अलवर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खैरथल-तिजारा दौरे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्री अलवर जिले को लगातार भाषणों, घोषणाओं, शिलान्यास और लोकार्पण के दौर तक ही सीमित रखे हुए हैं, जबकि धरातल पर पहले की गई घोषणाएं आज भी सरकारी फाइलों में अटकी हुई हैं। जूली ने कहा कि जिला मुख्यालय पर प्रदेश के मुखिया करोड़ों रुपये के शिलान्यास और लोकार्पण कर रहे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि सरकार आज तक यह तय नहीं कर पाई कि जिले का नाम और स्वरूप क्या होगा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जिस जिले में करोड़ों की योजनाओं के लोकार्पण हो रहे हैं, उसी जिले के मुख्यालय का ही आज तक अता-पता नहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास करना अच्छी बात है, लेकिन सरकार को जनता को यह भी बताना चाहिए कि पूर्व में की गई घोषणाओं का क्या हुआ। अलवर, खैरथल-तिजारा और बहरोड़-कोटपूतली क्षेत्र को लेकर पूर्व में की गई अनेक घोषणाएं अभी तक हवा में लटकी हुई हैं। जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे और मंचों से बड़ी-बड़ी घोषणाएं सुनने को मिलती हैं, लेकिन जनता अब घोषणाओं से आगे बढ़कर काम का हिसाब चाहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार पहले की घोषणाओं को ही जमीन पर नहीं उतार पा रही है तो नए शिलान्यास और लोकार्पण का औचित्य क्या है?
उन्होंने खैरथल-भिवाड़ी जिले की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिले के मुखिया यानी कलेक्टर के चैंबर का ही अभी तक अता-पता नहीं है। ऐसे में सरकार के विकास के दावों और जमीनी व्यवस्था के बीच का अंतर साफ दिखाई देता है। जूली ने मुख्यमंत्री के दौरे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अलवर को घोषणाओं का जिला बनाने के बजाय सरकार को पहले अपनी पुरानी घोषणाओं का हिसाब देना चाहिए। जनता अब मंचों से होने वाले भाषण नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाला विकास चाहती है।

भाषणों और शिलान्यासों में सिमट गया अलवर, जमीनी हकीकत अब भी सवालों में: जूली
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