पर्यावरण के साथ सेहत भी संवारेंगे औषधीय पौधे

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-बाल मुकुन्द ओझा
देश में मानसून की बारिश शुरू हो चुकी है। मानसून अपने साथ अपार खुशियां लेकर आता है। लोगों को पीने के लिए जहाँ पानी मिलता है वहां किसान अपने खेतों में बुवाई शुरू कर देते है। इसी के साथ देशभर में पौधरोपण का कार्य भी शुरू हो जाता है। बरसात का मौसम पौधारोपण के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मिट्टी में नमी भरपूर होती है और पौधों को तेजी से बढ़ने के लिए आवश्यक पोषक तत्व स्वाभाविक रूप से मिल जाते हैं। इस मौसम में लगाए गए पौधे आसानी से जड़ पकड़ लेते हैं और कम देखभाल में भी अच्छी वृद्धि करते हैं। मॉनसून का मौसम औषधीय पौधों को उगाने के लिए सबसे बेहतरीन है। औषधीय गुणों के कारण हवा को शुद्ध कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है । हमारे बुजुर्ग कहते है हमें औषधीय पौधे अपने घरों पर लगाने चाहिए जो हमारे जीवन को नवजीवन प्रदान करेंगे। यह वह समय है जब हम पेड़ पौधे लगाकर देश को हराभरा बना सकते है। आयुर्वेद में बहुत से औषधीय पौधे और जड़ी-बूटियाँ शामिल हैं, जो हमारी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का प्रभावी ढंग से उपचार कर सकते हैं और हमारे समग्र स्वास्थ्य के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं। ये पौधे प्राचीन काल से ही विभिन्न औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाते रहे हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा में इन पौधों का उपयोग दवाई के रूप में किया जाता रहा है। बताया जाता है एक वृक्ष अपने पूरे जीवन में हर तरह से मनुष्य के काम आता है। भोजन प्रदान करने, छाँव देने, घर बनाने को लकड़ी देने से लेकर सांसे लेने के लिये जीवनदायिनी ऑक्सीजन भी देता है। पेड़ पौधों को लेकर कई प्रकार के शोध होते रहते है। हर शोध में पेड़ पौधों को जीवनदाई बताया जाता है। हाल ही एक शोध रिपोर्ट में बताया गया की पेड़ पौधे बेहद संवेदनशील होते है। शोर से पेड़ पौधे मुरझा जाते है और उनकी ग्रोथ पर बुरा असर पड़ता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक लोगों की आयुर्वेदिक पौधों में रूचि बढ़ रही है। मानसून के आते ही लोगों के समक्ष यह दुविधा बन जाती है की इस मानसून में कौन से पौधे लगाएं जो मानव जीवन के लिए हितकारी हो। औषधीय पौधें इम्युनिटी बढ़ाने के साथ हमें विभिन्न प्रकार के रोगों से घर बैठे बचाता है। हमारे बड़े बुजुर्ग आज भी हमें औषधीय पौधों की बात बताते है। बहुत से बड़े बुजुर्ग आज भी अंग्रेजी दवाओं का सेवन नहीं करते और अपने स्वास्थ्य के राज की बातें बताते नहीं थकते मगर अपनी भागदौड़ भरी लाइफ स्टाइल में स्वस्थ जीवन के मंत्र की बातें सुनना पसंद नहीं करते। फलस्वरूप विभिन्न शारीरिक रोगों को भोगते हुए जैसे तैसे अपने जीवन की गाड़ी को हांकते है। अपने घरों पर औषधीय पौधे लगाएं तो ये हमें प्राण वायु तो देते ही है साथ ही स्वस्थ जीवन की राह भी दिखाएंगे।
पेड़-पौधे हमारे शरीर में होने वाली विभिन्न बीमारियों से छुटकारा दिलाने के लिए हमें बहुत कुछ दे सकते हैं। प्राचीन काल में मानव ने तरह-तरह के पेड़-पौधों की खोज कर खुद को निरोगी रखा। मानव सभ्यता के विकास के साथ विज्ञान ने हमें नयी नयी ऊंचाइयों तक पहुँचाया, इसमें कोई दो राय नहीं है मगर औषधीय पौधों की महत्ता कभी कम नहीं हुई। भारत में औषधीय गुण वाले असंख्य पेड़-पौधे हैं। भारतीय पुराणों, उपनिषदों, रामायण एवं महाभारत जैसे प्रमाणिक ग्रंथों में इसके उपयोग के अनेक साक्ष्य मिलते हैं। रामायण में संजीवनी बूटी की चर्चा आज भी घर घर में सुनी जा सकती है। बहुत सारी अंग्रेजी दवाइयों में आज भी औषधीय पौधों का मिश्रण किया जाता है। सर्दी, जुकाम, बुखार, बीपी, शुगर, उलटी दस्त जैसी सामान्य बीमारियों से लेकर कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों का इलाज भी हमारे औषधीय पौधों में है। यदि इन पेड़ पौधों का हम उचित रखरखाव कर विभिन्न रोगों के इलाज में सही ढंग से उपयोग करें तो ये हमारे स्वस्थ जीवन के लिए बेहद लाभदायक हो सकते है।
औषधीय एवं सुरभित पौधे हमारी धरोहर हैं जिनका वैश्विक महत्व है। विश्व में असंख्य औषधीय एवं सुरभित पौधों की प्रजातियाँ हैं। उनमें से अनेक पौधों का उपयोग हम विभिन्न कारणों से करते हैं और अनेक हमसे अपरिचित हैं। हमारे विभिन्न ग्रंथों और प्राचीन पुस्तकों में हजारों ऐसे नुक्खे बताये गए है जो औषधीय पौधों से निकले है। हमारे देश में आज भी लाखों लोग इन नुक्खों का उपयोग करते है। नीम, तुलसी, बेंग साग, ब्राम्ही, हल्दी , चन्दन, चिरायता, अडूसारू , सदाबहार , गुलाब , सहिजन, हडजोरा, करीपत्ता, लहसून, एलोवीरा लेवेंडर, जीरा, पुदीना, गिलोय, सूरजमुखी,पीपल, आक, बरगद, आंवला, गूगल ,अदरख नीम्बू, पत्थरचूर, शतावर, अजवायन, चुकंदर ,चिरचिटी, कुल्थी, घृतकुमारी,करेला, पिपली, मेथी ,पुनर्नवा, मदन मस्त, पिपली, चंपा, रजनीगंधा, श्वेत अपराजिता, सर्पगन्धा, अशोक और वलाक आदि औषधीय पौधों में से बहुत से ऐसे भी है जो घरों में लगाए जा सकते है। इनमें बहुत सी प्रजातियां अब लुप्तप्राय है। आवश्यकता इस बात की है इन बहु गुणकारी औषधीय पौधों के विकास की योजनाएं बनाकर आम आदमी को इनके प्रयोग और उपयोग की जानकारी दी जाएं।

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