चुनावों से पहले राजस्थान में नया घमासान, ईडी की एंट्री को लेकर बढ़ी गहमागहमी

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जयपुर. राजस्थान में मई के महीने में जहां गर्मी कहर बरपा रही है वहीं राजनीतिक गलियारों में भी तापमान चढ़ा हुआ है. चुनावों से 6 महीने पहले अब सूबे में केंद्रीय जांच एजेंसियों की एंट्री की सुगबुगाहट तेज हो गई है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जहां खुद कई मौकों पर ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी सेन्ट्रल एजेंसी को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते रहे हैं वहीं अब कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की एंट्री को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. वहीं योजना भवन में डीओआईटी के बेसमेन्ट से मिली 2 करोड़ 31 लाख की नकदी मामले में मंगलवार को बीजेपी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गहलोत सरकार पर हमला बोला और सांसद किरोड़ीलाल मीणा ने इस पूरे मामले की ईडी से जांच करवाने की मांग उठाई. बीजेपी के वर्तमान रुख को देखकर माना जा रहा है कि चुनावों से पहले भ्रष्टाचार पर काफी बवाल होने वाला है जहां बीजेपी नेताओं ने 7 जून को सचिवालय घेराव का ऐलान कर दिया है. दरअसल मंगलवार को बीजेपी मुख्यालय में प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी और नेता प्रतिपक्ष के साथ सांसद किरोड़ीलाल मीणा ने डीओआईटी में मिली नकदी मामले में ईडी से जांच कराने की मांग को पुरजोर तरीके से उठायाय मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि अगर इस मामले की ईडी से जांच करवानी है तो बीजेपी कर सकती है. उन्होंने कहा कि ईडी को जो भी कार्रवाई करनी है वो कर सकती है वैसे भी चुनावों में बीजेपी नेता ईडी-सीबीआई को बुलाते ही हैं, इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है.

चुनावों के नजदीक बीजेपी को याद आई ED
दरअसल बीते दिनों डीओआईटी में करोड़ों की नकदी और सोना मिलने के मामले में बीजेपी हमलावर मोड में है और वहीं दूसरी ओर गहलोत सरकार के मंत्री बचाव की मुद्रा में है. बीजेपी सांसद किरोड़ीलाल मीणा ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि डीओआईटी के अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में काफी बड़ा घोटाला हुआ है जिनकी जांच ईडी से होनी चाहिए. मीणा ने सीएम गहलोत से मांग करते हुए कहा कि डीओआईटी मामले की जांच के लिए खुद सीएम को ईडी को पत्र लिखना चाहिए. वहीं किरोड़ी ने कहा कि अगर डीओआईटी में भ्रष्टाचार नहीं मिलता है तो वह राजनीति से संन्यास का ऐलान कर देंगे. दरअसल गहलोत काफी समय से ईडी के दुरुपयोग को लेकर बीजेपी पर हमला बोलते रहे हैं. बीते दिनों गहलोत ने आरोप लगाते हुए कहा था कि देश की न्यायपालिका, चुनाव आयोग, प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई सब संस्थाएं डरी हुई है और ये संस्थाएं दबाव में काम कर रही हैं. गहलोत ने यह भी कहा था कि इन एजेंसियों को चुनाव से पहले छापे मारने के लिए जगहों और नामों की एक लिस्ट दी जाती है.

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