साइमन गो बैक और क्विट इंडिया का नारा यूसुफ मेहर अली ने दिया था

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बाल मुकुन्द ओझा
कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक रहे यूसुफ मेहर अली का जन्म 23 सितंबर, 1903 को मुम्बई के अभिजात्य वर्गीय खोजा मुस्लिम परिवार में हुए था। आज की पीढ़ी के लोग उन्हें नहीं जानते। मगर यह सत्य है की वे जेपी और लोहिया के साथ अग्रिम पंक्ति के नेताओं में वे शुमार किये जाते थे। स्वतंत्रता आंदोलन में उनका बहुत बड़ा योगदान था जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। बिजनेस घराने से जुड़े युसूफ ने गरीबों और मजदूरों के लिए संघर्ष किया। यूसुफ मेहर अली जाने माने स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे। उन्होंने कलकत्ता और मुम्बई से अपनी शिक्षा प्राप्त की। यूसुफ ने सन 1920 में दसवीं की परीक्षा तथा 1925 में स्नात्तक की परीक्षा उत्तीर्ण की। मीनू मसानी, अशोक मेहता, के नरीमेन, अच्यूत पटवर्धन, जयप्रकाश नारायण तथा कमला देवी चट्टोपाध्याय उनके कुछ निकट सहयोगी थे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें आठ बार जेल की काल कोठरी में कैद किया गया था । यूसुफ मेहर अली ने अपनी हिम्मत, साहस और नायब जज़्बे से भारत की आज़ादी में अमिट योगदान दिया। 1928 में ‘साइमन गो बैक’ और 1942 में ‘क्विट इंडिया’ का नारा उन्होंने ही दिया था, जिसने पूरी देश को एकजुट किया। जेलों और मुश्किलों के बावजूद उन्होंने मजदूरों, किसानों और समाज के लिए लड़ाई जारी रखी, और बॉम्बे के मेयर के रूप में जनता के विश्वास का प्रतीक बने।
कालेज में फीस वृद्धि और बेंगलौर में छात्रों पर पुलिस की गोलीबारी के विरोध तथा हड़ताली मिल मजदूरों के समर्थन में जनसभाएं आयोजित कर यूसुफ ने अपनी संगठन क्षमता का परिचय दिया। उनकी क्षमताओं से घबराई ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने तक से रोक दिया। जब भारत को कुछ अधिकार दिए जाने की बात सामने आई तो उसके लिए साइमन की अध्यक्षता में एक आयोग बनाया गया। यूसुफ इस आयोग के एकमात्र भारतीय सदस्य थे। दिसंबर 1927 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने साइमन कमीशन के बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किया। 3 फरवरी, 1928 की रात में बंबई के मोल बंदरगाह पर पानी के जहाज से साइमन कमीशन के सदस्य उतरे। तभी समाजवादी नौजवान यूसुफ मेहर अली ने नारा लगाया साइमन गो बैक का नारा दिया। इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठी बरसाईं।
लाहौर जेल में अपने कार्यकाल के दौरान था कि वह 1942 में बॉम्बे के मेयर चुने गए थे । स्वतंत्रता के लिए भारत के अंतिम राष्ट्रव्यापी अभियान के लिए उन्होंने ‘भारत छोड़ो’ नारा दिया था । भारत छोड़ो आंदोलन’ देश का सबसे बड़ा आंदोलन था जिसकी वजह से अंग्रेज भारत छोड़ने पर मजबूर हो गए थे। यह आंदोलन ऐसे समय प्रारंभ किया गया जब दुनिया काफी बदलावों के दौर से गुजर रही थी। यही नहीं उन्होंने मजदूर व किसानों के संगठनों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद श्नमक आंदोलनश् (दांडी सत्याग्रह) शुरू हुआ, जिसमें युसूफ बड़ी जोश ख़रोश के साथ कूद पड़े। इस आन्दोलन में कई कांग्रेस नेताओं को जेल हो चुकी थी, लेकिन युसूफ ने लगातार तब तक इस आंदोलन को जारी रखा, जब तक की वह जेल नहीं चले गए। फिर 1930 में इनको गिरफ्तार किया गया और 4 माह की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।

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