साध्वी डॉ. कुमुद लता जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित ‘शांति एवं सद्भाव अनुष्ठान’ —राज्यपाल ने तप, अहिंसा, अपरिग्रह आदि आदर्शों को आत्मसात करने का किया आह्वान

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जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे शनिवार को साध्वी डॉ. कुमुद लता जी महाराज के सानिध्य में आयोजित ‘शांति एवं सद्भाव अनुष्ठान’ में सम्मिलित हुए। उन्होंने महासती डॉ. कुमुद लता को प्रणाम निवेदित करते हुए उनका आशीर्वाद लिया।
बागडे ने इस दौरान कहा कि जैन धर्म नहीं संस्कृति है। उन्होंने जैन धर्म के तप, अहिंसा, अपरिग्रह आदि आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि साधु—साध्वियों के पुण्य प्रताप से ही भारत की धर्म—धरा सदा ज्ञान में संपन्न और समृद्ध रही है। उन्होंने ‘शांति एवं सद्भाव अनुष्ठान’ को भारतीय संस्कृति की महान परंपरा बताया। राज्यपाल ने कहा कि अनुष्ठान क्रियाकांड नहीं, बल्कि स्वयं को एक अनुशासन में ढालना है। उन्होंने मनुष्य के उत्कर्ष और कल्याण के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान केवल सूचनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि ज्ञान वह है जो जीवन को प्रकाशित कर दे। उन्होंने साध्वी डॉ. कुमुद लता जी के जीवन को प्रेरणादायक बताते हुए समाज और धर्म के लिए श्रेष्ठ कार्य करने वाले जनों का अभिनंदन भी किया।

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