गंगा दशमी पर ‘वंदे गंगा अभियान’ का राजसमंद में जिला प्रभारी सचिव ने किया शुभारंभ—“जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना समय की आवश्यकता” : सुश्री आरती डोगरा

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जयपुर। गंगा दशमी के पावन पर्व पर राजसमंद जिला प्रभारी सचिव सुश्री आरती डोगरा ने सोमवार को ‘वंदे गंगा – जल संरक्षण, जन अभियान’ का जिला स्तरीय शुभारंभ राजसमंद झील स्थित शहर के प्रमुख दर्शनीय स्थल इरिगेशन पाल पर किया। कार्यक्रम की शुरुआत महिलाओं की भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक कलश यात्रा निकाली और इरिगेशन पाल पहुंचकर राजसमंद झील के जल का पूजन-अर्चन किया। यह अभियान 25 मई से 5 जून तक चलेगा। विभिन्न विभाग ?द्वारा जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं जनजागरण से जुड़ी विविध गतिविधियां आयोजित करेंगे।
हमारे पूर्वजों ने समझा जल का महत्व, हर व्यक्ति का दायित्व कि भागीदार बने : सुश्री डोगरा
सुश्री आरती डोगरा ने कहा कि राजसमंद की ऐतिहासिक एवं खूबसूरत झील के किनारे इस शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन होना गौरव की बात है। उन्होंने स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले क्षेत्र में आने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि राजसमंद की जल संरक्षण परंपराएं, सामुदायिक भागीदारी एवं सदियों पुरानी जल संस्कृति पूरे राज्य को प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान जैसे प्रदेश में जल का महत्व सभी जानते हैं। पूर्वजों ने बावड़ियां, कुएं और तालाब बनाकर संदेश दिया कि जल की हर बूंद का संरक्षण आवश्यक है। अब आवश्यकता है कि उस ऐतिहासिक सोच को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाया जाए। जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं होना चाहिए बल्कि यह हर नागरिक का अभियान बने। सामूहिक प्रयासों से ही जल संकट का समाधान संभव है।सुश्री डोगरा ने कहा कि जिले में राजीविका की लाखपति दीदियां उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं। यह केवल आर्थिक बदलाव नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी उदाहरण है। उन्होंने राजीविका समूहों की महिलाओं से गांव-गांव में जल संरक्षण की अलख जगाने का आह्वान किया। प्रभारी सचिव ने आमजन से वंदे गंगा अभियान के तहत आयोजित हो रही गतिविधियां में सहभागी होने की अपील की और सभी को जल संरक्षण की शपथ दिलाई। इसके पश्चात इरिगेशन पाल पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
पानी-हवा अनमोल, ये किसी फैक्ट्री में नहीं बनाए जा सकते :कलक्टर
जिला कलक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा ने कहा कि जीवन के लिए पानी और हवा दोनों आवश्यक हैं और इन्हें किसी फैक्ट्री में नहीं बनाया जा सकता। यह प्रकृति का अनमोल उपहार है, इसलिए इनके संरक्षण के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “पानी बचेगा तभी भविष्य बचेगा।” प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘जल संचय-जनभागीदारी’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने ‘वंदे गंगा अभियान’ शुरू किया है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक जल स्रोतों की सफाई, तालाबों में गाद जमने से रोकना, वर्षा जल का संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाना तथा “कैच द रेन” अभियान को प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से खेतों में पारंपरिक सिंचाई की बजाय ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई पद्धतियों के उपयोग तथा अधिकाधिक फार्म पॉण्ड बनाने की अपील की । साथ ही, जिले में हरियाली बढ़ाने के लिए व्यापक पौधारोपण का आह्वान किया।
राजीविका की बहनों का मैं भाई, उनकी प्रगति से प्रसन्नता :कलक्टर
कलक्टर ने राजीविका समूहों की महिलाओं का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि जिले की 70 हजार से अधिक राजीविका महिलाएं उनकी बहनों के समान हैं। जब उनकी बहनें आत्मनिर्भर बनती हैं, रोजगार अर्जित करती हैं और अपने परिवारों को सशक्त बनाती हैं तो उन्हें अत्यंत खुशी होती है। उन्होंने कहा कि महिलाएं यदि जल संरक्षण और स्वच्छता के संदेश को घर-घर तक पहुंचाएं तो समाज में बड़ा परिवर्तन संभव है। श्री जगदीश पालीवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार जल संरक्षण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राजसमंद झील की पूजा-अर्चना से कार्यक्रम की शुरुआत होना अत्यंत शुभ संकेत है। यह केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि प्रकृति एवं जल के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि जल संरक्षण का यह संकल्प हर घर और हर गांव तक पहुंचे। प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाए। उन्होंने विभिन्न योजनाओं में अग्रणी रहने पर राजसमंद प्रशासन को बधाई भी दी। जिला परिषद सीईओ श्री बृजमोहन बैरवा ने बताया कि जिले में स्वच्छता, जल संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा को लेकर “4 पी” नवाचार लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने आमजन से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने की अपील की। सीईओ ने कहा कि अभियान के दौरान जिले में लगभग 30 हजार सोक पिट बनाए जा रहे हैं। यदि जिले का प्रत्येक व्यक्ति एक-एक पौधा भी लगाए तो राजसमंद में 15 लाख से अधिक नए पौधे लगाए जा सकते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।

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