Category Archives: लेख

एक चिड़िया, अनेक चिड़िया, घर में क्यों नहीं आती चिड़िया...

भला किसने गौरैया को अपने आंगन, घर, खिड़की पर चहचहाते नहीं देखा होगा? अभी इसका जवाब हाँ है, लेकिन जिस तरह के हालात बन रहे हैं उसमें आने वाली पीढ़ी के लिए इसका जवाब न भी हो सकता है। साथ ही हममें से लगभग पुराने दौर के सभी लोगों ने 19...

नकली उत्पादों का बाजार : हर तीसरा व्यक्ति हुआ शिकार...

नकली सामान की समस्या से इस समय पूरी दुनिया जूझ रही है। एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक बाजार में नकली सामान की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत तक है। भारत में हालात ज्यादा चिंताजनक है। देश में नकली उत्पादों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, यहां 30...

राजस्थान दिवस का उत्सवी आगाज...

राज्य की भजनलाल सरकार ने हिन्दू नववर्ष (वर्ष प्रतिपदा) पर राजस्थान स्थापना दिवस मनाने का उत्सवी आगाज किया है। राज्य सरकार जनभागीदारी के साथ राजस्थान दिवस मनाने जा रही है। 30 मार्च को मनाया जाने वाला राजस्थान दिवस इस बार 19 मार्च क...

प्रकृति की नन्ही दूत है चिड़िया...

रमेश सर्राफ धमोरा विश्व गौरैया दिवस नन्ही घरेलू गौरैया और अन्य पक्षियों को समर्पित है। गौरैया की संख्या में हो रही तीव्र गिरावट के बारे में जागरूकता पैदा करने और लोगों को इन परिचित पक्षियों की रक्षा करने के लिए प्रोत्साहित करने हे...

फास्टैग एनुअल पास हुआ अब महंगा...

– महेन्द्र तिवारी भारत में सड़क परिवहन व्यवस्था पिछले एक दशक में जिस तेजी से बदली है, वह देश के बुनियादी ढांचे के विकास की कहानी को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। पहले राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करना कई बार थकाऊ अनुभव बन जाता...

विलुप्त होते जा रहे है जीव जंतु और वनस्पतियां...

बाल मुकुन्द ओझा जलवायु परिवर्तन से दुर्लभ प्रजाति वाले जीव-जंतु और वनस्पतियां लुप्त होती जा रही हैं। जमीन, वायु और समुद्री जीव जंतुओं और वहां की वनस्पतियां इस संकट से जूझ रही हैं। जलवायु परिवर्तन ने प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक द...

घातक और जानलेवा बीमारियों का रक्षा कवच है टीकाकरण...

देश में 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम सभी के लिए टीकाकरण मानवीय रूप से संभव है रखी गई है। इस थीम का मुख्य संदेश है कि यदि सामूहिक प्रयास और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था...

सोनम वांगचुक और लद्दाख के स्वायत्तता का भविष्य...

– महेन्द्र तिवारी केंद्र सरकार ने हाल ही में लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पर लगे राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। जोधपुर जेल में 170 दिनों की हिरासत के बाद ...

ट्रंप के दावे और टूटता तिलस्म...

डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और उनके आक्रामक व्यापारिक दृष्टिकोण ने वैश्विक भू-राजनीति में भारत और अमेरिका के संबंधों को एक जटिल धरातल पर लाकर खड़ा कर दिया है। हाल के घटनाक्रम और ट्रंप के बयानों से यह आभास हो...

डिजिटल ठगी का बढ़ता जाल : हर 24 घंटे में हो रही 38 करोड़ रुपये की...

इस वर्ष हम उपभोक्ता दिवस ऐसे माहौल में मना रहे है जब उपभोक्ता साइबर ठगी के आगे बेबस नज़र आ रहे है। उपभोक्ता ठगी के नए नए तरीके इस्तेमाल में लिए जा रहे है। हालांकि डिजिटल दुनिया ने बेशक हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है, लेकिन इसके स...

दुनिया उठा रही है तीन देशों के युद्ध का खामियाजा...

बाल मुकुंद ओझा तीन देशों के युद्ध में इस समय समूची दुनिया प्रभावित हो रही है। अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है और तेल गैस का संकट खड़ा हो गया है। भारत अपनी गुट निरपेक्षता के लिए जाना जाता है और इस समय भारत भी कई प्रकार के संकट झेलने को ...

इच्छा मृत्यु केवल कानून ही नहीं, मानवीय गरिमा का प्रश्न...

-ः ललित गर्ग भारतीय समाज में यह गहरी धारणा रही है कि परिवार के किसी सदस्य की सेवा तब तक की जाए, जब तक उसके प्राण स्वाभाविक रूप से समाप्त न हो जाएं। जीवन की रक्षा और उसकी देखभाल को एक नैतिक कर्तव्य के रूप में देखा जाता रहा है। यही ...

जलियांवाला बाग से कैक्सटन हॉल तक : शहीद-ए-आजम ऊधम सिंह की अमर गाथ...

-सुनील कुमार महला शहीद-ए-आजम सरदार उधम सिंह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन दीपस्तंभों में से एक हैं, जिनका नाम साहस और अटूट संकल्प का प्रतीक है। दूसरे शब्दों में कहें तो उधम सिंह (राम मोहम्मद सिंह आज़ाद) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम...

स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है परिवहन प्रदूषण...

दुनिया भर के बहुत से देशों में सड़कों पर वाहनों की निरंतर बढ़ती संख्या परिवहन प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है। हमारा देश भारत भी इस समय परिवहन प्रदूषण की विभीषिका से जूझ रहा है। सड़कों का आधारभूत ढांचा हमारी अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ आधार...

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का स्वर्णिम अध्याय : दांडी मार्च...

-सुनील कुमार महला भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दृष्टि से 12 मार्च 1930 का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है। जैसा कि इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने गुजरात के साबरमती आश्रम से दांडी नामक स्थान तक लगभग 390 किलोमीटर (241 मील...

