बंटवारे की राख से उठते नए भारत के सपने...
14 अगस्त 1947, एक तारीख जो स्वतंत्रता के उल्लास के साथ-साथ अकथनीय त्रासदी की गवाह बनी। यह दिन न केवल देश का, बल्कि दिलों, रिश्तों और इंसानियत का बंटवारा था। लाखों जिंदगियां एक पल में उजड़ गईं; हंसी-खुशी से भरे घर खामोश मलबे में तब...


