बाल मुकुन्द ओझा
सेहत व जिंदगी के लिए जरूरी स्वच्छ वातावरण अब ख्वाब बनकर रह गया है। हर सांस के साथ धुआं रूपी जहर शरीर के अंदर पहुंच रहा है। सड़कों पर बढ़ती वाहनों की संख्या और इससे पैदा होने वाला प्रदूषण देश और दुनिया के लिए खतरा है। हमारे देश में जब वाहनों की संख्या सीमित थी तब आबोहवा भी साफ और सुरक्षित थी। घर घर और गली गली में पेड़ लगे थे जो किसी भी धुएं के जहर का सामना करने में सक्षम थे। साईकिल का स्थान जब दो और चार पहिये ने ले लिया और जनसंख्या विस्फोट ने शहरीकरण को बढ़ावा दिया तब लोगों ने अपनी बढ़ती जरूरतों के मद्देनजर पेड़ों को काटना शुरू कर दिया। यहीं से वाहनों के धुंवे ने जनजीवन को लीलना शुरू कर दिया। सड़कों पर दौड़ रहे पुराने व कंडम वाहनों से निकलने वाले धुएं से शहर की हवा तेजी से जहरीली हो रही है।
सड़कों पर बढ़ती वाहनों की संख्या और इससे पैदा होने वाला धुआं पूरी दुनिया के लिए खतरा बन गया है। वाहनों से निकलने वाला धुआं न केवल जानलेवा है अपितु विभिन्न बीमारियों का कारक भी है। यह धुआं हवा को दूषित कर रहा है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के विशेषज्ञों का कहना है कि डीजल के वाहनों से निकलने वाले धुएं से कैंसर होता है। खदानों और रेलवे में काम करने वालों व ट्रक ड्राइवरों पर शोध के आधार पर इन विशेषज्ञों ने पाया कि यह धुआं यकीनी तौर पर फेफड़े को कैंसर देता है। चौराहों पर लगातार वाहनों की लाइनें लगने और उनके स्टार्ट रहने से फैलने वाला धुआं लोगों को दिक्कतें दे रहा है। देखा गया है सम्पूर्ण देश में वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। इससे वाहनों से निकलने वाला धुआं हवा को जहरीला बना रहा है। इससे आम लोगों के स्वास्थ्य को खतरा है। इसके साथ ही शहर के चौराहों और शहर के व्यस्ततम मार्ग पर लगने वाला जाम भी वायु प्रदूषण को बढ़ा रहा है।
एक सर्वे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में वायु प्रदूषण से होने वाली करीब दो-तिहाई मौतें डीजल वाहनों के धुएं से हो सकती हैं। हमारे देश में शहरों के साथ ग्रामीण अंचलों में भी वाहनों के धुंवे से हवा जहरीली होती जा रही है। हमारे वातावरण में कई गैसें एक आनुपातिक संतुलन में होती हैं। इनमें ऑक्सीजन के साथ कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड आदि शामिल हैं। इनकी मात्रा में थोड़ा भी हेरफेर से संतुलन बिगड़ने लगता है और हवा प्रदूषित होने लगती है। मानवजनित गतिविधियों के चलते वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड और मीथेन जैसी गैसों की मात्रा बढ़ने लगी है। बड़ी संख्या में वाहनों का धुआं इस संतुलन को और बिगाड़ देता है।
एक रिसर्च के अनुसार वाहनों से निकलने वाले धुएं में जो नैनोपार्टिकल्स होते हैं वो आपकी ब्लड स्ट्रीम यानी खून की धारा में भी शामिल हो सकते हैं और वहां से आपके दिल में पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक प्रदूषण के ये कण दिल में खून पंप करने वाली आर्टरीज में धीरे-धीरे जमा होने लगते हैं। अगर लंबे समय तक धूल और धुएं के कणों से सामना होता रहे तो आर्टरीज में एक तरह की परत जमा हो जाती है। इससे शरीर की धमनियां सिकुड़ जाती हैं और हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा पैदा हो जाता है। आज भी हम इस चलती फिरती मौत से जाने अनजाने में बेफिक्र हो रहे है और अपने वाहनों की भली भांति सार संभाल में उदासीनता बरतते है और यही कारण है की धुंवा जनित बीमारियों के गाहे बगाहे शिकार हो जाते है। देश की सड़कों पर हर साल वाहनों की बढ़ती संख्या भी प्रदूषण के बढ़ते स्तर के लिए जिम्मेदार है। डीजल वाहनों से निकलने वाले धुंवे का प्रदूषण फैलाने में योगदान कम नहीं होता। प्रदूषण जाँच की गाड़ियां आजकल स्थान स्थान पर खड़ी मिलती है मगर हम इस भागदौड़ भरी लाइफ स्टाइल में पांच मिनिट का समय भी नहीं निकालते। हमारी यही लापरवाही हमारे स्वास्थ्य को धीमें जहर से मौत के मुंह की और खींचती रहती है। वैसे तो आज पूरी दुनिया वायु प्रदूषण का शिकार हो रही है, लेकिन भारत के लिए यह समस्या कुछ ज्यादा ही घातक होती जा रही है। देश में लाखों वाहन ऐसे है जो वर्षों पुराने होकर खटारा हो गये हैं। ऐसे वाहन आपको हर शहर में खतरनाक धुंवा छोड़ते मिल जायेंगे। ये वाहन पर्यावरण को प्रदूषित करने के साथ प्रदूषण भी फैला रहे हैं। जिससे लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यदि प्रदूषित धुंवा फैलाने वाले वाहनों की सख्ती से रोकथाम की जाये तो पर्यावरण में सुधार होने के साथ जनजीवन को भी बड़ी क्षति से बचाया जा सकता है।

स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक हैं वाहनों से निकलने वाला धुआं
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