सामाजिक ताने बाने को नष्ट भ्रष्ट कर रही वेब सीरीज...

बालमुकुंद ओझा आजकल वेब सीरीज की चर्चा ज्यादा हो रही है। क्या आप जानते है वेब सीरीज क्या होती है और इसका मतलब क्या होता है। वेब सीरीज दरअसल इंटरनेट पर जारी धारावाहिक या वीडियो एपिसोड की एक श्रृंखला होती है और इसे वेब शो के नाम से भ...

कच्चे तेल से बढ़ा दुनिया में आर्थिक हाहाकार...

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक दिन में पूरी दुनिया लगभग 16 अरब लीटर गैस या तेल फूंक देती है। इनमें से एक चौथाई यानी करीब 4 अरब लीटर तेल और गैस दुनिया भर के देशों में जिस एक रास्ते से हो पहुंचता है वो यही रास्ता है, द स्ट्रैट ऑफ ह...

वर-वधु के माता-पिता की सहमति के बाद ही मान्य हो विवाह...

दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहाँ संविधान द्वारा हर वर्ग, हर धर्म, हर जाति और हर समाज के व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। भारतीय संविधान में नागरिकों को अनेक मौलिक अधिकार दिए हैं। इन्हीं में से अनुच्छेद ...

आभासी दुनिया से बचपन को सुरक्षित रखने की पहल...

-ललित गर्ग डिजिटल युग में मानव जीवन की गति और स्वरूप तेजी से बदल रहा है। संचार, शिक्षा, मनोरंजन और सामाजिक संबंधों का बड़ा हिस्सा अब आभासी माध्यमों के सहारे संचालित होने लगा है। इस परिवर्तन ने जहां अनेक सुविधाएं प्रदान की हैं, वहीं...

ज्ञान की जननी सावित्रीबाई फुले : जिन्होंने समाज की बेड़ियाँ काटकर ...

-सुनील कुमार महला सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका (महिला शिक्षा की अग्रदूत) ही नहीं, बल्कि एक प्रखर विचारक, महिला सशक्तीकरण की प्रेरणा, सामाजिक न्याय के संघर्ष की प्रतीक और महान समाज सुधारक थीं। प्रत्येक वर्ष 10 मार्...

नीतीश कुमार होना आसान नहीं है...

– महेन्द्र तिवारी भारतीय राजनीति के फलक पर नीतीश कुमार एक ऐसी पहेली हैं, जिसे सुलझाने का दावा हर कोई करता है, लेकिन पूरी तरह कोई समझ नहीं पाता। एक ऐसा नेता, जिसके पास लालू प्रसाद यादव जैसा नैसर्गिक करिश्मा नहीं है, न ही उनके...

तेल संकट की आहट : महंगाई की मार से लोग भयभीत...

– बाल मुकुन्द ओझा अमेरिका इजरायल और ईरान युद्ध ने महंगाई की मार से देशवासियों को डरा दिया है। आम लोगों को महंगाई का जबरिया झटका लगा है। घरेलू एलपीजी गैस सिलिंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। 19 किलो वाले कॉमर्...

भविष्य की युद्ध प्रणाली और भारत की रणनीति...

– महेन्द्र तिवारी भारत की सुरक्षा व्यवस्था आज एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ केवल सैनिकों की संख्या या पारंपरिक हथियार पर्याप्त नहीं रह गए हैं। आधुनिक युद्ध अब अत्याधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धि, दूर से संचालित प्रणालियों और त...

भारत में महिलाओं के प्रति बदलने लगा है नज़रिया...

रमेश सर्राफ धमोरा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाने और लैंगिक समानता की वकालत करने के लिए मनाया जाता है। यह जागरूकता बढ़ाने, बाधाओं को तोड़ने और सभी के लिए समान अव...

बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन से जुड़े सवाल...

– ललित गर्ग – बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ उस समय सामने आया जब राज्य के लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतिश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने का निर्णय स्वीकार किया और इसके लिए नामांकन भी ...

अन्न से आत्मनिर्भरता तक : विश्व अनाज दिवस का संदेश...

-सुनील कुमार महला अनाजों के महत्व, पोषण और खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 7 मार्च को विश्व अनाज दिवस (वर्ल्ड सीरियल डे) मनाया जाता है। यहां पाठकों को बताता चलूं कि ‘सीरियल’ शब्द की उत्पत्ति प्राचीन...

इजराइल-अमेरिका-ईरान संघर्ष और भारत के सामने नई चुनौतियाँ...

– महेन्द्र तिवारी इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव आज की विश्व राजनीति की सबसे जटिल और चिंताजनक घटनाओं में से एक बन गया है। दशकों से चले आ रहे वैचारिक मतभेद, क्षेत्रीय प्रभुत्व की प्रतिस्पर्धा और परमाणु कार्यक्रम को...

कटता पेड़, बढ़ता प्रदूषण और टूटती सांसे...

दुनिया में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिक विकास और आधुनिक जीवन शैली की वजह से प्राकृतिक वनों पर मानव समाज का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसे ध्यान में रखकर मानव जीवन की आवश्यकताओं के हिसाब से वनों के संतुलित दोहन तथा नये जंगल लगाने के लिए भी ...

बदलते दौर में होली : परंपरा से आधुनिकता तक का सफर...

-सुनील कुमार महला हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है और उसके अगले दिन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को रंगों की होली खेली जाती है। किंतु इस वर्ष पूर्णिमा तिथि पर वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण पड़न...

युद्ध नहीं, शांति ही बदलती दुनिया की अनिवार्य अपेक्षा...

-ः ललित गर्ग नई बनती दुनिया का चेहरा जितनी तेजी से बदल रहा है, उतनी ही तेजी से वैश्विक असुरक्षा की भावना भी गहराती जा रही है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता टकराव केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है, बल्कि वह एक ऐसे वैश्विक असंतुलन...

