गई है जहाँ दलित और महिलाएँ न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा जी को अविलंब इस प्रकरण में हस्तक्षेप करना चाहिए एवं दोषियों के विरुद्ध ऐसी कठोर कार्रवाई हो जो एक मिसाल कायम करे। साथ ही, अनिवार्य एफआईआर की व्यवस्था को पूरी तरह लागू किया जाए।

अनिवार्य FIR का नियम अब भी सख्ती से लागू किया जाना चाहिए : अशोक गहलोत
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