जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को शासन सचिवालय में परिवर्तन स्कीम तथा एनसीआर क्षेत्र के जिलों में वायु गुणवत्ता से जुड़े विषयों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार एनसीआर क्षेत्र समेत पूरे राज्य में प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रतिबद्ध है। स्कीम के प्रभावी क्रियान्वयन से स्वच्छ वायु और सुरक्षित परिवहन को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है। एनसीआर जिलों में वायु गुणवत्ता की स्थिति पर फीडबैक मुख्य सचिव ने अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ और भरतपुर-डीग के जिला कलेक्टरों से अपने क्षेत्र के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के बारे में विस्तार से फीडबैक लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सभी निर्देशों की जमीनी स्तर पर पूरी पालना सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके। पुराने वाहनों की जगह स्वच्छ वाहनों को प्रोत्साहन श्रीनिवास ने कहा कि स्कीम का उद्देश्य एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाणिज्यिक वाहनों के स्थान पर बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने निर्देश दिए कि स्कीम के लाभों के बारे में आमजन को अधिक से अधिक जागरूक किया जाए, ताकि वाहन स्वामी योजना का लाभ लेने के लिए आगे आएं। परिवर्तन स्कीम के तहत वाहन स्वामियों को मिलने वाले प्रमुख लाभबैठक के दौरान बताया गया कि परिवर्तन स्कीम के अंतर्गत एनसीआर में पंजीकृत बीएस-4 या उससे पुराने ट्रक एवं बस के स्वामी अपने पुराने वाहन को अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा में स्क्रैप करवाकर अथवा बीएस-4 वाहन को एनसीआर से बाहर बेचकर उसके स्थान पर नया वाहन खरीदते हैं तो उन्हें कई लाभ दिए जा रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से नए वाहन पर 10 वर्ष तक मोटर वाहन कर में शत-प्रतिशत छूट, पंजीकरण शुल्क में शत-प्रतिशत छूट तथा एक वर्ष से अधिक की लंबित देनदारियों की माफी का प्रावधान है। पात्र पुराना वाहन खरीदने पर मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत छूट मिलेगी। इसके अलावा वाहन ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जा रहा है और भाग लेने वाली वाहन निर्माता कंपनियों की ओर से एक्स-शोरूम कीमत पर 8 प्रतिशत की छूट मिल रही है। इसके अलावा नया डीजल या सीएनजी वाहन खरीदने वाले लाभार्थियों को 5 वर्ष तक प्रतिमाह ईंधन वाउचर दिए जाते हैं। यह राशि हल्के वाहनों के लिए 1,200 रुपये, मध्यम वाहनों के लिए 2,500 रुपये और भारी वाहनों के लिए 4,800 रुपये प्रतिमाह है। इलेक्ट्रिक वाहन चुनने पर हल्के वाहन के लिए 64 हजार रुपये, मध्यम वाहन के लिए एक लाख 28 हजार रुपये और भारी वाहन के लिए दो लाख 56 हजार रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है। पीयूसीसी और ग्रेप-2 की सख्त पालना मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि “नो पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, नो फ्यूल” के नियम का सख्ती से क्रियान्वयन किया जाए, ताकि वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र के बिना किसी वाहन को ईंधन उपलब्ध न हो। साथ ही दिल्ली-एनसीआर के अंतर्गत आने वाले जिलों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के तहत ग्रेप-2 की सभी अनुपालनाएं पूरी गंभीरता से धरातल पर लागू करने के निर्देश दिए। बेहतर समन्वय और जन-जागरूकता पर जोर उन्होंने वित्तीय संस्थानों, वाहन निर्माता कंपनियों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने को कहा, ताकि लाभार्थियों को योजना के लाभ सुगमता से मिल सकें। उन्होंने कहा कि फील्ड स्तर पर जागरूकता मेलों के आयोजन और व्यापक प्रचार-प्रसार से जन-सहयोग मजबूत होगा। जन-सहयोग से ही प्रदूषण नियंत्रण का यह लक्ष्य पूरी सफलता के साथ हासिल किया जा सकेगा। बैठक में परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

जन-सहयोग से ही प्रदूषण नियंत्रण का लक्ष्य पूरी सफलता से हासिल होगा, पात्र वाहन स्वामियों तक पहुंचे योजना का लाभ : वी. श्रीनिवास
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