होली दहन : बुराई पर अच्छाई की विजय और सामाजिक चेतना का पर्व...

होली केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि वह आत्मचिंतन, सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का पर्व भी है। धुलेंडी से एक दिन पूर्व होने वाला होली दहन इसी गहरे सांस्कृतिक और दार्शनिक भाव का प्रतिनिधित्व करता है। यह परंपरा ...

नया बीज बिल 2026 : किसानों के हक और बीज की क्वालिटी के लिए नई दिश...

-सुनील कुमार महला भारत दुनिया के खेती-बाड़ी वाले देशों में से एक है। यह कहना गलत नहीं होगा कि देश की एक बड़ी आबादी अभी भी सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है। अनुकूल मौसम, उपजाऊ मिट्टी और अलग-अलग भौगोलिक हालात कई तरह की फस...

विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी : विकास का सशक्त सूत्र...

28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। वास्तव में, यह दिवस वैज्ञानिक सोच, नवाचार (इनोवेशन) और सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) में विज्ञान की भूमिका को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। कहना ग़लत नहीं होगा कि यह दि...

दुर्लभ रोगों के इलाज में चुनौतियां...

दुर्लभ रोग दिवस हर साल फरवरी के आखिरी दिन को मनाया जाता है। दुर्लभ रोग दिवस एक वार्षिक वैश्विक दिवस है। इस वर्ष यह दिवस 28 फरवरी को मनाया जा रहा है। यह दिवस हमें सिखाता है कि बीमारी दुर्लभ हो सकती है, लेकिन मरीज नहीं। हर व्यक्ति क...

पैक्स सिलिका में भारत का होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि...

-ललित गर्ग इक्कीसवीं सदी का यह दौर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और तकनीकी आपूर्ति शृंकखलाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धा का दौर बन चुका है। ऐसे समय में भारत द्वारा एआई शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन और उसके तुरंत बाद अमेरिका के नेतृत्व ...

वीर सावरकर की पुण्यतिथि : भारत रत्न की मांग उठी...

आज वीर सावरकर की 60वीं पुण्यतिथि हैं। 26 फरवरी, 1966 को मुंबई (तब बॉम्बे) में वीर सावरकर का निधन हो गया। हिंदुत्व के प्रबल पैरोकार वीर सावरकर एक बार फिर चर्चा में है। सावरकर कभी संघ के स्वयंसेवक नहीं रहे है। वे हिंदू महासभा के नेत...

डीपफेक का धोखा और डिजिटल सख्त नियमों की अनिवार्यता...

-ः ललित गर्ग डिजिटल युग में सूचना की गति जितनी तीव्र हुई है, उतनी ही तेजी से भ्रम, छल और दुष्प्रचार की संभावनाएँ भी बढ़ी हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डीपफेक तकनीक ने इस चुनौती को और जटिल बना दिया है। अब केवल शब्दों से नहीं, बल्कि चे...

बंगाल चुनाव में हिंदी भाषी मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण...

प. बंगाल विधानसभा के चुनाव शीघ्र होने जा रहे है। यहां चुनाव प्रचार की शुरुआत अभी से हो चुकी है। दीवारों पर पार्टियों के चुनाव चिह्न और स्लोगन लिखे जा रहे है। इन चुनावों में हिंदी भाषी मतदाताओं की भी प्रभावी भूमिका है जिनकी संख्या ...

कांग्रेस का चुनावी ब्रह्मास्त्र है प्रियंका गांधी...

बाल मुकुन्द ओझा असम, बंगाल और केरल सहित पांच राज्यों में शीघ्र विधानसभा चुनाव होने जा रहे है। कांग्रेस पार्टी इन चुनावों में गाँधी परिवार की बेटी प्रियंका में चुनावी संभावनाएं तलाश रही है। लोकसभा में अपने पॉजिटिव रवैये के चलते उन्...

कचरे पर कड़ा रुख: न्यायपालिका के निर्देश और ज़मीनी सच्चाई...

-सुनील कुमार महला ठोस कचरे का प्रबंधन आज के समय की एक बहुत बड़ी आवश्यकता बन चुका है। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज लगातार बढ़ती जनसंख्या, बढ़ते शहरीकरण, औधोगिकीकरण और उपभोग की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण धरती पर ठोस कचरे की मात्रा लगातार ...

भारत का एआई नेतृत्व तकनीक एवं मानवीय मूल्यों का संगम बने...

दिल्ली इन दिनों केवल भारत की राजनीतिक राजधानी भर नहीं, बल्कि उभरती तकनीकी चेतना का वैश्विक केंद्र बनी हुई है। ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब प्रयोगशालाओं या कॉरपोरेट दफ्तरों तक...

बढ़ता ही जा रहा है बंजरपन का रकबा...

भूमि के बंजर होने की समस्या ने आज दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। भारत की बात करें तो यहां उपजाऊ भूमि के बंजर होने का खतरा निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में मात्र 11 प्रतिशत जमीन ही उपजाऊ है। ...

बंगाल का भविष्यः धर्म की लहर या प्रगति की राह?...

-ः ललित गर्ग:- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, पर राजनीतिक रणभेरी बज चुकी है। इस बार संकेत साफ हैं-चुनाव विकास बनाम विकास के दावे पर नहीं, बल्कि पहचान, अस्मिता और धर्म की ध्वजा के इर्द-गिर्द घूम स...

केरल में गाली और दिल्ली में गलबहियां...

– बाल मुकुन्द ओझा केरल विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ा है। कम्युनिष्टों ने इसी राज्य से अपनी पार्टी की नीवं खड़ी की थी। केरल से शुरू हुई यात्रा बंगाल और त्रिपुरा तक फेल गई। कभी देश के एक दर्ज़न से अधिक राज्यों में कम्युनिष्टो...

