जयपुर। मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री (सीएसईएएम) देखना, डाउनलोड करना, रखना या साझा करना अब बेहद भारी पड़ सकता है। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस साइबर अपराध शाखा ने ऐसी आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार पर सख्त निगरानी और कार्रवाई शुरू कर रखी है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, साइबर क्राइम, राजस्थान श्री वी.के. सिंह ने बताया कि प्रदेश में ऐसे मामलों में अब तक कई प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं।
टेलीग्राम-डिस्कॉर्ड के गुप्त ग्रुप बने प्रसार का माध्यम
एडीजी वीके सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार के लिए टेलीग्राम और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर गुप्त या पेड ग्रुप और चैनल बनाते हैं। इनमें सदस्य फर्जी अथवा गुमनाम पहचान के साथ जुड़ते हैं और आपस में आपत्तिजनक सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं। कई मामलों में सामग्री सीधे निजी संदेश के जरिए भेजी जाती है, जबकि गूगल ड्राइव अथवा अन्य क्लाउड स्टोरेज पर सामग्री अपलोड कर केवल उसका लिंक साझा किया जाता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी आरोपी पकड़ से बचने के लिए कोडेड शब्दों और हैशटैग का इस्तेमाल करते हैं। कई बार इंस्टाग्राम या फेसबुक जैसे सामान्य प्लेटफॉर्म से संपर्क शुरू करने के बाद बातचीत को कम निगरानी वाले प्लेटफॉर्म पर ले जाया जाता है। राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार इन माध्यमों से जुड़कर ऐसी सामग्री भेजना अथवा प्राप्त करना गंभीर दंडनीय अपराध है।
7,800 से अधिक यूआरएल और 15,326 मोबाइल नंबर चिन्हित
एडीजी वीके सिंह ने बताया कि राजस्थान पुलिस की कार्रवाई के तहत इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट और व्हाट्सऐप से जुड़े लगभग 7,800 यूआरएल/प्रोफाइल, 15,326 मोबाइल नंबर तथा 100 डिवाइस चिन्हित कर ब्लॉक करवाए गए हैं। तकनीकी विश्लेषण और एनसीएमईसी की रिपोर्ट्स के आधार पर संबंधित मोबाइल नंबर, अकाउंट और डिजिटल ट्रेल की पहचान की गई। इसके बाद संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को सूचना देकर आपत्तिजनक लिंक और मोबाइल नंबर ब्लॉक करवाए गए।
एनसीएमईसी रिपोर्ट के आधार पर रिपीटेड ऑफेंडर पर कार्रवाई
एनसीएमईसी की टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर बार-बार ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए गए व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए गए हैं। चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों के संबंधित थानों में ऐसे मामलों में प्रकरण दर्ज हुए हैं।
राजस्थान पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस एजेंसियों के साथ भी समन्वय कर ऐसे ग्रुप और नेटवर्क पर लगातार नजर रख रही है। सीएसईएएम की खरीद-फरोख्त अथवा आदान-प्रदान में सक्रिय व्यक्तियों की पहचान कर संबंधित राज्य की पुलिस को सूचना दी जा रही है, ताकि वहां भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके।
गुमनाम समझकर ऐसी गतिविधि करने वालों को पुलिस की सख्त चेतावनी
राजस्थान पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेट पर गुमनाम पहचान के पीछे छिपकर बाल यौन शोषण सामग्री देखना, डाउनलोड करना, रखना अथवा साझा करना सुरक्षित नहीं है। पुलिस तकनीकी माध्यमों से ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रख रही है और डिजिटल ट्रेल के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की पहचान की जा रही है।
अभिभावक बच्चों के ऑनलाइन इस्तेमाल पर रखें नजर
राजस्थान पुलिस ने अभिभावकों से बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट उपयोग पर ध्यान देने तथा उन्हें असुरक्षित ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति जागरूक करने की अपील की है। किसी भी संदिग्ध लिंक, समूह, चैनल अथवा ऐसी सामग्री की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की सलाह दी गई है। बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री देखना, डाउनलोड करना, रखना या साझा करना पॉक्सो अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता के सुसंगत प्रावधानों के तहत गंभीर दंडनीय अपराध है। इस अवसर पर एसपी सुमित मेहरड़ा ने भी जानकारी दी। एडीजी श्री सिंह ने आह्वान किया है कि संदिग्ध सामग्री या गतिविधि की सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर दी जा सकती है।



