जयपुर। राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि राजस्थान की लोक संस्कृति केवल मनोरंजन का माध्यम ही नहीं है, बल्कि यह हमारी सामाजिक स्मृति, जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत अभिव्यक्ति है। लोकगीत और लोकसंगीत हमारे समाज का मौखिक अभिलेख हैं, जिनमें पीढ़ियों के अनुभव, संवेदनाएं और जीवन दर्शन सुरक्षित हैं। श्री देवनानी बुधवार को स्वर सरिता के भावांजलि विशेषांक का लोकार्पण करने के बाद आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। श्री देवनानी ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। समारोह में साहित्यकार, कलाकार, संगीत साधक, पत्रकार, स्वर सरिता परिवार के आत्मीयजन उपस्थित रहे। श्री देवनानी ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में संगीत और साहित्य का स्थान अत्यंत व्यापक रहा है। वेदों के सामगान से लेकर लोक परंपराओं तक संगीत भारतीय जीवन में साधना, संवेदना और समाज-जागरण का माध्यम रहा है। राजस्थान ने इस परंपरा को अपनी विशिष्ट लोक भाषाओं, धुनों और गायन शैलियों के माध्यम से समृद्ध किया है। श्री देवनानी ने कहा कि स्व. के.सी. मालू ने राजस्थानी अस्मिता और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का कार्य किया। जब लोक भाषाओं, लोक गीतों और पारंपरिक संगीत के सामने बदलते समय की अनेक चुनौतियां थी, तब राजस्थान की लोक धुनों, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक समाज तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की पहचान दुर्ग और महलों के साथ मांड की मिठास, घूमर की लय, कठपुतली की कथा, ढोला मारु की लोक स्मृति, संतों की वाणी, लोक देवताओं की गाथाओं और मीरा की भक्ति से भी होती है। मरुधरा का लोक जीवन संगीत, काव्य और जीवन संघर्ष की अनेक कथाएं समेटे हुए है। श्री देवनानी ने युवाओं का आहवान करते हुए कहा कि आधुनिकता और नई तकनीक को अपनाते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहचानना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति का बोध व्यक्ति की दृष्टि को संकुचित नहीं करता, बल्कि उसे अपनी विशिष्ट पहचान के साथ दुनिया के सामने खड़े होने का आत्मविश्वास देता है। डिजिटल युग ने लोककला और लोकसंगीत को व्यापक मंच उपलब्ध कराने की नई संभावनाएं भी पैदा की है। उन्होंने स्वर सरिता परिवार को भावांजलि विशेषांक के प्रकाशन के लिए बधाई देते हुए कहा कि स्मृति को शब्द और दस्तावेज का रूप देना अपने आप में महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्य है। किसी व्यक्ति के जीवन और योगदान से जुड़ी स्मृतियां जब प्रकाशित होती हैं तो वे निजी अनुभव की सीमा से आगे बढ़कर समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए संदर्भ सामग्री बन जाती हैं। श्री देवनानी ने कहा कि राजस्थान की सांस्कृतिक यात्रा अत्यंत दीर्घ और व्यापक है। इस यात्रा में अनेक व्यक्तियों ने अपने-अपने स्तर पर योगदान दिया है, लेकिन कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो किसी महत्वपूर्ण मोड़ पर उस यात्रा को नई गति प्रदान करते हैं। समारोह को राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह लखावत, विधायक गोपाल शर्मा सहित अनेक लोगों ने संबोधित किया।

लोक संस्कृति, पीढ़ियों की स्मृति – श्री देवनानी
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