विकास का संकल्प : ट्रिपल इंजन से बदलेगी दिल्ली की तस्वीर...

-ः ललित गर्ग वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में दिल्ली के लिए 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का प्रावधान केवल एक आर्थिक घोषणा नहीं, बल्कि राजधानी के भविष्य की रूपरेखा है। सड़क, रेल परिवहन, मेट्रो विस्तार, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य,...

मातृभाषा का संरक्षण : पहचान और अस्तित्व की रक्षा...

-सुनील कुमार महला 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है। वास्तव में यह दिवस दुनिया भर में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने के साथ ही साथ विभिन्न मातृभाषाओं के संरक्षण के महत्व को समझाने के लिए ...

रोबोडॉग विवाद : तकनीक, पारदर्शिता और प्रतिष्ठा का टकराव...

– महेन्द्र तिवारी तकनीकी उपलब्धियों के इस युग में जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता को भविष्य की दिशा तय करने वाली शक्ति माना जा रहा है, तब सार्वजनिक मंचों पर प्रस्तुत किए जाने वाले दावों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पहले से कहीं अधिक ...

सामाजिक न्याय का सन्देश : रोटी, कपड़ा और मकान...

बाल मुकुन्द ओझा हमारे देश में आज़ादी के 77 साल बाद भी लोग रोटी, कपड़ा और मकान की बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे है। इस विषम स्थिति में सामाजिक न्याय की बात करना जले पर नमक छिड़कने के बराबर है। फिर भी देश और दुनिया सामाजिक न्याय दिव...

एग्जाम स्ट्रेस से सफलता तक : परीक्षा फोबिया को हराने के आसान उपाय...

-सुनील कुमार महला इन दिनों हमारे देश में परीक्षाओं का दौर चल रहा है और ऐसे समय में बच्चे अक्सर तनाव, अवसाद और डर(एक्जाम फोबिया) का अनुभव करते हैं। परीक्षा को लेकर उनके मन में अनेक प्रश्न उठते हैं-क्या होगा, कैसे होगा, कितने अंक आए...

न्यूज़ चैनलों पर हेट स्पीच का भोकाल...

बाल मुकुन्द ओझा देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर हेट स्पीच कर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा, सियासी दलों को अपने नेताओं पर लगाम लगानी चाहिए और मीडिया को भी ऐसे नफरती भाषणों को बार-बार दिखाने से बचना चाहिए। देश के बहुत से लोगो...

बंगाल का भविष्य : धर्म की लहर या प्रगति की राह?...

-ललित गर्ग पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, पर राजनीतिक रणभेरी बज चुकी है। इस बार संकेत साफ हैं-चुनाव विकास बनाम विकास के दावे पर नहीं, बल्कि पहचान, अस्मिता और धर्म की ध्वजा के इर्द-गिर्द घूम सकता ...

यूपी जहां चौबीसों घंटे राजनीतिक पार्टियां चुनावी मोड में रहती है...

बाल मुकुन्द ओझा देश में यूपी एक मात्र ऐसा राज्य है जहां चौबीसो घंटे राजनीतिक पार्टिया चुनावी मोड़ में रहती है। हालाँकि यूपी विधान सभा के चुनाव अगले साल होने है मगर चुनावी दुंदुभि अभी से बजने लगी है। सियासी पार्टियों ने अपनी अपनी कम...

शिवजी को अत्यंत प्रिय है बेलपत्र...

बाल मुकुन्द ओझा महाशिवरात्रि हिन्दुओं के सबसे बड़े पर्वों में से एक है। महाशिवरात्रि का दिन मांगलिक कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को पड़ रही है। मान्‍यता है कि इसी दिन शि...

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की वैचारिक क्रांति...

– ललित गर्ग बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर इतिहास के मोड़ पर खड़ी है। लगभग दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद यदि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में लौटती है और तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की दावे...

धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण त्यौहार है महाशिवरात्रि...

रमेश सर्राफ धमोरा भगवान शिव का त्यौहार है महाशिवरात्रि । भारत के सभी प्रदेशो में महाशिव रात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। भारत के साथ नेपाल, मारिशस सहित दुनिया के कई अन्य देशों में भी महाशिवरात्रि मनाते है। हर साल फाल्गुन मा...

नारी ही परिवार की खुशी, राष्ट्र का गौरव और सुख की धुरी है...

-सुनील कुमार महला स्त्री की गरिमा और उसका सम्मान भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा रहे हैं। हमारे यहां नारी को शक्ति, करुणा और सृजन का प्रतीक माना गया है तथा शास्त्रों में कहा गया है-‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता।&...

मन की बात ने बढ़ाया रेडियो का मान सम्मान...

विश्व रेडियो दिवस प्रतिवर्ष 13 फरवरी को मनाया जाता है। कोई माने या न माने मगर यह बिलकुल सच है की भारत में अपनी पहचान खोते जा रहे रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम ने पुनर्जीवित कर नया जीवनदान दिया है। मोदी के लोक...

सुरक्षित डिजिटल भविष्य: सावधानी, शिक्षा और सशक्त निगरानी की जरूरत...

-सुनील कुमार महला आज एआई का दौर है, सूचना क्रांति का युग है,जहाँ मशीनें मनुष्य सोच को नई उड़ान देती हैं।सच तो यह है कि आज के समय में ज्ञान, काम और रचनात्मकता सब बदल रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो मानव और तकनीक मिलकर भविष्य गढ़ ...

लोकसभा-अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वासः लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा...

-ः ललित गर्ग लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी लोकतंत्र के लिये एक चिन्ताजनक घटना है। क्योंकि लोकतंत्र केवल शासन की एक प्रणाली नहीं, बल्कि निरंतर संवाद, असहमति के सम्मान और संस्थागत विश्वास पर टिक...

महान चिंतक, समाज-सुधारक और देशभक्त स्वामी दयानन्द सरस्वती...

