कटता पेड़, बढ़ता प्रदूषण और टूटती सांसे

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दुनिया में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिक विकास और आधुनिक जीवन शैली की वजह से प्राकृतिक वनों पर मानव समाज का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसे ध्यान में रखकर मानव जीवन की आवश्यकताओं के हिसाब से वनों के संतुलित दोहन तथा नये जंगल लगाने के लिए भी विशेष रूप से काम करने की जरूरत है। मनुष्य के जीवन में वन महत्वपूर्ण रहे हैं। परन्तु जैसे-जैसे सभ्यता का विकास हुआ वैसे-वैसे मनुष्य ने अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वृक्षों को काटना आरम्भ कर दिया। वनों की लगातार कटाई होती गई और वातावरण पर भी इसका प्रभाव पड़ा। आज हमारी स्थिति यह हो गई है की वृक्षों की छाव मिलनी भी दुर्लभ हो गई है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक वन क्षेत्र पर अतिक्रमण किया गया है। यह क्षेत्र दिल्ली, सिक्किम और गोवा के कुछ भौगोलिक क्षेत्र से भी बड़ा है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश और असम अतिक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। रिपोर्ट में मंत्रालय ने कहा कि मार्च 2024 तक 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 13,05,668.1 हेक्टेयर (या 13056 वर्ग किमी) वन क्षेत्र अतिक्रमण के अधीन था। अभी तक 10 राज्यों ने वन अतिक्रमण पर आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए हैं। पिछले वर्ष राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने एक खबर पर स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया था कि भारत में 7,50,648 हेक्टेयर (या 7506.48 वर्ग किमी) वन क्षेत्र अतिक्रमण के अधीन है। जो देश की राजधानी दिल्ली के आकार से पांच गुना अधिक है। जिन राज्यों ने अपना डेटा नहीं दिया उनमें बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान, तेलंगाना, प. बंगाल, नागालैंड, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, असम में वन भूमि पर सबसे अधिक अतिक्रमण किया गया है, जहां 2.13 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर अवैध कब्जा है। संसद में सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, वन भूमि पर अतिक्रमण के मामले में महाराष्ट्र दूसरे नंबर (57,554.87) हेक्टेयर पर है। अरुणाचल प्रदेश 53,499.96 हेक्टेयर के साथ तीसरे स्थान पर है। अन्य राज्यों में भी वन भूमि पर अतिक्रमण दर्ज किया गया है, उनमें ओडिशा (40,507.56 हेक्टेयर), आंध्र प्रदेश (13,318.16 हेक्टेयर), तमिलनाडु (15,768.48 हेक्टेयर), त्रिपुरा (4,242.37 हेक्टेयर) और सिक्किम (469.16 हेक्टेयर) शामिल हैं।
वनों से हमें एक नहीं अपितु अनेकों लाभ है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में मनुष्य के स्वास्थ्य के लिये वन को बहुत ही उपयोगी, लाभकारी और जीवनदायी बताया गया हैं। वन और जीवन दोनों एक-दूसरे पर आश्रित हैं। वनों से हमें शुद्ध ऑक्सीजन और भोजन मिलता है। मनुष्य और अन्य किसी भी प्राणी का जीवन ऑक्सीजन और भोजन के बिना नहीं चल सकता। वृक्ष और वन भू-जल को भी संरक्षित करते हैं। जैव-विविधता की रक्षा भी वनों की रक्षा से ही संभव है। विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए बहुमूल्य वनौषधियां हमें जंगलों से ही मिलती हैं।
वन और वनस्पतियां आक्सीजन देकर हमें जीवन प्रदान करती हैं। बिना आक्सीजन के हम जीवित रह ही नहीं सकते और पेड़-पौधे यही जीवनदायिनी आक्सीजन छोड़ते हैं। एक स्वस्थ पेड़ हर दिन लगभग 230 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है, जिससे सात लोगों को प्राण वायु मिल पाती है। वे हमारे द्वारा छोड़ी गई विषैली गैस कार्बन-डाइ-आक्साइड को ग्रहण करते हैं। कुछ वन्य पौधे ऐसे भी होते हैं जो रात में भी आक्सीजन छोड़ते हैं। पीपल, नीम, तुलसी, एलोवेरा, एक्समस कैक्टस, सर्पेन्टाइल (स्नेक प्लांट), आर्चिड्स, आरेंजग्रेवेरा आदि ऐसे पेड़-पौधें हैं जो रात में भी आक्सीजन छोड़ते हैं। पेड़-पौधे न रहें तो जिन्दा रहने के लिए साँस और जीवन की धड़कन ही बन्द हो जायेगी। अब भी समय है हम समझे और समझाए की पेड़ पौधे हमारे जीवन के लिए कितने अहम् और प्राणदायक है।
स्वस्थ पर्यावरण एवं पारिस्थितिक संतुलन के लिए समस्त भू-भाग का एक तिहाई वनों से ढका रहना चाहिए। एक क्षेत्र जहाँ पेड़ों का घनत्व अत्यधिक रहता है उसे वन कहते है। जंगल हमारे जीवन की बुनियाद हैं जो हमारे पर्यावरण के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक स्थिति को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वन पर्यावरण, लोगों और जंतुओं को कई प्रकार के लाभ पहुंचाते हैं। वन कई प्रकार के उत्पाद प्रदान करते हैं जैसे फर्नीचर, घरों, रेलवे स्लीपर, प्लाईवुड, ईंधन या फिर चारकोल एव कागज के लिए लकड़ी, सेलोफेन, प्लास्टिक, रेयान और नायलॉन आदि के लिए प्रस्संकृत उत्पाद, रबर के पेड़ से रबर आदि। फल, सुपारी और मसाले भी वनों से एकत्र किए जाते हैं। कर्पूर, सिनचोना जैसे कई औषधीय पौधे भी वनों में ही पाये जाते हैं। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को जकड़े रखती है और इस प्रकार वह भारी बारिश के दिनों में मृदा का अपरदन और बाढ भी रोकती हैं। पेड़, कार्बन डाइ आक्साइड अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं जिसकी मानवजाति को सांस लेने के लिए जरूरत पड़ती है। वनस्पति स्थानीय और वैश्विक जलवायु को प्रभावित करती है। पेड़ पृथ्वी के लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं और जंगली जंतुओं को आश्रय प्रदान करते हैं। वे सभी जीवों को सूर्य की गर्मी से बचाते हैं और पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करते हैं।

– बाल मुकुन्द ओझा

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