जयपुर। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव तथा वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने रविवार को अलवर जिले में सरिस्का टाइगर पुनर्स्थापना के 18 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर एनटीसीए द्वारा अलवर में ‘बाघ पुनर्स्थापना: अवसर एवं चुनौतियां‘ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने तीन प्रकाशनों यथा भारत में बाघों के सक्रिय प्रबंधन हेतु रोडमैप, भारत में बाघ पुनर्स्थापना एवं पुर्नबहाली पर पुस्तिका तथा प्रोजेक्ट चीता वार्षिक प्रतिवेदन का विमोचन किया तथा सरिस्का क्षेत्र की प्रभावी मॉनिटरिंग हेतु दो वाहन सौंपे। केंद्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजनरी लीडरशिप में टाइगर कंजर्वेशन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत विश्व के लगभग 70 प्रतिशत बाघों का संरक्षण कर रहा है। उन्होंने सरिस्का टाइगर पुनर्स्थापना के सफलतम 18 वर्ष पूर्ण होने पर वन विभाग के कार्मिकों एवं अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रभावी मॉनिटरिंग एवं कड़ी मेहनत के बदौलत आज सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 56 तक पहुंची है, उम्मीद जताई की बाघों की यह संख्या जल्द 100 तक पहुंचेगी। उन्होनें कहा कि वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण के लिए समाज और प्रकृति के सहअस्तित्व के साथ स्थानीय समुदायों के बेहतरीन पारंपरिक अभ्यासों का प्रयोग किया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में टाइगर रिजर्व के साथ वहां निवासरत समुदायों यथा बांदीपुर में सोरेका समुदाय, राजाजी में गुर्जर व बकरवाल समुदाय, सिमलीपाल में संथाल समुदाय इत्यादि के सहअस्तित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों के सहयोग से पन्ना व सरिस्का में टाइगर पुनर्स्थापना तथा कूनों में चिता पुनर्स्थापना का कार्य सफलता से संभव हुआ। केंद्रीय मंत्री यादव ने कहा बाघों के संरक्षण के लिए नेचुरल हैबिटेट प्रोटेक्शन, प्रबंधन, मॉनिटरिंग एवं कम्युनिटी ऑरेंटेड इंटरवेंशन पर फोकस कर आगे बढाया जाए तथा नॉलेज बेस संस्थानों का नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें। उन्होंने कहा कि पर्यटन एवं लोगों को नेचर के साथ जोड़ने के लिए बाघ अभ्यारण के प्रवेश द्वारों पर रिजर्वस से निकलने वाली नदियों का संपूर्ण विवरण, पक्षियों एवं वन्य जीवों का विवरण, स्थानीय ट्राइबल की अच्छी प्रैक्टिस इत्यादि को दर्शाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा प्रोजेक्ट संचालित किए गए, जिनमें प्रोजेक्ट चीता, डाल्फिन, घड़ियाल, एलिफेंट, ग्रेड इंडियन बस्टर्ड इत्यादि महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रकृति एवं टाइगर संरक्षण के क्षेत्र में कैलाश सांखला सहित अन्य वन्यजीव प्रेमियों द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाघों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ मानवीय मूल्यों को समाहित कर कार्य किया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री यादव ने कहा कि टाइगर व अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए जन सहयोग के साथ स्थानीय प्रशासन के विभिन्न विभागों को साथ लेकर कार्य किया जा रहा है। इसी दिशा में जन सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की टाइगर मैराथन का आयोजन किया गया, जिसमें 32 से अधिक देशों एवं 25 हजार से अधिक लोगों ने भाग लेकर अलवर के पर्यटन को विश्व पटल पर प्रमोट करने में महती भूमिका निभाई। साथ ही सरिस्का क्षेत्र की पहचान को नए आयाम देने के उद्देश्य से स्थानीय बच्चों की पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें लगभग 5 हजार से अधिक बच्चों ने भाग लेकर सरिस्का