25 सितंबर को जयपुर को मिलेगा नया महापौर : सुनील कोठारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ‘साफ-सुथरा और अतिक्रमण मुक्त’ शहर बनाने की

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जयपुर। जयपुर नगर निगम में महापौर के चुनाव को लेकर तस्वीर लगभग साफ मानी जा रही है। 25 सितंबर को होने वाले महापौर चुनाव में भाजपा की ओर से सुनील कोठारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उनके महापौर बनने की पूरी संभावना जताई जा रही है। ऐसे में अब जयपुर की सियासत से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि नई शहरी सरकार राजधानी की बदहाल होती व्यवस्थाओं को किस तरह पटरी पर लाएगी।

जयपुर को देश-दुनिया में ‘पिंक सिटी’ के नाम से जाना जाता है। ऐतिहासिक विरासत, पर्यटन, बाजारों और तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार के कारण जयपुर की पहचान देश के प्रमुख शहरों में है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में शहर के सामने सफाई, अतिक्रमण, यातायात, पार्किंग, सड़क और कचरा प्रबंधन जैसी चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं। ऐसे में नए महापौर के सामने केवल कुर्सी संभालने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की बड़ी जिम्मेदारी भी होगी।

महापौर बनते ही सबसे बड़ा सवाल—शहर को अतिक्रमण से कैसे मिलेगी मुक्ति?
जयपुर के प्रमुख बाजारों और सड़कों पर अतिक्रमण लंबे समय से बड़ी समस्या बना हुआ है। फुटपाथों पर दुकानें, सड़क किनारे अस्थायी कब्जे, पार्किंग की समस्या और बाजारों में बढ़ता दबाव आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता रहा है। नगर निगम की ओर से समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर पहले जैसे दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में नई महापौर से जनता की सबसे बड़ी अपेक्षा यही होगी कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई केवल अभियान तक सीमित न रहे, बल्कि इसके लिए स्थायी व्यवस्था तैयार की जाए। कार्रवाई में राजनीतिक हस्तक्षेप और दोहरे मापदंड के आरोपों से बचते हुए सभी क्षेत्रों में समान नियम लागू किए जाएं, तभी शहर की सड़कों और बाजारों को वास्तविक राहत मिल सकती है।

हर महापौर ने कहा—जयपुर को बनाएंगे बेहतर, लेकिन सवाल काम का
जयपुर नगर निगम में महापौर की कुर्सी संभालने वाले लगभग हर व्यक्ति ने शहर को स्वच्छ, सुंदर और बेहतर बनाने का संकल्प जताया है। पूर्व महापौरों के कार्यकाल में भी स्वच्छता, विकास, सौंदर्यीकरण और बेहतर नगर व्यवस्था को लेकर कई घोषणाएं और योजनाएं सामने आती रही हैं। हालांकि, आम नागरिकों का सवाल यह है कि इन योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर कितना दिखाई दिया?

स्वच्छता सर्वेक्षण से लेकर शहर के सौंदर्यीकरण तक कई प्रयास हुए, लेकिन शहर के अनेक हिस्सों में आज भी कचरा, टूटी सड़कें, खुले नाले, अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। यही वजह है कि जयपुर की जनता अब घोषणाओं से ज्यादा जमीन पर दिखाई देने वाले काम की उम्मीद कर रही है।

सिर्फ सर्वेक्षण नहीं, रोजाना दिखनी चाहिए सफाई
जयपुर में सफाई व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ी जरूरत निरंतर निगरानी की है। शहर को केवल किसी सर्वेक्षण में बेहतर दिखाने के लिए तैयार करने के बजाय नियमित सफाई व्यवस्था को मजबूत करना होगा। वार्ड स्तर पर सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता, कचरा उठाने की समयबद्ध व्यवस्था, मुख्य बाजारों की नियमित सफाई और खुले में कचरा डालने पर प्रभावी कार्रवाई जैसे कदम जरूरी होंगे। जनता यह भी चाहती है कि महापौर और निगम प्रशासन केवल वीआईपी इलाकों तक सीमित न रहें। शहर की कॉलोनियों, कच्ची बस्तियों, बाहरी इलाकों और पुराने शहर के मोहल्लों में भी सफाई व्यवस्था की नियमित समीक्षा हो।

पार्षदों की भूमिका भी होगी अहम
शहर की सरकार केवल महापौर से नहीं चलती। महापौर के साथ पार्षद, अधिकारी और पूरा नगर निगम तंत्र मिलकर काम करता है। ऐसे में आने वाले समय में यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए बोर्ड के पार्षद अपने-अपने वार्ड की समस्याओं को कितनी गंभीरता से उठाते हैं।