बाल मुकुन्द ओझा उन्नीसवीं शताब्दी के महान समाज-सुधारकों में स्वामी दयानंद सरस्वती का नाम अत्यंत श्रध्दा के साथ लिया जाता है। स्वामी दयानंद सरस्वती आर्य समाज के संस्थापक, महान चिंतक, समाज-सुधारक और देशभक्त थे। स्वामी जी का जन्म 12 ...

लोकतंत्र के मंदिर में सियासी बवंडर...

बाल मुकुन्द ओझा संसद का बजट सत्र भारत के लोकतंत्र के लिए काफी शर्मनाक साबित हो रहा है। लोकतंत्र के इस पावन पवित्र मंदिर में जनता के मुद्दे उठाने की बजाय कार्यवाही ठप्प करना ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। संसद का बजट सत्र भी पिछले सत...

… ताकि दुबारा न हो सूरजकुंड जैसे हादसे !...

-सुनील कुमार महला फरीदाबाद में आयोजित 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव 2026 के दौरान शनिवार, 7 फरवरी 2025 की शाम एक गंभीर हादसा हुआ, जब मेले में लगे एक झूले के टूटने से 13 लोग घायल हो गए। इस दुर्घटना में झूला ...

भारत ने दलहन आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाये कदम...

बाल मुकुन्द ओझा अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस हर साल 10 फरवरी को मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम विश्व की दलहन: सादगी से उत्कृष्टता की ओर रखी गई है। यह दिवस पहली बार वर्ष 2016 में मनाया गया था। बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 फरवरी ...

जहाँ सुरों में बसता है सुकून: मनुष्य जीवन में संगीत...

-सुनील कुमार महला आज की जीवनशैली भागम-भाग भरी है। मनुष्य हर कहीं तनाव और अवसाद की बेड़ियों में बंधा नज़र आता है। उसके पास न स्वयं के लिए समय बचा है और न ही परिवार व दूसरों के लिए। पदार्थ में वह रम-बस सा गया है।ऐसे में संगीत मनुष्य...

थाली से प्याली तक मिलावट ही मिलावट...

बाल मुकुन्द ओझा देश में कुछ भी सुरक्षित नहीं है। अब दूध भी नकली मिल रहा है। गुजरात के साबरकांठा जिले के सलाल इलाके में जहरीले केमिकल से दूध बनाने वाली एक फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने सलाल में रेलवे क्रॉसिंग के पास श्री सत...

आखिर क्यों चर्चा में है ‘खेजड़ी बचाओ जन-आंदोलन’...

-सुनील कुमार महला इन दिनों राजस्थान में खेजड़ी बचाओ जन-आंदोलन खास चर्चा में है। दरअसल, खेजड़ी बचाओ जन-आंदोलन राजस्थान के राज्य वृक्ष ‘खेजड़ी’ के संरक्षण के लिए चलाया जा रहा एक जन-आंदोलन है। वास्तव में यह आंदोलन सोलर कंपनियों द्वार...

मोबाइल बच्चों का दोस्त है या दुश्मन...

-बाल मुकुन्द ओझा भारत में भी कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के बेज़ा इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग अब जोर शोर से उठने लगी है। भारत सरकार ने भी देर आये दुरस्त आये अब सोशल मीडिया के बेज़ा इस्तेमाल से बच्चों को बचाने पर गंभीरता स...

गड्ढों वाली व्यवस्था और खतरे में पड़ता जीवन...

गड्ढों में गिरी व्यवस्था में समाप्त होता जीवन आज के भारत की एक ऐसी विडंबना बन चुका है, जिसे देखकर मन भीतर तक सिहर उठता है। नोएडा में कार सवार युवा इंजीनियर की गड्ढे में गिरकर मौत का दर्द अभी समाज के मन से उतरा भी नहीं था कि दिल्ली...

डराने लगी है ऑनलाइन गेमिंग की लत एवं आभासी दुनिया...

-ः ललित गर्ग ऑनलाइन गेमिंग की लत एवं आभासी दुनिया कितनी भयावह एवं घातक हो सकती है, इसकी एक ही दिन में दो अलग-अलग जगह घटी घटनाओं ने न केवल झकझोरा है, बल्कि यह हमारे समय, हमारी सामाजिक संरचना और हमारी सामूहिक असावधानी पर लगा हुआ एक ...

राजस्थान में साहित्य अकादमियों का नहीं है कोई धणी धोरी...

बाल मुकुन्द ओझा लगता है सरकारों ने साहित्य, संस्कृति और कला से अपना मुंह मोड़ लाया है। इसका एक ताज़ा उदहारण राजस्थान है। पिछली गहलोत सरकार का अनुसरण करते हुए वर्तमान भजन लाल सरकार ने भी इस दिशा में अपनी कोई रूचि प्रदर्शित नहीं की है...

सोशल मीडिया : संवाद का माध्यम या निजता का संकट ?...

-सुनील कुमार महला आज संचार क्रांति का युग है।हर कोई सोशल मीडिया,एआइ का प्रयोग कर रहा है। आधुनिक दौर में सोशल मीडिया ने हमारे अनेक कार्यों को आसान और सरल बनाया है। दूसरे शब्दों में कहें तो सोशल मीडिया ने संवाद को जितना सरल और व्याप...

दम तोड़ रही हैं जीवनदायी नदियां...

-बाल मुकुन्द ओझा नदियां कभी हमारी पहचान थी। आदिकाल से जीवनदायिनी रही हमारी पवित्र नदियां आज दम तोड़ रही हैं। नदियों और झीलों के रूप में पानी के प्रचुर प्राकृतिक स्रोतों पर विचार करते हुए देखे तो भारत एक समृद्ध देश है। नदियां न केवल...

प्रकृति संरक्षित तो मानव जीवन भी सुरक्षित...