की पहचान से जुड़ी कलात्मक पेंटिंग बनाई। उन्होंने कहा कि सरिस्का टाइगर रिजर्व की सफलता की कहानी को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए आगामी टाइगर मैराथन के साथ सरिस्का से जुडे 10 स्थानों पर फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरिस्का क्षेत्र की स्थानीय महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राजीविका के माध्यम से कौशल विकास प्रशिक्षण एवं सीएलएफ भवन का निर्माण किया जा रहा है। क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का कार्य भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अलवर के प्रकृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें सिलीसेढ झील को रामसर साइट का दर्जा दिलाया गया तथा मंगलासर एवं मानसरोवर बांध को रामसर साइट का दर्जा दिलाने का कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अलवर को हरियाला अलवर बनाने के लिए चारों तरफ पहाड़ियों पर एक करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘एक पेड़ मां के नाम अभियान‘ के तहत अधिकाधिक पौधारोपण करने की अपील भी की। वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने बाबा भर्तृहरि की तपोस्थली पर आगन्तुकों का स्वागत एवं अभिनन्दन करते हुए कहा कि वन विभाग के अधिकारियों एवं कार्मिकों की कुशल मॉनिटरिंग एवं निरन्तर प्रयत्न का परिणाम है कि बाघ विहिन हुआ सरिस्का 56 बाघों की संख्या के आबाद है। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा 28 जून 2008 के सफल पुनर्स्थापन की महत्वता के दृष्टिगत गत वर्ष 28 जून को बाघिन राजमाता की स्मृति में सरिस्का डे के रूप में मनाया गया है तथा सरिस्का में बाघिन राजमाता की प्रतिमा स्थापित की गई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार वन्य क्षेत्र, वन्यजीव एवं स्थानीय ग्रामवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि बाघों का संरक्षण स्थानीय लोगों के सहयोग से ही संभव है। इसके लिए ग्रामवासियों के रोजगार को बढ़ावा देने हेतु संभाग स्तर पर वन्य उत्पादों की बिक्री के लिए वन मेलों का आयोजन किया गया। वन मेलों की सफलता को देखते हुए आगामी इनका आयोजन जिला स्तर पर भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों से ग्रामवासियों के विस्थापन के लिए राज्य सरकार द्वारा बेहतर पेकेज घोषित किया गया है। साथ ही, नवाचार के रूप में रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में उद्यमियों के साथ सीएसआर कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया है, जिसका उद्देश्य विस्थापन पैकेज के साथ विस्थापित होने वाले ग्रामीणों को चिन्हित जगह पर टाउनशिप के रूप में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि सीएसआर फण्ड से वन चौकियों का जीर्णोद्धार कर कार्मिकों व अधिकारियों के लिए मूलभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरिस्का क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक किलों, प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार कर पर्यटन को बढ़ावा देने का कार्य किया जाएगा। साथ ही, प्रकृति संरक्षण से बच्चों को जोड़ने के लिए राज्य के टाइगर रिजर्व में भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यशाला के दौरान केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के महानिदेशक एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी ने की-नोट उद्बोधन के दौरान सरिस्का टाइगर रिजर्व पुनर्स्थापन की सफलता को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि एनटीसीए एवं राज्य के वन विभाग के विशेष प्रयासों व सक्रिय प्रबंधन के माध्यम से पुनर्स्थापन कार्य एवं बाघों की संख्या 56 तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान