मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में कृषि विकास की नई उड़ान, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में राजस्थान की सशक्त पहचान

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जयपुर। देश तभी सफलता की सीढ़ी चढ़ेगा, जब किसान समृद्ध होगा और किसान की समृद्धि खेत की सफल पैदावार पर निर्भर करती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इसी ध्येय के अनुसार खेत एवं किसान को सक्षम और सम्पन्न करने के लिए निरंतर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना इसी संकल्प की महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसकी सिद्धि के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के तहत देशभर से चयनित 100 जिलों में राजस्थान के 8 जिलों को शामिल किया गया है। जिनमें नागौर ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। योजना में नागौर जिला बेस्ट परफाॅर्मर प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि ऋण और फसल उत्पादन बढ़ाने से लेकर भंडारण तक के लिए 6 उद्देश्य तय किए गए हैं। इनमें फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देने में नागौर 18.44 पाॅइंट्स के साथ देश में टाॅप जिला बना है। वहीं, फसल कटाई के बाद स्टोरेज क्षमता बढ़ाने और लंबी अवधि के कृषि ऋण की किसानों तक बेहतर पहुंच बनाने में नागौर जिले ने देशभर में चैथा स्थान प्राप्त किया है। इसी प्रकार खेत की पैदावार बढ़ाने और बेहतर गवर्नेंस एवं सर्विस डिलीवरी में नागौर जिला पांचवेें स्थान पर है, जबकि सिंचाई के बुनियादी ढांचे में सुधार करने में पाली जिला देशभर में आठवें स्थान पर है।
रैंकिंग में राजस्थान की प्रभावी उपस्थिति
देशभर से चयनित 100 आकांक्षी जिलों में कुल 11 विभागों की 36 योजनाओं के जरिए कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधीकरण, भंडारण क्षमता को सुदृढ़ करने तथा कृषि ऋण की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यदि सभी योजनाओं और उद्देश्यों को लेकर ओवरऑल परफाॅर्मेंस को देखा जाए, तो भी नागौर जिला 84.13 पाॅइंट्स के साथ देशभर में दूसरे स्थान पर और पाली जिला 11वें स्थान पर है।
जैसलमेर में पहल को मिली राष्ट्रीय पहचान
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत चयनित जिलों की पहचान 3 मुख्य पैमानों कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और खेती के लिए कम कर्ज मिलने के आधार पर की गई थी। इसी के तहत जैसलमेर में 2 हजार एकड़ में इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट आधारित जीरे की खेती और 500 एकड़ में सौर ऊर्जा आधारित स्प्रिंकलर सिंचाई के इस्तेमाल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा भी गया है। यह पहल पानी के कुशल इस्तेमाल, नवीकरणीय ऊर्जा और खेती की बेहतर उत्पादकता को बढ़ावा देती है। योजना के तहत फसल विविधीकरण किसानों की समृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और कृषि क्षेत्र के दीर्घकालीन विकास का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है। इसके तहत किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और फसल संबंधी जोखिमों से सुरक्षा मिलती है और बेहतर आय के अवसर मिलते हैं। साथ ही, बाजरा एवं दलहन जैसी पोषक फसलों का उत्पादन बढ़ने से पोषण सुरक्षा चक्र को भी मजबूती मिलती है।
36 योजनाओं से खेत और किसान हो रहे समृद्ध
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ अन्य मंत्रालयों, नीति आयोग, नाबार्ड और राज्य सरकारों के साथ मिलकर कुल 36 योजनाओं पर एक साथ कार्य किया जा रहा है। इनमें पीएम-किसान सम्मान निधि, पीएम-फसल बीमा योजना, पीएम-किसान मानधन योजना, पीएम-कुसुम योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, कृषोन्नति योजना, परम्परागत कृषि विकास योजना, मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, अटल भूजल योजना, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम, प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्राथमिक कृषि साख समितियों का कम्प्यूटरीकरण, किसान क्रेडिट कार्ड जैसी विभिन्न योजनाएं शामिल हैं।
माॅनिटरिंग और रैंकिंग से प्रभावी क्रियान्वयन
सभी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और माॅनिटरिंग के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर, राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर योजना की देखरेख केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्यकारी समिति और सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय निगरानी समिति कर रही है। वहीं, नीति आयोग द्वारा विकसित पोर्टल पर जिलों की मासिक रैंकिंग भी की जा रही है। निरंतर माॅनिटरिंग और रैंकिंग से आकांक्षी जिलों के प्रदर्शन में निरंतर सुधार होने से देश के समग्र कृषि विकास को गति मिल रही है। इससे ना केवल उच्च उत्पादकता के साथ किसान की आय में सुधार हो रहा है। वहीं, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर यह योजना भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

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