-बाल मुकुन्द ओझा प्रकृति पर्यावरण और प्रदूषण एक दूसरे के पूरक हैं। प्रकृति में कोई विकृति आएगी तो पर्यावरण बिगड़ेगा जिसका खामियाज़ा हमें प्रदूषण के रूप में उठाना होगा। इन तीनों में सामंजस्य हुआ तो मनुष्य को बेहतर जीवन जीने का अवसर म...

मीर तकी मीर : दर्द को शायरी बनाने वाला शायर...

-सुनील कुमार महला 3 फरवरी को साहित्यकार, उर्दू साहित्य के महानतम शायर मीर तकी मीर (1723–1810) का जन्मदिन मनाया जाता है।मीर तकी मीर सिर्फ़ ग़ज़ल के शायर नहीं थे, वे अपने समय की टूटी हुई रूह की आवाज़ थे।मीर उर्दू ग़ज़ल को शिखर तक पह...

शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने...

-ललित गर्ग जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंध...

मासिक धर्म गरिमा का अधिकार है...

देश की सर्वोच्च अदालत ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए कहा है, मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। फैसले में ...

आर्थिक सर्वेक्षण से बजट तक : भविष्य के भारत की तलाश...

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद के पटल पर प्रस्तुत किया जाने वाला बजट केवल आय-व्यय का वार्षिक लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि वह देश की आर्थिक दिशा, सामाजिक प्राथमिकताओं और भविष्य की संभावनाओं का दर्पण होता है। आज जब ...

मन चंगा तो कठौती में गंगा

सामाजिक समरसता के प्रेरक संत रविदास जयंती माघ महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस साल ये दिन एक फरवरी को है। इस वर्ष उनका 649 वां जन्मदिवस मनाया जा रहा है। रविदास को रैदास नाम से भी जाना जाता है। रविदास का जन्म वाराणसी के पास के...

अजित पवार : आरोपों से ऊपर उठे राजनीति के ‘दादा-पुरुष’...

यह खबर केवल एक व्यक्ति के निधन की नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के एक पूरे युग के अचानक थम जाने की सूचना है। 28 जनवरी 2026 की सुबह जब बारामती में हुए विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित अनंतराव पवार के असामयिक निधन की पुष्टि...

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक...

सुप्रीम कोर्ट द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने से जुड़े नए नियमों पर अंतरिम रोक लगाना केवल एक कानूनी आदेश नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज, संविधान और शिक्षा व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा एक गहरा संकेत है। यह फैसल...

आज के दौर में गांधी की प्रासंगिकता...

महात्मा गांधी की 78 वीं पुण्यतिथि को आज देश और दुनिया में शहीद दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हर साल इस दिन राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और...

एविएशन सेक्टर को दुर्घटना-शून्य बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने क...

हवाई यात्रा को लंबे समय तक सबसे सुरक्षित यात्रा माध्यम माना जाता रहा है। आँकड़े भी यही गवाही देते हैं कि सड़क, रेल और जलमार्ग की तुलना में विमान दुर्घटनाएँ कहीं कम होती हैं। आधुनिक तकनीक, कड़े सुरक्षा मानक, प्रशिक्षित पायलट और अत्...

आम आदमी की नजर से नौवां बजट...

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लगातार नौवां आम बजट पेश करने जा रही हैं। यह केवल एक औपचारिक आर्थिक दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि उस दौर का आईना होगा जिसमें आम आदमी महंगाई, रोजगार, स्वास्थ्य और भविष्य की अनिश्चितताओं के बी...

खबर की सच्चाई जानने के लिए अखबार सर्वोत्तम माध्यम...

भारतीय समाचार पत्र दिवस प्रतिवर्ष 29 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य नागरिकों को समाचार पत्र पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करना और उन्हें सामाजिक-राजनीतिक मामलों से अवगत कराना है। यह दिन भारतीय पत्रकारिता की समृ...

जिस लाठी ने साम्राज्य को हिला दिया: पंजाब केसरी लाला लाजपत राय...

28 जनवरी को महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, आर्य समाज के प्रमुख विचारक तथा प्रखर राष्ट्रवादी नेता लाला लाजपत राय की जयंती मनाई जाती है। अपनी ओजस्वी वाणी, निर्भीक तेवर और अंग्रेजी हुकूमत के सामने कभी न झुकने वाले व्यक्तित्व के...

सड़कें बन रहीं सुरक्षित कम, जानलेवा ज़्यादा...

हाल ही में जारी वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवा रहे हैं और इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी कार दुर्घटनाओं की है। तेज़ रफ्तार, नियमों की अनदेखी और लापरवाह ड्राइविंग ...

भारत का 77वाँ गणतंत्र दिवस : संविधान, उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ...

26 जनवरी 1950 वह दिन है जब भारत का संविधान लागू हुआ था और इसी दिन भारत एक गणतंत्र राष्ट्र बना। इससे पूर्व 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान को अंगीकार किया गया था। इस बार अर्थात् वर्ष 2026 में भारत अपना 77वाँ गणतं...

राष्ट्रीय गौरव राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान सर्वोपरि है...

आज गणतंत्र दिवस है। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस हमारे राष्ट्रीय पर्व हैं। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर देखते हैं लोगों का तिरंगे के प्रति विशेष सम्मान झलकता है और होना भी चाहिए क्योंकि यह हमारा राष्ट्रीय गौरव है। राष्ट्र...

दुनिया जल के वैश्विक दिवालियापन की ओर बढ़ रही है...

जल है तो जीवन है”-यह पंक्ति कोई नारा भर नहीं, बल्कि मानव सभ्यता का शाश्वत सत्य है। बिना जल के जीवन की कल्पना भी संभव नहीं। किंतु विडंबना यह है कि जिस जल को हम जीवन का आधार मानते हैं, वही आज सबसे अधिक संकटग्रस्त संसाधन बन चुका है। ...

