नई दिल्ली। भारत का बैंकिंग सेक्टर फिलहाल मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, बैंकों की हालत बेहतर हो रही है और आगे भी इसमें सुधार जारी रहने की उम्मीद है। इस मजबूती की वजह अच्छी एसेट क्वालिटी (कम खराब लोन), मजबूत पूंजी, और रिटेल व छोटे कारोबार (एसएमई) में बढ़ती कर्ज की मांग है। यह सर्वे फिक्की और इंडियन बैंक एसोसिएशन ने मिलकर किया है। इसमें बताया गया कि आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर की ग्रोथ को लेकर माहौल सकारात्मक है। इसकी वजह मजबूत बैलेंस शीट और अर्थव्यवस्था में स्थिर गतिविधियां हैं।
सर्वे में यह भी कहा गया है कि मौजूदा मौद्रिक नीति (ब्याज दर से जुड़ी नीति) फिलहाल संतुलित है और इसमें बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है। हालांकि कुछ सहकारी बैंकों ने ब्याज दर में हल्की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है। बैंकों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में कर्ज की मांग बढ़ती रहेगी, खासकर रिटेल और छोटे-मध्यम उद्योगों (MSME) से। सरकारी बैंक (PSB) भविष्य को लेकर ज्यादा भरोसेमंद नजर आ रहे हैं, क्योंकि उनकी एसेट क्वालिटी सुधरी है और कॉरपोरेट लोन में रुचि बढ़ रही है।
किस बैंक की क्या स्थिति है?
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि निजी बैंक थोड़ा सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि विदेशी बैंक कॉरपोरेट सेक्टर में निवेश को लेकर संतुलित रुख अपना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सेवा क्षेत्र जैसे रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाएं, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन में बढ़ती गतिविधियों के कारण लोन की मांग मजबूत बनी रहेगी। करीब 46% लोगों का मानना है कि नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 11% से 13% के बीच रह सकती है।
बैंकों से सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
रिटेल लोन भी बैंकिंग सेक्टर के लिए एक मजबूत सहारा बना रहेगा। वहीं छोटे और मझोले उद्योगों (SME) के लिए लोन की मांग भी तेज रहने की उम्मीद है, क्योंकि इस सेक्टर में व्यापार बढ़ रहा है और सरकार भी इसे समर्थन दे रही है। हालांकि, बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती साइबर सुरक्षा को लेकर है। ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे बैंकों को सावधान रहने की जरूरत है। यह सर्वे जनवरी से फरवरी 2026 के बीच किया गया, जिसमें कुल 24 बैंकों ने हिस्सा लिया, जिनमें सरकारी, निजी, विदेशी, छोटे वित्त और सहकारी बैंक शामिल थे।



