जयपुर: गोस्वामी तुलसीदास जी की 529वीं जयंती व्याख्यान माला आत्मा को निर्मल करती है रामचरितमानस: प्रो. बनबारीलाल गौड़

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जयपुर। गोस्वामी तुलसीदास जी की 529वीं जयंती के अवसर पर मन्दिर श्री रघुनाथ जी एवं विश्वगुरुदीप आश्रम शोध संस्थान बैनर तले व्याख्यान माला ढेहर के बालाजी स्थित मंदिर रघुनाथ जी सीताराम जी की बगीची में आयोजित की गई। इस दौरान श्रद्धा व भक्ति से परिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता मानस मर्मज्ञ पं. महेशदत्त शर्मा ’गुरुजी’ ने गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन-दर्शन, काव्य-साधना और उनके रचित रामचरितमानस व विनय पत्रिका की महत्ता को अत्यंत संगीतमय व भावविभोर कर देने वाले शैली में प्रस्तुत किया। इस दौरान मुख्य अतिथि, राष्ट्रपति सम्मानित वैद्य प्रो. बनबारीलाल गौड़ ने कहा कि जैसे औषधि शरीर को स्वस्थ करती है, वैसे ही मानस आत्मा को निर्मल करती है। उन्होंने इसके नियमित पठन व गायन की प्रेरणा दी,इधर महामंडलेश्वर रघुवीर दास ’योगीराज’ जी महाराज ने रामचरितमानस की चैपाइयों को साबर मंत्र के तुल्य बताते हुए कहा कि रामायण का पाठ मन, तन व जीवन की शुद्धि के लिए एक दिव्य औषधि है। व्याख्यान माला में महा महामंडलेश्वर रामरतन दास महाराज, महामंडलेश्वर रामसेवक दास महाराज, महंत हरिशंकर दास ‘वेदान्ती’ व महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी महाराज सहित अन्य लोगों ने शिरकत की। अंत में महन्त हरिशंकर दास ’वेदान्ती’ जी ने सभी अतिथियों, संतवृंदों, श्रोताओं तथा आयोजन समिति के प्रति आभार जताया। इस अवसर पर गणमान्य नागरिक, विद्वानजन, संस्कृत प्रेमी तथा श्रद्धालुजनों की विशाल उपस्थिति ने आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया

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