प्रधानमंत्री मोदी ने शेयर किया सुभाषित, लिखा- सूर्य और प्रकाश एक-दूसरे पर पूर्णत: आश्रित हैं

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मंगलवार को सुभाषित शेयर किया। प्रधानमंत्री ने सुभाषित शेयर करते हुए श्लोक लिखा, “प्रभया हि विना यद्वद् भानुरेष न विद्यते। प्रभा च भानुना तेन सुतरां तदुपाश्रया॥” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि जिस प्रकार सूर्य अपनी प्रकाश के बिना दृष्टिगोचर नहीं होता, उसी प्रकार प्रकाश की सूर्य के बिना अस्तित्व में नहीं रह सकता। इस प्रकार सूर्य और प्रकाश का संपूर्ण अस्तित्व एवं शक्ति एक-दूसरे पर पूर्णत: आश्रित हैं। बीते दिन सोमवार को प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर सुभाषित शेयर करते हुए लिखा था, “जब चौतरफा विकास के साथ हर देशवासी के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित होता है, तब राष्ट्र की प्रगति को भी नई गति मिलती है। इसी प्रेरक भावना के साथ हम भारत के सामर्थ्य को निरंतर मजबूती देने में जुटे हुए हैं।” पीएम मोदी ने एक श्लोक “कन्यानां सम्प्रदानञ्च कुमाराणाञ्च रक्षणम्। राष्ट्रस्य सङ्ग्रहे नित्यं विधानमिदमाचरेत्॥” भी शेयर किया था। इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि कन्याओं के हितों की समुचित व्यवस्था करना, नई पीढ़ी के संरक्षण एवं विकास को सुनिश्चित करना तथा राष्ट्र की एकता, सुरक्षा, समृद्धि और सुव्यवस्थित संचालन के लिए निरंतर आवश्यक प्रबंधन करना, ये प्रत्येक जनप्रतिनिधि के नित्य कर्तव्य हैं। प्रधानमंत्री ने 9 जुलाई को सोशल मीडिया पर सुभाषित शेयर करते हुए लिखा था, “दृढ़ विश्वास, सतत प्रयास और सकारात्मक सोच सफलता की असली कुंजी है। हमारे युवा साथी इन्हीं गुणों के साथ पूरे समर्पण भाव से विकसित भारत के निर्माण में जुटे हैं।” उन्होंने संस्कृत श्लोक “अनिर्वेदः श्रियो मूलमनिर्वेदः परं सुखम्। अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः॥” भी शेयर किया था। इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि उन्नति का मूल आधार उत्साह, दृढ़ विश्वास और निरंतर पुरुषार्थ है। जो व्यक्ति निराश हुए बिना अपने लक्ष्य की ओर सतत प्रयासरत रहता है, वह अंततः सफलता प्राप्त कर लेता है। अतः मनुष्य को दृढ़ विश्वास के साथ निरंतर कर्म करते रहना चाहिए, क्योंकि यही गुण उसके जीवन को प्रगति, सफलता और उत्कृष्टता की ओर अग्रसर करते हैं।”

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