युवाओं के दिलों की धड़कन हैं राहुल गांधी, जेन-ज़ी की ताकत के आगे झुकी अहंकारी सत्ता: टीकाराम जूली

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जयपुर में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सोशल मीडिया एवं डिजिटल मंच विभाग द्वारा आयोजित “बदलाव के लिए जेन-ज़ी” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल गांधी वर्षों से युवाओं, छात्रों और आम जन के अधिकारों के लिए सड़क से संसद तक लगातार संघर्षरत रहे हैं और आज देश के युवाओं की आवाज और उनके दिलों की धड़कन बन चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता और युवाओं के जुड़ाव को देखकर अब सत्ता पक्ष भी केवल राजनीतिक विवशता में ‘जेन-ज़ी’ से संपर्क साधने का ढोंग कर रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने युवाओं की एकजुटता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि ‘जेन-ज़ी’ की आवाज में वह शक्ति है जिसने अहंकारी सत्ताओं को झुकने पर मजबूर कर दिया है। ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी देश में कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्रांति लेकर आए थे, तब भारतीय जनता पार्टी ने इसका विरोध किया था। हालांकि, समय ने साबित किया कि राजीव गांधी के उसी दूरदर्शी कदम ने देश में करोड़ों युवाओं के लिए रोजगार और प्रगति के नए आयाम स्थापित किए। टीकाराम जूली ने कहा कि वर्तमान दौर ‘जेन-ज़ी’ का है और आज दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के रूप में एक बड़े तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। युवाओं को AI से घबराने के बजाय इसकी अपार संभावनाओं को समझना होगा और इस तकनीक को अपने करियर व रोजगार के पक्ष में इस्तेमाल करना होगा। आने वाले समय में वही युवा अवसरों की दौड़ में आगे रहेंगे जो तकनीक को समय रहते आत्मसात करेंगे। कोचिंग तंत्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर पड़ने वाले दबाव पर चिंता जताते हुए जूली ने कहा कि देश भर से आने वाले लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपने परिवारों की गाढ़ी कमाई खर्च कर देते हैं। सीमित सीटों के कारण चयन न होने पर युवा और उनके परिवार गंभीर आर्थिक एवं मानसिक तनाव में आ जाते हैं, जिस पर ठोस नीतिगत कदम उठाए जाने की जरूरत है। इसके साथ ही, उन्होंने महंगाई, एथेनॉल मिश्रण नीतियों में विरोधाभास और चीनी के बढ़ते दामों का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। जूली ने कहा कि जो लोग कभी रुपये को डॉलर के बराबर लाने और महंगाई खत्म करने के बड़े-बड़े दावे करते थे, आज वे अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक मोर्चों पर पूरी तरह सरेंडर कर चुके हैं।

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