मन से मजबूत राजस्थान मैराथन से गूंजा धौलपुर, जिला कलक्टर व एसपी ने मैराथन में लिया हिस्सा, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का दिया संदेश

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धौलपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तत्वावधान और आईएमए एवं रोटरी क्लब के सहयोग से रविवार प्रातः मन से मजबूत राजस्थान मैराथन एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। नगर परिषद कार्यालय से प्रारंभ हुई मैराथन मचकुंड पहुंची। मैराथन में चिकित्सकों, विद्यार्थियों, युवाओं एवं शहरवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दिया। कार्यक्रम में जिला कलक्टर श्रीनिधि बी टी एवं पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने स्वयं मैराथन में सहभागिता कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य हम सबकी जिम्मेदारी तथा नशामुक्त एवं स्वस्थ समाज का संदेश दिया। इस दौरान जिला कलक्टर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व दिया जाना चाहिए। युवाओं एवं विद्यार्थियों को तनाव और समस्याओं को छिपाने के बजाय परिवार, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति से खुलकर संवाद करना चाहिए। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहकर स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाते हुए रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने का आह्वान किया। पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने कहा कि नशे की लत व्यक्ति के साथ-साथ उसके परिवार और समाज को भी प्रभावित करती है। युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रहकर खेल, शिक्षा एवं रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानी होने पर सहायता मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि समय रहते स्वयं की देखभाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धर्मसिंह मीणा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तनाव, अवसाद अथवा मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। परिवार, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी और समाज के अन्य जिम्मेदार लोग संवेदनशीलता के साथ सहयोग करें और जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ें। मैराथन के समापन अवसर पर जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुमित मित्तल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा केवल मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे गेटकीपर्स तैयार करने की आवश्यकता है, जो मानसिक तनाव, निराशा अथवा आत्महत्या से जुड़े चेतावनी संकेतों को समय रहते पहचान सकें, संबंधित व्यक्ति की बात संवेदनशीलता से सुनें और आवश्यकता पड़ने पर उसे विशेषज्ञ सहायता से जोड़ सकें। उन्होंने विद्यार्थियों में परीक्षा तनाव को देखते हुए सकारात्मक पालन-पोषण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों पर अनावश्यक अपेक्षाओं एवं तुलना का दबाव बनाने के बजाय उनसे संवाद करना चाहिए तथा उनके प्रयासों को प्रोत्साहित करना चाहिए। डॉ. मित्तल ने बच्चों एवं युवाओं में बढ़ते डिजिटल स्क्रीन टाइम के संदर्भ में संतुलित स्क्रीन उपयोग, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय और सामाजिक जुड़ाव को मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान रोटरी क्लब धौलपुर के अध्यक्ष डॉ. बी.एम. मंगल तथा आईएमए अध्यक्ष डॉ. निखिल अग्रवाल ने भी मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, नशामुक्ति एवं आत्महत्या रोकथाम के प्रति समाज की भूमिका पर जोर दिया। मैराथन में आईएमए से डॉ. रामावतार अग्रवाल, डॉ. महेश अग्रवाल, डॉ. बी.डी. जिंदल, डॉ. आर.बी.एस. गुर्जर, डॉ. अनिल बंसल, डॉ. चित्रा बंसल एवं डॉ. रविन्द्र मंगल सहित सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, विद्यार्थी, युवा एवं शहरवासी उपस्थित रहे।

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