सालाना तीस लाख जिंदगियां निगल रही है शराब

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बाल मुकुन्द ओझा
शराब सेहत के लिए हानिकारक है। लोगों को लगता है कि इससे सिर्फ लिवर खराब होता है। लिवर के लिए शराब सबसे घातक होती है, लेकिन इसका असर आपके दिल और दिमाग पर भी पड़ता है। शराब पीने से हार्ट डिजीज का खतरा काफी बढ़ जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो मस्तिष्क भी शराब से होने वाले नुकसान के प्रति उतना ही संवेदनशील होता है, जितना लिवर और दिल होते हैं। यहां तक ​​कि कम मात्रा में शराब भी दिमाग की गतिविधि और सूचना को ग्रहण करने और याद रखने की क्षमता को प्रभावित करती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शराब को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस संबंध में संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि शराब की वजह से हर साल करीब 30 लाख लोगों की मौत होती है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में मृत्यु दर में थोड़ी कमी आई है। इस नए रिपोर्ट को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि आंकड़ें भले ही कम हो रहे हों लेकिन यह अभी भी ‘अस्वीकार्य रूप से उच्च’ बनी हुई है। शराब और स्वास्थ्य पर पेश इस नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि शराब से सेवन से हर साल दुनिया भर में 20 में से लगभग एक मौत शराब पीने के कारण होती है। शराब पी के गाड़ी चलाने, शराब के कारण होने वाली हिंसा और दुर्व्यवहार और कई तरह की बीमारियों और विकारों के कारण यह मौत होती है। शराब का नशा कम समय में बहुत अधिक शराब पीने से जुड़ी एक स्थिति है। इसे शराब पॉयसन भी कहा जाता है। शराब का नशा गंभीर है यह आपके शरीर के तापमान, श्वास, हृदय गति और गैग रिफ्लेक्स को प्रभावित करता है। यह कभी-कभी कोमा या मृत्यु का कारण भी बन सकता है। शराब का नशा कम समय में जल्दी हो सकता है। जब कोई व्यक्ति शराब का सेवन कर रहा होता है, तो अलग-अलग लक्षण दिखाई दे सकता हैं। ये लक्षण नशे के विभिन्न स्तरों, या चरणों से जुड़े होते हैं।
नशाखोरी इस सदी की सबसे बड़ी समस्या है जिसमें शराब का नशा प्रमुख है। आज युवा वर्ग शराब के नशे में खोता जा रहा है। युवाओं में तेजी से बढ़ रही शराब की लत को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ समय-समय सचेत करते रहते हैं। शराब का सेवन शरीर को गंभीर क्षति पहुंचा सकता है। युवाओं के बीच शराब का सेवन एक चलन सा चल पड़ा है। शराब एक नशीला पदार्थ है, जिसको एक प्रकार का अवसाद भी माना जाता है। शराब जैसे तन मन और परिवार को खोखला करने वाली की लत उन्हें बर्बाद कर रही है। शुरू में युवा शौक के तौर पर शराब का सेवन करता है और बाद में नशे की मांग पूरी करने के लिए तस्करी और गैर सामाजिक कार्य के कारोबार में फंस जाता है। देश में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के 31.2 फीसदी लोग शराब का सेवन करते हैं। इनमें से 3.8 फीसदी वो लोग भी हैं जो इसकी लत का बुरी तरह शिकार हैं और आए दिन बड़ी मात्रा में शराब पीते हैं, जबकि 12.3 फीसदी वो हैं जो कभी-कभार काफी ज्यादा शराब पीते हैं।
एक सर्वे के मुताबिक भारत में गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लगभग 37 प्रतिशत लोग नशे का सेवन करते हैं। इनमें ऐसे लोग भी शामिल है जिनके घरों में दो जून रोटी भी सुलभ नहीं है। जिन परिवारों के पास रोटी-कपड़ा और मकान की सुविधा उपलब्ध नहीं है तथा सुबह-शाम के खाने के लाले पड़े हुए हैं उनके मुखिया मजदूरी के रूप में जो कमा कर लाते हैं वे शराब पर फूंक डालते हैं। इन लोगों को अपने परिवार की चिन्ता नहीं है कि उनके पेट खाली हैं और बच्चे भूख से तड़फ रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। ये लोग कहते हैं वे गम को भुलाने के लिए नशे का सेवन करते हैं। उनका यह तर्क कितना बेमानी है जब यह देखा जाता है कि उनका परिवार भूखे ही सो रहा है। युवाओं में नशा करने की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते शहरी और ग्रामीण अंचल में आपराधिक वारदातों में काफी इजाफा हो रहा है। शराब के साथ नशे की दवाओं का उपयोग कर युवा वर्ग आपराधिक वारदातों को सहजता के साथ अंजाम देने लगे हैं। हिंसा ,बलात्कार, चोरी ,आत्महत्या आदि अनेक अपराधों के पीछे नशा एक बहुत बड़ी वजह है । शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए एक्सीडेंट करना, शादीशुदा व्यक्तियों द्वारा नशे में अपनी पत्नी से मारपीट करना आम बात है ।

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