जयपुर: राजस्थान राज्य अन्य पिछडा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग द्वारा राज्य में स्थानीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचन में अन्य पिछडा वर्ग का आरक्षण की अनुशंषा प्रतिवेदन तैयार किये जाने हेतु अन्य पिछडा वर्ग के परिवारों का ऑनलाईन सर्वे करवाया जा रहा है। ओबीसी आयोग राजस्थान के जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि आयोग द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुरूप सम्पन्न करवाए जा रहे ऑनलाइन सर्वे एवं उपलब्ध डाटा एवं अनुशंषा रिपोर्ट को लेकर एवं सर्वे के संबंधित कार्य प्रणाली व प्रक्रिया को लेकर कुछ भ्रामक जानकारी आमजन में प्रसारित होने की जानकारी आयोग को हुई है। जिससे आयोग सर्वे से संबंधित तथ्यों से परे, जो आधारहीन व निर्मूल आशंकाए व्यक्त कर आमजन को भ्रमित करने का कुतश्चित प्रयास किया जा रहा है जबकि वास्तविक स्थिति सर्वे में अपनायी जा रही प्रकिया से पूर्णतया भिन्न है। आयोग द्वारा सर्वे से संबंधित अपनायी जा रही प्रक्रिया पूर्णतया विश्वसनीय, वैज्ञानिक, पारदर्शिता पूर्ण है। फिर भी आयोग यह उचित समझता है कि सर्वे प्रक्रिया जो अपनायी जा रही है उसके बारे में आमजन को स्पष्ट स्थिति से अवगत कराना जरूरी है। आयोग द्वारा केवल अधिकृत प्रगणकों द्वारा ही डाटा फीड किया जा रहा है। आयोग द्वारा भली-भांति सुनिश्चित किया जा रहा है कि अधिकृत प्रगणकों द्वारा ही केवल डेटा एन्ट्री फीड की जायेगी साथ ही प्रगणकों को ही ओबीसी के परिवारों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए साथ ही मतदाता सूची एवं ओबीसी की अधिसूचित जातियों की सूची साथ रखने के निर्देश दिये गये है ताकि प्रत्येक अन्य पिछड़ा वर्ग के परिवार का सत्यापन कर निर्धारित प्रारूप के कॉलम की पूर्ति सही व प्रमाणित जानकारी प्राप्त कर दर्ज की जा सके। पोर्टल पर उपलब्ध सीटीजन विकल्प आम नागरिकों के द्वारा स्वतंत्र रूप से अपने स्तर पर डेटा दर्ज करने हेतु उपलब्ध नहीं करवाया गया है। यह केवल प्रगणकों की संख्या अत्यधिक होने एवं निजी व मेडिकल परिस्थितियों में उनकी ड्यूटियों में लगातार परिवर्तन होने के कारण एवं माननीय उच्चतम न्यायालय व माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा चुनाव शीघ्रताशीघ्र करवाने हेतु निर्देशों की पालना स्वरूप व बगैर कोई अनुचित विलंब किए अनुशंसा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आशय से समयबद्ध ढंग से सर्वे सम्पन्न कराने के लिए यह एकमात्र वैकल्पिक तकनीकी सुविधा है। यदि किसी कारणवश प्रगणकों के पंजीकृत मोबाईल नम्बर व एसएसओ आईडी के अतिरिक्त कोई अनाधिकृत मोबाईल नम्बर से डेटा सिस्टम में प्राप्त होने की स्थिति में उपलब्ध तकनीकी प्रक्रिया अनुसार आयोग अपने स्तर पर उसका परीक्षण (फिल्टरिंग) कर हटा सकेगा। एसएसओ आईडी का उपयोग कर प्रमाणिकृत वैध डाटा आयोग को प्राप्त होना भी सुनिश्चित किया जायेगा। जिससे केवल अधिकृत प्रगणकों द्वारा प्रमाणिकृत वैध डाटा ही अंतिम डेटा बेस में रहेगा। आयोग के द्वारा सर्वे कार्य हेतु राज्य व जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनरों व प्रगणकों को ऑपन ट्रेनिंग दी गई है एवं सर्वे की प्रक्रिया के बारे में उन्हे भली-भांति अवगत कराया गया है, प्रक्रिया से उन्हें कतई अनभिज्ञ नहीं रखा गया है। सर्वे की प्रक्रिया राजधारा सर्वे ऐप के जरिये समस्त जिला एवं ब्लॉक स्तर पर संबंधित अधिकारियों द्वारा मॉनिटरिंग करायी जा रही है। यहां यह तथ्य भी रोशन है कि आयोग की रिपोर्ट का अनन्य आधार वर्तमान सर्वेक्षण ही नहीं है। आयोग द्वारा विभिन्न विश्वसनीय आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सुसंगत आंकड़ों व तथ्यों का अध्ययन किया जा रहा है। जिनमें जन आधार डेटा बेस, वर्ष 2011 की जनसंख्या में हुई वृद्धि का अनुमान एवं निर्वाचन आयोग से प्राप्त मतदाताओं की संख्याओं में वृद्धि के अन्य आधारों पर भी विचार किया जायेगा। ऐसी स्थिति में यह कहना कि कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से डेटा दर्ज कर सर्वे की प्रक्रिया को प्रतिकूल ढंग से प्रभावित करने हेतु समर्थ है। यह तथ्य भी उपरोक्त स्थिति से स्पष्ट है कि काम में ली जा रही सर्वे प्रक्रिया से अन्य पिछड़ा वर्ग के परिवारों की संख्या कम करने की कोई स्थिति नहीं बनेगी।
प्रेस विज्ञप्ति-राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग द्वारा उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसरण में सम्पन्न करवाए जा रहे सर्वे के संबध में तथ्यात्मक व वास्तविक स्थिति से अवगत कराया
ram


