आईसीसी ने सभी टेस्ट में ‘पिंक बॉल’ के इस्तेमाल के ट्रायल को मंजूरी दी, ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान हेड कोच से सलाह-मशविरा की अनुमति

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अहमदाबाद। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने सभी टेस्ट मुकाबलों में ‘पिंक बॉल’ के इस्तेमाल के ट्रायल को मंजूरी दे दी है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जब मौसम खराब होने का खतरा हो, तो खराब रोशनी के कारण खेल पर कोई असर न पड़े। खेल लाइट्स में भी जारी रह सके। मैच अधिकारियों और स्टेडियम के लिए लाइटिंग टेक्नोलॉजी पर रिसर्च भी की जाएगी, ताकि खराब रोशनी के कारण खेल में होने वाली रुकावटों को कम किया जा सके। इस रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए आईसीसी, ‘मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब’ (एमसीसी) के साथ मिलकर आर्थिक मदद देगा। इस बैठक में मैच अधिकारियों को अवैध बॉलिंग एक्शन पर फैसला लेते समय ‘हॉक-आई’ डेटा का इस्तेमाल करने की अनुमति भी दी गई है। आईसीसी बोर्ड की बैठक में यह भी फैसला लिया गया है कि हेड कोच या उनके द्वारा नामित कोई प्रतिनिधि, तय ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान टीमों से सलाह-मशविरा कर सकेंगे। इसके अलावा, टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 15 मिनट का ब्रेक अनिवार्य कर दिया गया है। बल्लेबाजों के लिए खेल दोबारा शुरू होते ही खेलने के लिए तैयार रहना अनिवार्य होगा।
आईसीसी बोर्ड ने ‘चीफ एग्जीक्यूटिव्स कमेटी’ की कई सिफारिशों को मंजूरी दी है। इनमें टेस्ट मुकाबलों में गुलाबी गेंद के इस्तेमाल का ट्रायल शामिल है, जिसके लिए दोनों टीमों की पहले से सहमति जरूरी होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर खराब रोशनी की आशंका हो, तो भी खेल को अधिक से अधिक समय तक जारी रखा जा सके।
आईसीसी ने ‘लेगसाइड वाइड’ के ट्रायल को स्थायी रूप से लागू करने की भी मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, एमसीसी के ‘क्रिकेट के नियमों’ में किए गए शेष सभी बदलाव भी 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो जाएंगे।
‘आधिकारिक क्रिकेट के वर्गीकरण’ में भी कुछ बदलावों को मंजूरी दी गई है। इसके तहत, यह पुष्टि की गई है कि ‘सीडब्ल्यूसी चैलेंज लीग’ में हिस्सा लेने वाली टीमें, चैलेंज लीग के प्रत्येक टूर्नामेंट चक्र के दौरान ‘लिस्ट-ए’ श्रेणी के अन्य सीमित ओवरों वाले मैच खेलने के लिए भी पात्र बनी रहेंगी।

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