टोंक। राजस्थान के समीपवर्ती राज्यों में लम्पी स्किन डिजीज के रोग प्रकोप के कारण भरतपुर, डीग, धौलपुर, अलवर, दौसा आदि जिलों में लम्पी स्किन डिजीज के केस रिपोर्ट हो रहे हैं। जिले में लम्पी स्किन डिजीज के रोग के प्रकोप की संभावना को देखते हुए बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए पशुपालन विभाग, टोंक ने सभी आवश्यक तैयारियाँ कर ली हैं और संभावित रोग प्रकोप की स्थिति पर पशुपालन विभाग पूर्ण रूप से नजर बनाए हुए है।
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि इस बीमारी की संभावना को देखते हुए जिला एवं ब्लॉक स्तर पर रोग सर्वेक्षण, रोग निदान एवं इसके उपचार तथा रोकथाम के लिए त्वरित कार्यवाही दलों (आरआरटी) का गठन कर दिया गया है तथा विभाग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे पशुपालकों, गौशाला प्रबंधकों व अन्य स्टेकहोल्डर्स को रोग के लक्षण, इसके सामान्य घरेलू उपचार, जैव सुरक्षा उपायों आदि को अपनाने तथा रोगी पशुओं को आईसोलेट करने तथा पशुओं के आवागमन को निषिद्ध करने के लिए जागरूक करें।
संयुक्त निदेशक ने इस संबंध में सोमवार को वीसी के माध्यम से बैठक का आयोजन कर विभाग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लम्पी स्किन डिजीज से गौवंश को बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने तथा रोग प्रकोप की स्थिति में नगर परिषद, नगर पालिकाओं एवं ग्राम पंचायत स्तर पर आइसोलेशन वार्ड की स्थापना के लिए प्रशासन से समन्वय स्थापित कर स्थान का चयन करने के निर्देशित किया है।
संयुक्त निदेशक ने पशुपालकों, गौशाला प्रबंधकों एवं आमजन से अपील की है कि वे अपने पशुबाड़ो, गौशालाओं में जैव सुरक्षा के उपाय करें। रोगी पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें तथा पशुओं के आवागमन को निषिद्ध करें। रोग के कारण मृत पशुओं के शव को वैज्ञानिक विधि, यथा गड्ढा खुदवाकर चूना एवं नमक आदि के साथ दफनाये ताकि रोग संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद मिल सके। उन्होंने पशुपालकों, गौशाला प्रबंधकों को सलाह दी कि वे अपने पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा संस्था में सम्पर्क कर उपचार करवाए एवं स्वस्थ गौवंश से दूर एक आइसोलेशन वार्ड की स्थापना करें।
लम्पी स्किन डिजीज को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क
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