जयपुर की जनता की अपेक्षा होगी कि पार्षद विकास कार्यों की गुणवत्ता, सफाई, सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर लगातार निगरानी रखें। नगर निगम के टेंडर और विकास कार्यों में पारदर्शिता भी एक अहम मुद्दा रहेगा। किसी भी प्रकार के पक्षपात या ठेकेदारी व्यवस्था में अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए।

महापौर के सामने निगम अधिकारियों से तालमेल की भी चुनौती
महापौर के सामने एक और महत्वपूर्ण चुनौती नगर निगम के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की होगी। अक्सर विकास कार्यों में देरी को लेकर यह सवाल उठता है कि फाइलें अधिकारियों के स्तर पर अटक जाती हैं या फिर प्रक्रियागत कारणों से काम आगे नहीं बढ़ पाता। यदि सुनील कोठारी महापौर बनते हैं तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि जनता से जुड़े छोटे से छोटे काम के लिए अनावश्यक रूप से लंबी प्रक्रिया न चले। अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठक, वार्डवार समस्याओं की सूची और काम की समयसीमा तय करने से व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है।

जयपुर नगर निगम को एक करने की मुहिम से जुड़ा रहा है कोठारी का नाम
सुनील कोठारी के सामने जयपुर को बेहतर बनाने की चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जयपुर नगर निगम के दो हिस्सों में बंटने के बाद उसे फिर से एक करने की मुहिम में उनका नाम प्रमुखता से सामने आया था। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान जयपुर नगर निगम को हेरिटेज और ग्रेटर, दो निगमों में बांटा गया था। बाद में निगमों को एक करने की मांग लगातार उठती रही और कोठारी ने भी इस दिशा में अभियान चलाया। अब यदि वही सुनील कोठारी जयपुर के महापौर की जिम्मेदारी संभालते हैं तो उनके सामने अपने अभियान को प्रशासनिक और विकास के स्तर पर आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। एकीकृत जयपुर की अवधारणा को केवल प्रशासनिक बदलाव तक सीमित रखने के बजाय शहर की सफाई, ट्रैफिक, पार्किंग, कचरा प्रबंधन, सड़कों और बाजारों की व्यवस्था को एकीकृत तरीके से सुधारना बड़ी चुनौती होगी।

जनता अब फोटो और घोषणाएं नहीं, नतीजे देखना चाहती है
जयपुर में महापौर की कुर्सी संभालने वाले नेताओं के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश यही है कि अब जनता केवल शिलान्यास, उद्घाटन और सोशल मीडिया की तस्वीरों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। नागरिक यह देखना चाहते हैं कि जिस सड़क की शिकायत की गई, वह बनी या नहीं; जिस बाजार में अतिक्रमण था, वहां व्यवस्था सुधरी या नहीं; जिस इलाके में कचरा रोज जमा होता था, वहां सफाई हुई या नहीं। महापौर के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यही होगी कि नगर निगम के कामकाज को घोषणाओं से निकालकर परिणाम आधारित व्यवस्था में बदला जाए।

‘पिंक सिटी’ को चाहिए नई पहचान
जयपुर की पहचान केवल गुलाबी रंग की इमारतों और ऐतिहासिक स्मारकों से नहीं, बल्कि यहां रहने वाले लोगों की जीवन गुणवत्ता से भी तय होगी। स्वच्छ सड़कें, व्यवस्थित बाजार, बेहतर पार्किंग, नियमित कचरा उठाव, साफ नाले, अच्छी स्ट्रीट लाइट और अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ किसी भी आधुनिक शहर की बुनियादी जरूरत हैं। 25 सितंबर को जब जयपुर को नया महापौर मिलने जा रहा है, तब शहर की जनता की निगाहें नगर निगम की नई व्यवस्था पर टिकी होंगी। सुनील कोठारी के महापौर बनने की संभावना के बीच उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि वे जयपुर को लेकर किए गए अपने पुराने संकल्पों को अब नगर निगम की सत्ता और प्रशासनिक जिम्मेदारी के जरिए किस हद तक जमीन पर उतार पाते हैं। जयपुर की जनता ने हमेशा अपने शहर से उम्मीदें रखी हैं। अब उम्मीद यह है कि नया महापौर केवल पांच साल का कार्यकाल पूरा करने की कोशिश न करे, बल्कि ऐसा काम करे जिसे जयपुर की जनता लंबे समय तक याद रखे। जयपुर को स्वच्छ, सुंदर, व्यवस्थित और अतिक्रमण मुक्त बनाने की दिशा में अगर ठोस और निरंतर काम होता है, तो यही नई शहरी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।

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