बीकानेर। पर्यटन लेखक संघ महफिले अदब के तत्वावधान में रविवार को होटल मरुधर हेरिटेज में तरही मुशायरा- 33 आयोजित किया गया जिसका मिसरा ए तरह वो तेरी जुल्फों का साया क्या हुआ था।नगर के शायरों ने कोटा के शायर शकूर अनवर के मिसरे पर एक से बढ़ कर एक $गज़लें कहीं।अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने उस्तादाना गजल पेश कर प्रोग्राम को ऊंचाई बख्शी- हमने लाख उसको बुलाया क्या हुआ वो मगर फिर भी न आया क्या हुआमुख्य अतिथि अमर जुनूनी ने तरन्नुम में गजल सुना कर वाह वाही लूटी- दिल सुकू पाने को आया क्या हुआ वो तेरी जुल्फों का साया क्या हुआ संयोजक डॉ जि़या उल हसन कादरी ने गमों की धूप में जुल्फ के साए की बात की-
हम झुलसते हैं गमों की धूप मेंवो तेरी जुल्फों का साया क्या हुआ असद अली असद ने गजल सुना कर दाद बटोरी- जागती आंखों से देखा था कभी वो हमारा एक सपना क्या हुआ कासिम बीकानेरी की गजल भी खूब सराही गई-जो किया था तूने वादा क्या हुआ एक बार आकर तो बतला क्या हुआ इमदाद उल्लाह बासित की गजल भी खूब पसंद की गई।मांगरोल के शायर रफीक राही की भेजी गजल का भी श्रोताओं लुत्फ उठाया। इस अवसर पर शारदा भरद्वाज सदफ,अब्दुल शकूर बीकानवी आदि ने भी अपनी रचनाएं सुनाई।धर्मेंद्र राठौड़ धनंजय ने आगंतुकों का स्वागत किया।प्रकाशचंद्र ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ जि़या उल हसन कादरी ने किया।
बीकानेर: बीकानेर में वो तेरी जुल्फों का साया क्या हुआ’ पर हुआ अदबी तरही मुशायरा, शायरों ने बिखेरी शायरी की महक
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