जयपुर: भारतीय शिल्पकला का अनूठा उत्सव: 12 शिल्पकारों की अद्भुत कृतियां प्रदर्शित

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जयपुर। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक अद्वितीय प्रदर्शन है – शिल्पकार आर्ट और क्राफ्ट प्रदर्शनी 2025 जिसमें 12 शिल्पकार अपने अद्भुत शिल्प कौशल का प्रदर्शन कर रहे हैं। ये शिल्पकार, जिन्होंने विभिन्न पारंपरिक कलाओं में महारत हासिल की है, भारतीय शिल्पकला में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान और पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। इस प्रदर्शनी का आज विधिवत उद्घाटन एमएलए, गोपाल शर्मा द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलन से किया गया। इसके अलावा प्रदर्शनी में प्रेजिडेंट, राजस्थान चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के.एल.जैन; डीसी हैंडीक्राफ्ट्स सीतापुरा जयपुर, वरिष्ठ सहायक निदेशक, रजत वर्मा और सुधीर माथुर शामिल थे। ये शिल्पकार, जो अपने-अपने शिल्प में निपुण हैं, अपनी परंपराओं को संरक्षित और विकसित कर रहे हैं, जिससे भारतीय कला को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है। उनकी अद्वितीय कारीगरी और समर्पण भारत की शिल्पकला की अनंत सुंदरता और विविधता को जीवंत बनाए रखने का उदाहरण है। प्रदर्शनी में सबसे ख़ास आकर्षण का केंद्र रहा प्रसिद्ध रत्न शिल्पकार, पृथ्वीराज कुमावत द्वारा बनाया गया पन्ना रत्न जड़ित उत्कृष्ट प्राकृतिक कृति जिसके दोनों ओर गणेश जी की जटिल आकृतियाँ उकेरी गई हैं और इसे बड़ी ही कुशलता और बारीकी से तैयार किया है। इस नक्काशी को नाज़ुक फूलों और पत्तियों से सजाया गया है, जो कारीगर के असाधारण कौशल को दर्शाता है। मूर्ति का वज़न 2367 कैरेट, ऊँचाई 8 सेमी, चौड़ाई 9 सेमी तथा गहराई 6 सेमी है। राज्य स्तरीय एवं कलारत्न पुरस्कार से सम्मानित, सुनीश मारू की बजरंग बलि की विश्व प्रसिद्ध जेमस्टोन पेंटिंग जो अन्यन्त्र कही नही बनाती है, इस प्रकार की पेंटिंग को कांच के पीछे से बनाया जाता है। राम सोनी द्वारा भगवान कृष्ण की यमुना तट पर कदम वृक्ष के नीचे अपनी गाय चराते हुए बैठे सांझी आर्ट (पेपर कटिंग) चित्र जो गोचारण लीला को दर्शाता है और शिपगुरु विनोद कुमार जांगिड़ की चन्दन की लकड़ी पर नक्काशी से भगवान महावीर के मंदिर में भगवान की 24 तीर्थंकरों का निवास है।

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