नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की गई है। यह याचिका मीडिया रिपोर्टों को आधार बनाकर दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़े कई अहम फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए थे। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि ऐसे सभी फैसलों को गैरकानूनी घोषित किया जाए और मूल फॉर्म-6 को फिर से लागू किया जाए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि इस बात की एसआईटी जांच कराई जाए कि आखिर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कैसे हटाए गए। याचिकाकर्ता का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटना सामान्य बात नहीं है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जनहित याचिका में आरपी एक्ट के तहत ड्यूटी के दौरान किए गए उल्लंघनों के लिए कई अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की भी मांग की गई है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ मनीष गर्ग, आईएएस एवं डिप्टी ईसी और ईसीआई की आईटी हेड सीमा खन्ना के नाम शामिल हैं।
याचिका में कहा गया है कि इन अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन किया है, इसलिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
इसी बीच चंडीगढ़ में सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। भारी सुरक्षा के बीच कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया।
कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं। पार्टी ने कहा है कि जब तक सीईसी इस्तीफा नहीं देते, उनका विरोध जारी रहेगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल
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