बढ़ता जंगल खुशियों का मंगल

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अंतरराष्ट्रीय वन दिवस प्रतिवर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है। अपनी मातृभूमि की मिट्टी और वन सम्पदा का महत्व समझने तथा वनों और जंगलों का संरक्षण करने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है। वैश्विक स्तर पर कुल वन क्षेत्र लगभग 4.14 अरब हेक्टेयर है यानी पृथ्वी के भू-भाग का करीब 32 प्रतिशत। इसमें से भारत अकेले लगभग 72.7 मिलियन हेक्टेयर (72,739 हजार हेक्टेयर) का वन क्षेत्र अपने पास रखता है – यानी दुनिया के कुल वन क्षेत्र का करीब 2 फीसदी। रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि 1990–2000 के दशक में जहाँ हर साल लगभग 10.7 मिलियन हेक्टेयर वन नष्ट हो रहे थे, वहीं 2015–2025 के बीच यह शुद्ध हानि घटकर लगभग 4.12 मिलियन हेक्टेयर रह गई है। नुकसान की रफ्तार कम हुई है, हालांकि खतरा अभी भी बना हुआ है। वन क्षेत्र के मामले में भारत विश्व में 9वें स्थान पर है। भारत ने 2015–2025 के बीच हर साल लगभग 0.191 मिलियन हेक्टेयर शुद्ध वन वृद्धि दर्ज की है, जिससे यह दुनिया में तीसरे स्थान पर है। भारत में वन और पेड़ों का कुल क्षेत्रफल अब 8,27,357 वर्ग किलोमीटर हो गया है, जो देश के कुल क्षेत्रफल का 25.17 प्रतिशत है। 2021 से 2023 के बीच इसमें 1,445.81 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।दुनिया में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिक विकास और आधुनिक जीवन शैली की वजह से प्राकृतिक वनों पर मानव समाज का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसे ध्यान में रखकर मानव जीवन की आवश्यकताओं के हिसाब से वनों के संतुलित दोहन तथा नये जंगल लगाने के लिए भी विशेष रूप से काम करने की जरूरत है। मनुष्य के जीवन में वन महत्वपूर्ण रहे हैं। परन्तु जैसे-जैसे सभ्यता का विकास हुआ वैसे-वैसे मनुष्य ने अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वृक्षों को काटना आरम्भ कर दिया। वनों की लगातार कटाई होती गई और वातावरण पर भी इसका प्रभाव पड़ा। आज हमारी स्थिति यह हो गई है की वृक्षों की छाव मिलनी भी दुर्लभ हो गई है।
वनों से हमें एक नहीं अपितु अनेकों लाभ है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में मनुष्य के स्वास्थ्य के लिये वन को बहुत ही उपयोगी, लाभकारी और जीवनदायी बताया गया हैं। वन और जीवन दोनों एक-दूसरे पर आश्रित हैं। वनों से हमें शुद्ध ऑक्सीजन और भोजन मिलता है। मनुष्य और अन्य किसी भी प्राणी का जीवन ऑक्सीजन और भोजन के बिना नहीं चल सकता। वृक्ष और वन भू-जल को भी संरक्षित करते हैं। जैव-विविधता की रक्षा भी वनों की रक्षा से ही संभव है। विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए बहुमूल्य वनौषधियां हमें जंगलों से ही मिलती हैं।
वन और वनस्पतियां आक्सीजन देकर हमें जीवन प्रदान करती हैं। बिना आक्सीजन के हम जीवित रह ही नहीं सकते और पेड़-पौधे यही जीवनदायिनी आक्सीजन छोड़ते हैं। एक स्वस्थ पेड़ हर दिन लगभग 230 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है, जिससे सात लोगों को प्राण वायु मिल पाती है। वे हमारे द्वारा छोड़ी गई विषैली गैस कार्बन-डाइ-आक्साइड को ग्रहण करते हैं। कुछ वन्य पौधे ऐसे भी होते हैं जो रात में भी आक्सीजन छोड़ते हैं। पीपल, नीम, तुलसी, एलोवेरा, एक्समस कैक्टस, सर्पेन्टाइल (स्नेक प्लांट), आर्चिड्स, आरेंजग्रेवेरा आदि ऐसे पेड़-पौधें हैं जो रात में भी आक्सीजन छोड़ते हैं। पेड़-पौधे न रहें तो जिन्दा रहने के लिए साँस और जीवन की धड़कन ही बन्द हो जायेगी। अब भी समय है हम समझे और समझाए की पेड़ पौधे हमारे जीवन के लिए कितने अहम् और प्राणदायक है।
हमने प्रगति की दौड़ में मिसाल कायम की है मगर पर्यावरण का कभी ध्यान नहीं रखा जिसके फलस्वरूप पेड़ पौधों से लेकर नदी तालाब और वायुमण्डल प्रदूषित हुआ है और मनुष्य का सांस लेना भी दुर्लभ हो गया है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई ने पर्यावरण को बहुत अधिक क्षति पहुंचाई है। कोरोना काल में वनों की अहमियत का देश और दुनिया को एहसास हुआ। वन और जीवन दोनों एक-दूसरे पर आश्रित हैं। वनों से हमें शुद्ध ऑक्सीजन मिलती है और मनुष्य और अन्य किसी भी प्राणी का जीवन ऑक्सीजन के बिना नहीं चल सकता। वृक्ष और वन भू-जल को भी संरक्षित करते हैं। जैव-विविधता की रक्षा भी वनों की रक्षा से ही संभव है। विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए बहुमूल्य वनौषधियां हमें जंगलों से ही मिलती हैं।

– बाल मुकुन्द ओझा

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