पहाड़ के सीने में ‘तेल कवच’: भारत की ऊर्जा सुरक्षा का विशाखापट्टनम मॉडल

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विशाखापट्टनम। समुद्र की गहराइयों से आने वाला कच्चा तेल, पहाड़ को काटकर बनाई गई भूमिगत गुफाओं में सुरक्षित भंडारण और अत्याधुनिक रिफाइनरी—विशाखापट्टनम में भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एकीकृत ढांचा तैयार हो चुका है।

यहाँ 1.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) की भूमिगत हार्ड-रॉक कैवर्न मौजूद है। इसमें 1.03 MMT रणनीतिक रिज़र्व और 0.30 MMT HPCL के परिचालन के लिए है। अंतरराष्ट्रीय संकट या आपूर्ति बाधित होने पर यह कैवर्न देश को आपातकालीन बैकअप देती है।

क्षमता का ऐतिहासिक विस्तार
1957 में महज 0.675 MTPA से शुरू हुई HPCL की विशाख रिफाइनरी की क्षमता आधुनिकीकरण (VRMP) के बाद 15 MTPA पहुँच चुकी है। रिफाइनरी ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 16.04 MMT क्रूड प्रोसेस किया।

RUF तकनीक और AI का दम
रिफाइनरी में शामिल 3.55 MTPA क्षमता वाली ‘रेसिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी’ (RUF) भारी अवशेष तेल को 93% तक मूल्यवान डीजल और पेट्रोल में बदल देती है। RUF से रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 11.6 तक पहुँच गया है। इसके संचालन में AI ऑपरेटिंग सिस्टम रियल-टाइम निगरानी और अलर्ट प्रदान करता है।

पाइपलाइन नेटवर्क
तैयार ईंधन 572 किमी लंबी ‘विशाख-विजयवाड़ा-सिकंदराबाद’ (VVSPL) और प्रस्तावित 540 किमी लंबी ‘विशाख-रायपुर’ पाइपलाइन के जरिए देश भर में पहुँचता है। हालिया वैश्विक संकटों के दौरान इसी भूमिगत रिज़र्व ने निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी।

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