अर्थव्यवस्था की कुंजी है पर्यटन...

राष्ट्रीय पर्यटन दिवस हर साल 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों में पर्यटन का महत्व जगाने तथा अर्थव्यवस्था को मजबूती से आगे बढ़ाने के लिए लोगों को जागरूक बनाना है। वर्ल्ड ट्रेवल एंड टूरिज्म काउंसिल की 2024-...

बेटियों को चाहिए शिक्षा, सुरक्षा और संरक्षण...

राष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है ताकि बालिकाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। आजकल बालिका के सशक्तीकरण की चर्चा हमारी जुबान पर हर वक्त रहती है। सरका...

सशक्त बालिका, समर्थ राष्ट्र: विकास की नई उड़ान...

हर साल 24 जनवरी को भारत में राष्ट्रीय बालिका दिवस(नेशनल गर्ल चाइल्ड डे) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसरों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह दिन समाज...

एक महानायक की कहानी : नेताजी सुभाष चंद्र बोस और पराक्रम दिवस...

23 जनवरी को, वर्ष 2021 से भारत में ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। वास्तव में, यह दिवस भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर उनके अदम्य साहस, उनकी वीरता और राष्ट्रप्रेम को...

ज्ञान, चरित्र और संस्कार का संदेश देती है बसंत पंचमी...

ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित वसंत पंचमी से ही वसंत ऋतु का आरंभ माना जाता है। प्रकृति का हर परिवर्तन मनुष्य के जीवन में कुछ परिवर्तन अवश्य ही लाता है। वसंत पंचमी हमें जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संदेश देता है। इस ...

ज्ञान और वैराग्य का पर्व है वसन्त पंचमी...

धर्म, इतिहास और संस्कृति-तीनों मनुष्य जीवन के चित्र में हरे, लाल, पीले रंगों की तरह गहरे घुले-मिले तत्त्व हैं, यद्यपि इनमें तीनों के रंग अलग-अलग हैं। फिर भी इनकी पहचान करने में हम भूल कर सकते हैं, परन्तु पहचान करना कठिन नहीं है। ध...

सियासत की ठन ठन गोपाल हो गई है मायावती?...

बसपा सुप्रीमो और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती इन दिनों फिर चर्चा में है। अपने जन्मदिन के मौके पर मायावती ने घोषणा की कि उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। यह किसी गठबंधन में शामिल नहीं होंगी। कभी यूपी की सियासत में मायावती की तूत...

सहेजना ज़रूरी है, पर कितना? संचय प्रवृत्ति का द्वंद्व...

मनुष्य की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि वह इस जीवन को स्थायी मानकर चलने लगता है। वह सोचता है कि जितना अधिक वह संचय कर लेगा-धन, संपत्ति, पद, प्रतिष्ठा या संबंध-उतना ही उसका भविष्य सुरक्षित हो जाएगा। वास्तव में, इसी सोच के कारण वह निर...

चिली के जंगलों में आग ने मचाई तबाही...

चिली इस समय भयावह आपदा की चपेट में है। दक्षिण अमेरिकी देश चिली के जंगल में लगी आग की चपेट में आकर अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। चिली फिलहाल भीषण लू की चपेट में है। जंगल की आग ने तबाही मचा दी है, जिसके वजह से वहां इमरजेंसी की घ...

गिलहरी प्रशंसा दिवस : प्रकृति के नन्हे माली और उनके संरक्षण का मह...

‘प्रत्येक वर्ष 21 जनवरी को विश्व स्तर पर ‘स्क्विरल एप्रिसिएशन डे’ (गिलहरी प्रशंसा दिवस) मनाया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2001 में उत्तरी कैरोलिना की वन्यजीव पुनर्वासकर्ता क्रिस्टी हा...

बज उठी है बंगाल में चुनावी महासंग्राम की रणभेरी...

प.बंगाल में अभी चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों की तिथियां घोषित नहीं की है मगर पूरा प्रदेश चुनावी शोर शराबे में डूब गया है। चुनाव की रणभेरी बज उठी है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी कमान संभाल ली है। उनके दौरे शुरू हो चुक...

दुनिया में हर 8वां शख्स मोटापे से जूझ रहा है...

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल 28 लाख मौतें मोटापे से होती हैं। रिपोर्ट कहती है कि दुनिया में हर 8वां शख्स मोटापे से जूझ रहा है। यह बीमारी इतनी तेजी से बढ़ रही है कि WHO इसे एपिडेमिक मान रहा है। मोटापा कार्डिय...

समुद्री जीवन के रक्षक : राष्ट्रीय पेंगुइन दिवस का महत्व...

हर साल 20 जनवरी को राष्ट्रीय पेंगुइन दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पेंगुइन प्रजातियों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन विशेष रूप से अंटार्कटिका में पेंगुइनों के वार्षिक प्रवास से जुड़ा ह...

प्राकृतिक आपदाओं के बीच मानवता की उम्मीद : एनडीआरएफ की भूमिका और ...

19 जनवरी को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) स्थापना दिवस मनाया जाता है, क्यों कि वर्ष 2006 में इसी दिन एनडीआरएफ का गठन किया गया था।यह बल प्राकृतिक व मानव-निर्मित आपदाओं में राहत और बचाव कार्य के लिए जाना जाता है। पाठकों को बताता...

चुनावों में दरकने लगे सियासी परिवार...

बिहार के बाद महाराष्ट्र में भी पारिवारिक सियासत के किले एक के बाद एक ढहने शुरू हो गए है। कुछ दिनों पूर्व बिहार में लालू परिवार का गढ़ ध्वस्त हो गया था। अब महाराष्ट्र में भी दो शक्तिशाली सियासी परिवार दरकने लगे है। मुंबई सहित महाराष...

ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी अब हकीकत बन चुकी है...

धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके दुष्परिणाम अब पूरी दुनिया में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। इसी क्रम में यूरोपीय संघ की कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा (सी3एस) ने 14 जनवरी 2026 को जलवायु परिवर्तन को लेकर गंभीर चेतावनी ज...

जीवन की सच्चाइयों का आइना है बुढ़ापा...

वृद्धावस्था जीवन का वह सच है जिसे आज नहीं तो कल सब को स्वीकारना होगा। एक दिन बुढापा आपको भी आएगा जिसके आगोश में हर किसी को आना है। जो लोग आज इस सच्चाई को स्वीकार नहीं रहे है उन्हें बुढ़ापा अपनी रंगत जरूर दिखायेगा। बुजुर्गजन वटवृक्ष...

बचत और खर्च का असंतुलनः नये भारत के लिए बड़ी चुनौती...

महामारी के बाद की दुनिया केवल स्वास्थ्य के स्तर पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक सोच और व्यवहार में भी एक बड़े संक्रमण से गुज़री है। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की अस्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती महंगाई, तकनीक-आधारित बाजार और उपभोक्तावादी संस...

प्रकृति परिवर्तन और सामाजिक समरसता का पर्व है मकर संक्रांति...

भारत में प्रत्येक पर्व और त्योहार का अपना सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्त्व होता है। ऐसा ही एक पर्व मकर संक्रांति है जो लोक मंगल को समर्पित है। हिन्दू तीज-त्योहारों में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति का त्योहार धार्मि...

लोकजीवन, कृषि-संस्कृति और सामूहिक चेतना का पर्व है लोहड़ी !...

लोहड़ी वैसे तो पूरे उत्तर भारत में मनाया जाता है, लेकिन यह मुख्य रूप से पंजाब की जीवंत संस्कृति और कृषि प्रधान जीवन का दर्पण है।पंजाब कृषि प्रधान राज्य है और लोहड़ी का सीधा संबंध किसान जीवन से है। यह वह समय होता है जब रबी की फसल, ...

स्वामी विवेकानंद: युवाशक्ति के जागरण का अमर स्वर...

हर वर्ष 12 जनवरी को भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस (नेशनल यूथ डे) महान् आध्यात्मिक गुरू, युवा वक्ता,मार्गदर्शक, विचारक और राष्ट्रनिर्माता स्वामी विवेकानंद की जयंती के रूप में मनाया जाता है।आपका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता (तत्काली...

युवा में है बदलाव की असीम शक्ति...

देश में हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय युवा दिवस 2026 की थीम उठो, जागो और अपनी शक्ति को पहचानो है, जो युवाओं को देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की तरफ प्रेरि...

बंगाल में राष्ट्रपति शासन की आहट...

बंगाल की सियासत तीन लोक से न्यारी है। यहाँ चुनाव से पहले नित नये रहस्योद्घाटन होने लगे है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की आई-पैक पर छापेमारी के बाद देश के गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कहा यदि उन्होंने पेन ड...

मानव तस्करी जागरूकता दिवस : खामोश अपराध के खिलाफ आवाज़...

11 जनवरी को राष्ट्रीय मानव तस्करी विरोधी दिवस (नेशनल एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग डे) या राष्ट्रीय मानव तस्करी जागरूकता दिवस मनाया जाता है, जैसा कि मानव तस्करी आज दुनिया भर में एक गंभीर व बड़ी समस्या बनकर उभरी है।यहां पाठकों को जानकारी ...

भूख से मुक्ति का राष्ट्रीय संकल्प है अटल कैंटीन योजना...

भूख केवल एक शारीरिक पीड़ा नहीं है, वह सामाजिक असंतुलन, मानसिक कुंठा और नैतिक विचलन की जननी भी है। इतिहास साक्षी है कि जब पेट खाली होता है, तो विचार उग्र हो जाते हैं, व्यवस्था के प्रति विश्वास डगमगाने लगता है और विद्रोह की भावना पनप...

वैश्विक जगत की सांस्कृतिक पहचान है हिंदी...

हम हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाते है और इसे वैश्विक स्तर की भाषा बता कर गुणगान करते है। विश्व हिंदी दिवस की इस वर्ष की थीम हिंदी : पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्मिमत्ता तक रखी गई है। इसका उद्देश्य है कि हिंदी पारंपरिक र...

विकसित भारत के सारथी : प्रवासी भारतीय और 2047 का संकल्प...

हर साल 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। इसे एन आर आई दिवस(नोन-रेजिडेंट इंडियन डे) भी कहा जाता है। पाठकों को बताता चलूं कि इस दिन को इसलिए चुना गया था, क्योंकि 9 जनवरी 1915 को महात्मा गाँधी दक्षिण अफ़्रीका से भारत वापस...

कुत्तों का मूड नहीं, इंसानों की जान मायने रखती है...

देश की सर्वोच्च अदालत आजकल डॉग लवर और डॉग हेटर की सुनवाई में व्यस्त है। आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उससे होने वाले हादसों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने सुनवाई करते हुए कहा कि, यह मसला केवल ...

वेनेज़ुएला संकटः अमेरिकी निरंकुशता और वैश्विक कानूनों का हनन...

वेनेज़ुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था वास्तव में नियम-कानूनों से संचालित होती है या फिर ताकतवर राष्ट्रों की इच्छा ही वैश...

नहीं थमा बांग्लादेश में हिन्दुओं का कत्लेआम...

बांग्ला देश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं का कत्लेआम थमा नहीं है। एक के बाद एक हो रही हत्या रोंगटे खड़ा कर देने वाली है। शेख हसीना की सरकार को ज़बरदस्ती गिराने के बाद वहां हिंदू समुदाय पर हो रही बर्बरता ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। ...

अमेरिका अपना रहा दोहरे मानदंड...

हाल ही में 3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने वेनेज़ुएला में एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया, जिसमें अमेरिकी बलों ने राजधानी काराकस समेत कई जगहों पर हवाई और सैन्य हमले किए और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड...