मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित

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जयपुर। राज्य में विभिन्न अंत​रराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के सहयोग से संचालित बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लक्ष्य, प्रगति एवं निगरानी प्रक्रिया की मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में समीक्षा की। बैठक में वित्त विभाग द्वारा विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति, वित्तीय स्थिति एवं भविष्य की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। वित्त विभाग के अधिकारियों ने अवगत कराया कि वर्तमान में एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक, जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी, न्यू डेवलपमेंट बैंक सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियों के सहयोग से प्रदेश में अनेक विकास परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्य सचिव ने वित्त, जल संसाधन, सार्वजनिक निर्माण, ऊर्जा, वन एवं स्वायत्त शासन विभाग द्वारा संचालित 11 प्रमुख परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं विकसित राजस्थान@2047 के लक्ष्यों के अनुरूप निर्धारित समय सीमा में पूर्ण की जाएं। उन्होंने बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं की प्रभावी निगरानी के लिए ईएपी सेल को और अधिक सशक्त बनाने, डेटा संकलन एवं विश्लेषण की प्रभावी प्रणाली विकसित करने तथा विषय विशेषज्ञों को सेल में शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने, विलंबित परियोजनाओं की विशेष समीक्षा करने तथा कार्यों की गुणवत्ता का विश्लेषण करने के नि​र्देश दिये। श्रीनिवास ने राजस्थान अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम के शेष कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्थान सेकेंडरी टाउन डेवलपमेंट सेक्टर प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हुए श्रीगंगानगर सहित विभिन्न शहरों में लंबित कार्यों को समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं से शहरों में आए बदलाव, नागरिक सुविधाओं की सुलभता तथा सेवा वितरण में सुधार का नियमित मूल्यांकन किया जाए।उन्होंने शहरों में समयबद्ध जलापूर्ति सुनिश्चित करने तथा नॉन-रेवेन्यू वाटर को कम करने के लिए आधुनिक तकनीकों एवं जीआईएस मैपिंग के प्रभावी उपयोग करने को निर्देशित किया। साथ ही कहा कि बुनियादी ढांचे के निर्माण में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित किये जाएं। जल संसाधन विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने जाईका द्वारा वित्तपोषित राजस्थान वाटर सेक्टर लाइवलीहुड इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत सिंचाई सुधार कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने इंदिरा गांधी नहर परियोजना के सुदृढ़ीकरण एवं रिलाइनिंग कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इससे लगभग 650 क्यूसेक जल की छीजत को रोका जा सका है। उन्होंने पश्चिमी राजस्थान में जलभराव की समस्या के समाधान के लिए चल रहे कार्यों में गति बढ़ाने के निर्देश भी दिए। बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्वीकृत बांधों के मरम्मत एवं विकास कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। वहीं जाईका सहायता प्राप्त रूरल वाटर सप्लाई एंड फ्लोरोसिस मिटिगेशन प्रोजेक्ट फेज-II की प्रगति की भी समीक्षा की गई। ऊर्जा क्षेत्र के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर प्रोजेक्ट-II की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने राइट ऑफ वे एवं वैधानिक स्वीकृतियों से संबंधित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विभागीय समन्वय को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उदयपुर, हनुमानगढ़ एवं डूंगरपुर में विकसित हो रहे विद्युत अवसंरचना कार्य प्रदेश की अक्षय ऊर्जा क्षमता को नई ऊंचाई प्रदान करेंगे। वन विभाग की परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने डिजी-वन फॉरेस्ट स्टैक जैसे तकनीकी नवाचारों की सराहना की तथा वनीकरण, जैव विविधता संरक्षण एवं रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियों द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं की रैंकिंग एवं मूल्यांकन का नियमित विश्लेषण किया जाए। इससे राज्य की परियोजनाओं के प्रदर्शन में निरंतर सुधार सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने वित्त विभाग को फाइनेंस काउंसलिंग, लोन नेगोशिएशन, रिइम्बर्समेंट मॉनिटरिंग तथा विभिन्न विभागों को आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने इन परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार एवं अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियों के स्तर पर प्रभावी समन्वय एवं पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण विकास तथा अन्य क्षेत्रों में प्रस्तावित एवं संचालित बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने सभी विभागीय सचिवों को निर्देश दिए कि अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें तथा परियोजनाओं को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुखी ढंग से पूर्ण करें। इस अवसर पर सम्बंधित विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव एवं शासन सचिव उपस्थित रहे।

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