ईरान के पास आख‍िरी मौका, सही जवाब का इंतजार, नहीं चाहते आधी-अधूरी डील : ट्रंप

ram

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ईरान के साथ शांति वार्ता के अंत‍िम चरण में है और वह ‘सही जवाब’ के लिए कुछ दिन और इंतजार करने को तैयार हैं। देखते हैं क्या होता है। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “या तो हमारे बीच समझौता हो जाएगा, या फिर हमें कुछ ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे जो थोड़े कड़े होंगे। लेकिन उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा।” समाचार एजेंसी स‍िन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ने दावा किया कि वह किसी शांति समझौते को पक्‍का करने की ‘जल्दबाजी’ में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ एक सीमित समझौता नहीं चाहते, जो सिर्फ होर्मुज स्‍ट्रेट को दोबारा खोलने पर ही केंद्रित हो।
ट्रंप ने कहा क‍ि हम इस बार इसे एक ही मौका देंगे। मैं किसी तरह की आधी-अधूरी डील नहीं चाहता। उन्होंने कहा क‍ि मैं जल्दी में नहीं हूं। आप कभी यह नहीं सोचते कि ‘ओह, चुनाव आने वाले हैं, इसलिए जल्दी करनी है।’ मैं बिल्कुल जल्दी में नहीं हूं।” राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उनकी बुधवार को तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से फोन पर बहुत अच्छी बातचीत हुई। तुर्की को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में एक अहम मध्यस्थ माना जा रहा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका और इजराइल की तरफ से फिर से हमला हुआ, तो युद्ध पश्चिम एशिया से बाहर भी फैल सकता है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर कहा कि अगर ईरान के साथ फिर से युद्ध हुआ, तो उसके नतीजे अमेरिका के लिए बहुत बड़े और अप्रत्याशित होंगे। उन्होंने अमेरिका की कांग्रेस की एक हालिया रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि दर्जनों विमान खो गए हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर संयुक्त हमले किए थे, जिसमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और आम नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन से इजराइल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। आठ अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम (सीजफायर) हुआ। इसके बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति वार्ता का एक दौर हुआ, लेकिन उसमें कोई समझौता नहीं हो पाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *