संजय राउत का आरोप : मुख्य चुनाव आयुक्त और गृह मंत्री अमित शाह ने लोकतंत्र को किया कमजोर

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नई दिल्ली। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और गृह मंत्री अमित शाह पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया और चुनाव में कथित हेरफेर को लेकर उन्हें तुरंत पद से हटाने की मांग की। संजय राउत ने एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर 2 चुनाव आयुक्तों की आपत्ति वाली इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर संजय राउत ने प्रेस कांफ्रेस में कहा, “चुनाव आयोग तीन लोगों को मिलकर मिलता है, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं। संधू और जोशी ने शिकायत की है कि 10 महीने में हमने एसआईआर, फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर 14 बार आपत्ति जताई है लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया है। मुख्य चनाव आयुक्त नहीं माने। इस संबंध में कैबिनेट सेक्रेट्री से शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसका मतलब है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में अमित शाह चुनाव जीत गए हैं। यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की वजह से भाजपा चुनाव जीत रही है। अमित शाह के इशारे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने गड़बड़ी की।” संजय राउत ने कहा, “ज्ञानेश कुमार को निलंबित किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इस देश में चुनाव एक मजाक बन गए हैं। भारत चुनाव आयोग (ईसीआई) गृह मंत्रालय के अधीन आता है। अगर प्रधानमंत्री देश को बचाना चाहते हैं, तो उन्हें अमित शाह को कैबिनेट से हटा देना चाहिए। अगर पीएम मोदी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो मैं राष्ट्रपति से ज्ञानेश कुमार को हटाने की अपील करूंगा। अगर राष्ट्रपति भी कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, तो सेना प्रमुख को देश को ऐसे ‘हुक्मशाहों’ से बचाने के लिए आगे आना चाहिए।”
संजय राउत ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गृह मंत्री अमित शाह को तुरंत बर्खास्त करना चाहिए।” संजय राउत ने आरोप लगाया कि एसआईआर के तहत पूरे देश में 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को इस मामले को संज्ञान लेना चाहिए।
संजय राउत ने एक्स पोस्ट में कहा, “राहुल गांधी ने गलत कहा था कि देश में वोट की चोरी हो रही है। असल में, यह वोट की चोरी नहीं बल्कि वोटों की डकैती है। यह डकैती एक सॉफ्टवेयर के जरिए और सरकार के इशारे पर की जा रही है। इसके मुखिया ज्ञानेश कुमार हैं। सॉफ्टवेयर का नाम ईसीआई नेट है। इसे अदालतों का भी सीधा और परोक्ष समर्थन मिला हुआ है। आज की इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में ठीक यही बात कही गई है।”
उन्होंने कहा, “इस सॉफ्टवेयर ने मनमाने ढंग से लिस्ट से वोटरों के नाम हटा दिए हैं। बिना किसी गजट नोटिफिकेशन के सीईसी ने फॉर्म 6 में बदलाव किए हैं। वोटरों के नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार, जो ईआरओएस के पास होता है, उनसे छीनकर प्राइवेट कंपनियों को सौंप दिया गया है। जब कमीशन में ईमानदार अधिकारी इसका विरोध करते हैं, तो उन्हें किनारे कर दिया जाता है। लेकिन अब दो चुनाव आयुक्तों ने खुलकर बगावत कर दी है! इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह मुख्य आरोपी हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भी आरोपियों में शामिल हैं, दोनों को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए!”

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