भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कतर के पीएम से की बात, संघर्ष खत्म कर शांति से चर्चा पर दिया जोर

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नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत के दौरान मिडिल ईस्ट में मौजूदा हालात को लेकर बातचीत की। कतर के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। कतर के विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री को भारत के विदेश मंत्री का फोन आया था। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने बातचीत के दौरान देश में सैन्य कार्रवाई की बढ़ोतरी और क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर इसके गंभीर असर के साथ-साथ सभी झगड़ों को शांति से सुलझाने के तरीकों की समीक्षा की। उन्होंने नेविगेशन की आजादी सुनिश्चित करने की अहमियत पर भी जोर दिया। कतर के विदेश मंत्रालय ने बताया, “प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने कतर और इलाके के दूसरे देशों पर ईरान के गलत हमलों को रोकने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर पानी, खाने और एनर्जी सुविधाओं को गैर-जिम्मेदाराना तरीके से निशाना बनाने के खिलाफ चेतावनी दी। प्रधानमंत्री ने तालमेल को मजबूत करने, मिलकर कोशिशें तेज करने, बातचीत की टेबल पर लौटने और संकट को रोकने के लिए समझदारी और तर्क को प्राथमिकता देने की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, आने-जाने की आजादी, पर्यावरण की सुरक्षा और इलाके की स्थिरता बनी रहे।”
इससे पहले डॉ एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ भी फोन पर बात की। दोनों नेताओं ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर चर्चा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, “ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का फोन आया। मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।” हालांकि, उन्होंने बातचीत के खास बिंदुओं के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया।
यह बातचीत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हुई है। होर्मुज स्ट्रेट तेल परिवहन का एक अहम वैश्विक मार्ग है। इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ गई हैं और कई पक्षों की ओर से तीखी बयानबाजी हो रही है, जिससे एक बड़े संघर्ष की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
भारत इन घटनाक्रमों पर करीब से नजर रखे हुए है, क्योंकि इस क्षेत्र में उसके महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हैं। भारत के कच्चे तेल के आयात का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, इसलिए वहां स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

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