वाशिंगटन। अमेरिका, कनाडा समेत कई देशों ने सूडान में अकाल की चेतावनी जारी की है। देश के लगभग 2 करोड़ लोग पर्याप्त भोजन पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सभी ने देश के युद्धरत पक्षों से मांग की है कि वे उन सभी प्रतिबंधों को तुरंत हटाएं जो आम नागरिकों तक मानवीय सहायता पहुंचने में बाधा डाल रहे हैं। सोमवार को अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में, उसके साझेदारों ने बताया कि सूडान की 41 प्रतिशत आबादी, यानी 1.95 करोड़ लोग, गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। इनमें से 50 लाख लोग आपातकालीन स्थितियों से जूझ रहे हैं। 23 अक्टूबर को जारी की गई इस चेतावनी का समर्थन यूरोपीय सरकारों, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय आयोग ने किया है।
बयान पर हस्ताक्षर करने वालों ने चेतावनी दी है कि अगर आने वाले महीनों में जरूरतमंद समुदायों तक अंतरराष्ट्रीय सहायता नहीं पहुंची, तो स्थिति और भी खराब हो सकती है।
संयुक्त बयान में कहा गया, “लोगों की जान बचाने और अकाल रोकने के लिए अब एक पल भी बर्बाद करने का समय नहीं है।”
सरकारों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो गंभीर कुपोषण से जूझ रहे बच्चों की संख्या अनुमानित 8,25,000 के आंकड़े को भी पार कर सकती है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे इलाकों की संख्या, जिसका शुरुआती अनुमान 14 था, दोगुनी हो सकती है।
ये आंकड़े अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा आकलन से लिए गए हैं, जिनका जिक्र बयान पर हस्ताक्षर करने वालों ने किया है।
बयान में सूडान में चल रहे सशस्त्र संघर्ष को वहां के खाद्य संकट का मुख्य कारण बताया गया है।
इसके कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, जरूरी बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया है, और स्वास्थ्य सेवा, कृषि उत्पादन, खाद्य वितरण नेटवर्क तथा स्थानीय बाजारों पर बुरा असर पड़ा है।
सरकारों ने कहा कि मानवीय सहायता पर लगी पाबंदियों और खराब मौसम के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
उन्होंने ‘अल नीनो’ प्रभावों का जिक्र किया, जिसके कारण देश के आधे से अधिक हिस्से में बारिश कम हुई है जिससे सूखे के हालात बने हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय साझेदारों ने सूडान के संघर्ष में शामिल पक्षों से अपील की है कि वे मानवीय संगठनों को अग्रिम मोर्चों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार सुरक्षित रूप से काम करने की अनुमति दें।
उन्होंने विशेष रूप से दारफुर तक हवाई पहुंच की मांग की, जहां असुरक्षा और लॉजिस्टिक संबंधी पाबंदियों के कारण राहत कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं।
बयान के अनुसार, ऐसी पहुंच मिलने से राहत संगठन आपातकालीन सामग्री को तेजी से पहुंचा सकेंगे और जिन मानवीय सहायता कर्मियों को मेडिकल सहायता की जरूरत है, उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर निकाल सकेंगे।
सरकारों ने उन प्रशासनिक बाधाओं को हटाने का भी आग्रह किया है, जो मानवीय राहत कार्यों में देरी का कारण बनती हैं।
इनमें वीजा की लंबी प्रक्रियाएं, कस्टम क्लीयरेंस में देरी, अतिरिक्त यात्रा परमिट और कर संबंधी जरूरतें शामिल हैं, जो राहत संगठनों के काम को प्रभावित करती हैं।
उन्होंने वीजा की वैधता अवधि बढ़ाने और यात्रा संबंधी अनुमतियों को सरल बनाने की मांग की, ताकि मानवीय सहायता कर्मी अपना काम जारी रख सकें।
बयान पर हस्ताक्षर करने वालों ने सशस्त्र समूहों से यह भी अपील की कि वे आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से कृषि केंद्रों और खाद्य उत्पादन प्रणालियों पर हमले न करें। सरकारों ने स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता निधि में तत्काल वृद्धि की मांग की।
उन्होंने विकास बैंकों और वित्तीय संस्थानों से आग्रह किया कि वे सूडान में बिगड़ती खाद्य सुरक्षा की स्थिति से निपटने के लिए अपने कार्यक्रमों में बदलाव करें।
सर्दियों की फसल के मौसम को समर्थन देने पर विशेष जोर दिया गया, जिससे कृषि उत्पादन को फिर से बहाल करने और आपातकालीन खाद्य सहायता पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
बयान में स्थानीय स्तर पर संचालित मानवीय प्रयासों को मजबूत करने का भी आह्वान किया गया।
सरकारों ने कहा कि संघर्ष में शामिल पक्षों की यह मुख्य जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों की सुरक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचे।
सूडान अप्रैल 2023 से ही लड़ाई की चपेट में है।
इस लड़ाई ने देश के कई हिस्सों को तबाह कर दिया है, लाखों नागरिकों को विस्थापित कर दियाहै, और सार्वजनिक सेवाओं को बुरी तरह कमजोर कर दिया है। हिंसा, विस्थापन और मानवीय कार्यों पर लगी पाबंदियों से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में दारफुर भी शामिल है।

सूडान में अकाल का खतरा, अमेरिका और उसके सहयोगियों ने जताई चिंता
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