जयपुर। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन केवल जीविका का साधन नहीं बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। किसान और पशुपालक अपने पशुओं की देखभाल वर्षों तक करते हैं। एक दुधारू पशु की अचानक मृत्यु कई बार परिवार की आय का बड़ा हिस्सा छीन लेती है। ऐसे समय में पशु बीमा पशुपालक के लिए आर्थिक संबल बन सकता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की आजीविका को संबल देने के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाएं धरातल पर वरदान साबित हो रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील नेतृत्व में राज्य सरकार की मंगला पशु बीमा योजना इसी सोच के साथ पशुपालकों को पशुधन के जोखिम से सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसका एक जीवंत उदाहरण विकसित भारत जन सेवा अभियान 2026 के तहत पंचायत समिति जैसलमेर में आयोजित शिविर के दौरान देखने को मिला, जहां संकट की घड़ी में पशुपालकों को तुरंत आर्थिक राहत प्रदान कर उनके चेहरों पर मुस्कान लौटाई गई।
मुसीबत में काम आया बीमा, मिला ₹40,000 का क्लेम
जैसलमेर क्षेत्र की सीमा गोपा पशुपालन का काम करती है। उन्होंने अपने पशुओं का बीमा करवा रखा था। अचानक उनके एक बीमित पशु की असमय मृत्यु हो जाने पर गहरा आर्थिक आघात लगा । ऐसे समय में मंगला पशु बीमा योजना उनके लिए बहुत बड़ा संबल बनकर उभरी। उन्होंने क्लेम के लिए आवेदन किया और सभी कार्रवाई पूरी करते हुए शिविर के दौरान अधिकारियों द्वारा उन्हें ₹40,000 का क्लेम प्रमाण पत्र सौंपा गया। सीमा गोपा के साथ-साथ क्षेत्र की अन्य महिला पशुपालकों लक्ष्मी देवी, राधा कंवर और राखी पुरोहित सहित कई अन्य पशुपालकों को भी उनके बीमित पशुओं की आकस्मिक मृत्यु होने पर राज्य सरकार द्वारा तय मुआवजा राशि सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में ट्रांसफर की गई।
पशुपालकों के चेहरों पर छाई खुशी
बीमा क्लेम की राशि सीधे खाते में मिलने और सहायता प्रमाण पत्र पाकर सभी पशुपालकों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने भावुक होकर सरकार और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा, पशुधन की मृत्यु से हमारी आजीविका का साधन छिन गया था और हम गहरे संकट में थे। लेकिन सरकार द्वारा मिली इस सहायता राशि से हम अब अपनी आजीविका चलाने के लिए नए पशु खरीद सकेंगे और हमें अपने परिवार का भरण-पोषण अच्छे से कर पाने में बहुत सहायता मिलेगी। मंगला पशु बीमा योजना जैसे प्रयास पशुपालन को जोखिम से सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि पशुपालक को बीमारी की स्थिति में समय पर पशु चिकित्सा सेवा मिले और मृत्यु की स्थिति में बीमा सुरक्षा प्राप्त हो, तो पशुपालन के प्रति उसका भरोसा और मजबूत होता है। इस तरह पशु स्वास्थ्य सेवाओं और बीमा सुरक्षा का समन्वय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी, लचीला बनाने में योगदान दे सकता है। यह शिविर इस बात का भी प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब प्रशासन और कल्याणकारी योजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ आमजन तक पहुंचती हैं, तो वे सही मायनों में आमजन का सहारा बनती हैं।


