कोटा जिला प्रभारी सचिव ने ली बैठक वंदे गंगा अभियान में सार्थक कार्य हों, जन-जन तक पहुंचे जल संरक्षण का संदेश -जिला प्रभारी सचिव

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जयपुर। कोटा जिला प्रभारी सचिव डॉ रवि कुमार सुरपुर (सचिव, आयोजना विभाग,सांख्यिकी, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग) ने कहा कि वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान राज्य सरकार का जल संरक्षण को समर्पित महत्वकांक्षी अभियान है, इसके अंतर्गत सभी विभाग नवाचारी पहल करते हुए ऐसे कार्य करें जिससे यह अभियान सार्थक सिद्ध हो सके। प्रभारी सचिव ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में अभियान के संबंध में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक लेकर आवश्यक निर्देश दिए। जिला कलक्टर पीयूष समारिया भी मौजूद रहे। जिला प्रभारी सचिव ने कहा कि अभियान में प्रभावी गतिविधियां आयोजित हों जिससे जन-जन तक जल संरक्षण का संदेश पहुंच सके। उन्होंने वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान के साथ ही हरियालो राजस्थान अभियान के संबंध में भी चर्चा कर आवश्यक निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कहा कि वंदे गंगा अभियान अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा आवंटित लक्ष्यों के मुताबिक पौधारोपण तो करना ही है, इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि रोपे गए पौधे जीवित रहें। इसके लिए विभाग कार्ययोजना बनाकर पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित करें। ऐसे पौधे लगाए जाएं, जो इस क्षेत्र में आसानी से पनप सकें और जीवित रह सकें। अभियान में सभी विभाग पौधारोपण में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाएं, सीएसआर गतिविधियों के माध्यम से भी पौधारोपण को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि रामगंजमंडी क्षेत्र में कोटा स्टोन के वेस्ट को कलात्मकता के साथ ट्रीगार्ड एवं पौधों के संरक्षण संबंधी इंतजामों में काम लिया जाए। प्रभारी सचिव ने निर्देश दिए कि जहां-जहां रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बने हुए हैं, उन्हें सक्रिय किया जाए और जो सक्रिय हैं,उनके सकारात्मक परिणामों से आमजन को अवगत कराया जाए ताकि अन्य भी इसके लिए प्रेरित हो सकें। रूफटॉप गार्डनिंग को भी प्रोत्साहित किया जाए। जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि विद्यालयों में जल संरक्षण संरचनाओं को सक्रिय बनाया जाए। प्रभारी सचिव ने पॉलिथीन के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए इसके विकल्प उपलब्ध कराने पर जोर दिया और कहा कि विकल्प देकर इसके उपयोग की रोकथाम अधिक प्रभावी होगी। नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिए कि पॉलिथीन के विकल्प उपलब्ध कराने के लिए व्यापारियों को जागरूक किया जाए। उन्होंने पॉलिथीन के उपयोग को हतोत्साह करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से संचालित इंसेंटिव स्कीम का व्यापक प्रचार प्रसार करने के भी निर्देश दिए। जिला प्रभारी सचिव डॉ सुरपुर ने परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में स्थित पारंपरिक जल स्रोतों जैसे तालाब, जोहड, बावड़ी इत्यादि को समन्वित प्रयासों से स्वच्छ कर संवारा जाए और उनका संरक्षण किया जाए। वर्षा से पूर्व नालों की सफाई एवं वर्षा जल भराव वाले स्थानों पर समुचित सुरक्षात्मक प्रबंध सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा की औद्योगिक जल अपशिष्ट का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जाए। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए कि अभियान के दौरान विशेष रूप से पानी की गुणवत्ता को लेकर भी कार्य किए जाएं। साथ ही आमजन को जागरूक किया जाए कि अनावश्यक रूप से आर ओ पानी का इस्तेमाल कर जल व्यर्थ नहीं करें। किसानों को सूक्ष्म सिंचाई पद्धति के फायदों से अवगत करा कर इसे अपनाने के लिए उन्हें प्रेरित किया जाए। जिला प्रभारी सचिव डॉ रवि कुमार सुरपुर ने बैठक के बाद प्रगतिशील किसान वंदना गौड़ को आंवला प्रसंस्करण के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने के लिए 25 हजार रुपए की राशि का जिला स्तरीय कृषक पुरस्कार आत्मा परियोजना अंतर्गत प्रदान किया। उन्होंने प्रगतिशील महिला के कार्य की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। जिला उद्योग केंद्र की ओर से कोटा डोरिया पर आधारित कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया।

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