में 58 टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें अनुमानित 3 हजार 682 बाघ पाए जाते हैं। पिछले एक दशक में टाइगर रिजर्व की संख्या 46 से बढ़कर 58 हो गई है तथा इनके अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र का विस्तार बढ़कर लगभग 84 हजार 450 वर्ग किलोमीटर हो गया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव के दिशा-निर्देशानुसार टाइगर संरक्षण के लिए विज्ञान आधारित कार्य योजना, हैबिटेट रेस्टोरेशन एवं कॉरिडोर कनेक्टिविटी इत्यादि के माध्यम से कार्य किए जा रहे हैं। इंटरनेशनल बिग केट एलायंस के महानिदेशक डॉ. एस.पी यादव ने क्षमता संवर्धन के साथ बाघ पुनर्स्थापन एवं विस्थापन के संबंध में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने सफल टाइगर पुनर्स्थापन के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग के साथ-साथ साइंटिफिक हैण्ड होल्डिंग को आवश्यक बताया।
तीन प्रकाशनों का हुआ विमोचन, सरिस्का क्षेत्र की प्रभावी मॉनिटरिंग हेतु सौंपे दो वाहन
केंद्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव एवं वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने भारत में बाघों के सक्रिय प्रबंधन हेतु रोडमैप, भारत में बाघ पुनर्स्थापन एवं पुनर्बहाली पर पुस्तिका एवं प्रोजेक्ट चीता वार्षिक प्रतिवेदन का विमोचन किया। साथ ही सरिस्का क्षेत्र की प्रभावी मॉनिटरिंग हेतु दो वाहन सौंपे। इस दौरान प्रसिद्ध फोटोग्राफर नल्लामुत्थु द्वारा विश्व पटल पर सरिस्का की पहचान को उजागर करने के लिए बनाई जा रही डॉक्यूमेंट्री की परिचयात्मक झलक दिखाई गई। कार्यशाला में बाघ पुनर्स्थापन, बाघ-विहीन अथवा कम बाघ घनत्व वाले टाइगर रिजर्वों की पुनर्बहाली तथा बाघों के सक्रिय प्रबंधन पर विचार-विमर्श किया गया। तकनीकी सत्र में राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, मिजोरम, कर्नाटक एवं तेलंगाना राज्यों द्वारा बाघ पुनर्स्थापन से संबंधित अनुभव, चुनौतियाँ एवं भावी रणनीतियाँ प्रस्तुत की गईं। मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम पर विशेष प्रस्तुति दी गई तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा गौर एवं बारहसिंगा पुनर्स्थापन के माध्यम से शिकार आधार सुदृढ़ीकरण के महत्व पर प्रकाश डाला गया। कार्यशाला के समापन सत्र में विभिन्न राज्यों द्वारा प्रस्तुत सुझावों एवं अनुभवों के आधार पर बाघ-विहीन अथवा बाघ संख्या में कमी वाले संरक्षित क्षेत्रों में सक्रिय प्रबंधन एवं बाघ पुनर्स्थापन के लिए भावी कार्ययोजना एवं अनुशंसाओं पर चर्चा की गई। मंच संचालन लक्ष्मीनारायण गुप्ता ने किया। कार्यशाला में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के महानिदेशक एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी, भारतीय वन्यजीव संस्थान एवं आईबीसीए के महानिदेशक डॉ. एस.पी यादव, प्रोजेक्ट टाइगर एडीजी एवं एनटीसीए के सदस्य सचिव संजय कुमार, पीसीसीएफ राजस्थान अरजीत बनर्जी, एनटीसीए आईजी संजयन कुमार, डब्ल्यूआईआई के निदेशक गोविन्द सागर भारद्वाज, एडीजी रमेश पाण्डे, पी.के उपाध्याय, सीसीएफ सरिस्का संग्राम सिंह, डीएफओ अलवर राजेन्द्र हुड्डा, डीएफओ सरिस्का अभिमन्यु सहारण, प्रसिद्ध फोटोग्राफर नल्लामुत्थु, सरस डेयरी चेयरमैन नितिन सांगवान, जिला अध्यक्ष अशोक गुप्ता, लक्ष्मीनारायण गुप्ता सहित वरिष्ठ अधिकारी, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, क्षेत्र निदेशक, वैज्ञानिक एवं संरक्षण विशेषज्ञों ने भाग लिया।

वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण के लिए समाज और प्रकृति के सहअस्तित्व के साथ स्थानीय समुदायों की बेहतरीन प्रेक्टिस को अपनाएं : यादव
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