यूक्रेन से कब्जाए इलाकों में भी रूस ने कराया संसदीय चुनाव, कीव ने बताया ‘अवैध’

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मॉस्को. रूस में जारी स्टेट ड्यूमा (संसद का निचला सदन) के चुनावों को लेकर वैश्विक स्तर पर बड़ा कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। रूस के पूर्ण पैमाने पर किए गए आक्रमण के चार से ज्यादा सालों बाद यह पहला मौका है जब मॉस्को ने यूक्रेन से अवैध रूप से कब्जाए गए चार क्षेत्रों—डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिजिया में संसदीय चुनाव कराए हैं। रूस के इस कदम को जहां क्रेमलिन अपने क्षेत्रीय दावों को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देख रहा है, वहीं यूक्रेन और यूरोपीय संघ (EU) ने इन चुनावों को पूरी तरह से अवैध और अंतर्राष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन करार दिया है।

बंदूक के साये में वोटिंग कराने का आरोप
यूक्रेनी मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने कब्जे वाले इलाकों में हो रहे मतदान की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। डोनेट्स्क रीजन के एक पोलिंग स्टेशन पर सशस्त्र रूसी सैनिकों की मौजूदगी के बीच लोगों को मतपत्र डालते देखा गया। ‘डोनबास एसओएस’ (Donbas SOS) की समन्वयक वायलेट आर्टमचुक के अनुसार, स्थानीय चुनाव आयोग के सदस्य रूसी सैनिकों और सुरक्षा बलों के साथ घर-घर जाकर लोगों को जबरन वोट डालने पर मजबूर कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पब्लिक सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों, बुजुर्गों और विकलांग लोगों को चेतावनी दी जा रही है कि अगर वे वोट नहीं देंगे तो उनकी पेंशन, सामाजिक सहायता और मानवीय मदद बंद कर दी जाएगी। यूक्रेनी राजनीतिक विश्लेषक वलोडिमिर फेसेंको ने इस प्रक्रिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “बंदूक की नोक पर कराए जाने वाले चुनाव एक तमाशा हैं। लगातार हो रही गोलाबारी के बीच वोटिंग कराना यह दर्शाता है कि क्रेमलिन के लिए लोकतंत्र का कोई मतलब नहीं है।”

पुतिन ने बताया ‘एकजुटता का प्रतीक’
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने संबोधन में इन तथाकथित ‘नए क्षेत्रों’ में स्टेट ड्यूमा के लिए हो रही वोटिंग को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि रूसी सेना के साथ-साथ इन इलाकों के नागरिक “रूस के साथ दोबारा मिलने के बाद पहली बार” संसदीय चुनाव में भाग ले रहे हैं, जो देश की अटूट एकता और ऐतिहासिक स्मृति का प्रमाण है। इसके उलट, यूक्रेन सरकार और नौ मानवाधिकार संगठनों के गठबंधन ने कब्जे वाले इलाकों के नागरिकों से अपनी सुरक्षा के लिए मतदान केंद्रों से दूर रहने की अपील की है। कीव ने चेतावनी दी है कि कब्जाए गए क्षेत्रों में चुनाव के आयोजन या प्रबंधन में सहयोग करने वाले लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले चलाए जाएंगे।
यूक्रेन ने दुनिया भर के देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अनुरोध किया है कि वे इस अवैध चुनाव प्रक्रिया या इसके परिणामों को किसी भी सूरत में मान्यता न दें।

यूरोपीय संघ बोला: ‘हम कभी स्वीकार नहीं करेंगे’
यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता क्रिश्चियन विगैंड ने रूसी चुनावों को ‘फर्जी’ करार देते हुए कहा कि यूरोपीय संघ यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूर्ण समर्थन करता है। उन्होंने साफ किया कि यूरोपीय संघ इन कब्जे वाले क्षेत्रों में कराए जा रहे किसी भी चुनाव या उसके जरिए सामने आने वाले नतीजों को न तो कभी मान्यता देगा और न ही उन्हें वैध मानेगा।

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