पिड़ावा : रक्षाबंधन विधान में सात सौ मुनि राजो को श्री फल समाज जन द्वारा समर्पित किये, राग द्वेष को छोड़कर मनुष्य को अच्छे व धार्मिक कार्य करने से पुण्य प्रबल होता है

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पिड़ावा। सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वाधान में खंडूपुरा में स्थित नवीन जिनालय जूना मंदिर में गुरुदेव उपाध्यय विकसन्त सागर ससंघ व आर्यिका रत्न गुरुमा चिन्मयमती माताजी संसघ का अदभुत अद्वितीय अविस्मरणीय पल अभूतपूर्व वात्सलय द्वय गुरुभक्तों को रक्षाबंधन विधान पर आशीर्वाद के रूप में मिला। मुनि विष्णु कुमार एवं अन्य 700 मुनि राजो की पूजा अर्चना करते हुए सात सौ श्री फल समाज जन व चातुर्मास कमेटी के द्वारा समर्पित किए गए। गुरुमा के आशीर्वाद से रक्षाबंधन विधान के पुण्यार्जक परिवार गुणमाला जैन, मनसुख जैन, ओमप्रकाश जैन नयापुरा परिवार को मिला। विधान में प्रत्यके इन्द्रो द्वारा एक एक मुनिराजों के अर्घ भक्ति भाव से चढ़ाए गए। विधान में भक्ति का रंग मुस्कान दीदी, शीलनी दीदी, आशीष जैन संगीतकार, मक्खन जैन द्वारा बिखेरा गया। 16 दिवसीय मंडल विधान के प्रथम कलश का सौभाग्य त्रिलोक जैन नयापुरा परिवार, दूसरा कलश मनसुख जैन नयापुरा परिवार, तीसरा कलश अजेश जैन शैलेन्द्र जैन नयापुरा परिवार, चौथा कलश प्रमोद जैन गुड्डा पतंग वाले परिवार, पांचवा कलश मनोज जैन महावीर जैन वीडियो चौराहा परिवार द्वारा प्राप्त किया। जिसके बाद गुरुदेव विकसंत महाराज जी का पादप्रक्षालन कोमलचंद जैन परिवार व आर्यिका चिन्मय मति माताजी को शास्त्र भेंट अमित जैन रेवाड़ी दिल्ली परिवार, गुरुदेव को शास्त्र भेट ओमप्रकाश सेवन स्टार नलखेड़ा परिवार को प्राप्त हुआ। जिसके बाद गुरुदेव व माताजी के उदबोधन में बताया गया कि राग द्वेष को छोड़कर मनुष्य को अच्छे व धार्मिक कार्य करने से पुण्य प्रबल होता है। अंत मे चातुर्मास समिति अध्यक्ष मुकेश जैन व रेखा जैन देवास द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया। जिसके बाद पुण्यार्जक परिवार मनसुख जैन द्वारा समाजन को प्रभावना वितरित की गई।

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