कंप्यूटर और लैपटॉप बना रहे हैं बीमार

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-बाल मुकुन्द ओझा
गलत आदते हमारे सेहत की दुश्मन बन गई है। हम एक्ससरसाइज से दूर हो रहे है और छोटे स्क्रीन से चिपके हुए है जिसका खामियाजा शरीर को उठाना पड़ रहा है। सुबह आँख खुलने से देर रत तक मोबाइल, लैपटॉप, ईयरफोन और स्क्रीन हमारे साथ चिपके रहते हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल दुनिया अब हर हाथ में है, लेकिन सुविधा जब जरूरत से ज्यादा हो जाए तो वही शरीर की तकलीफ बन जाती है। यानी जो टेक्नोलॉजी काम आसान करने आई थी। वही अब गर्दन झुका रही है, आंखें थका रही है, नींद उड़ा रही है और इंसान को वक्त से पहले बूढ़ा बना रही है। मोबाइल की छोटी स्क्रीन से शुरू हुई दिक्कत कलाई, अंगूठे, गर्दन, कंधे, कमर, आंख, कान और दिमाग तक पहुंच रही है। रिपोर्ट के मुताबिक लगातार टाइपिंग से कलाई में ‘कारपल टनल सिंड्रोम’, माउस पकड़े-पकड़े ‘माउस आर्म’ और ‘टेनिस एल्बो, फोन में गर्दन झुकाकर देखने से ‘टेक्स्ट नेक’,, लैपटॉप के आगे झुककर बैठने से ‘कंप्यूटर हंच’, लगातार स्क्रॉलिंग से ‘गेमर थंब’ और घंटों बैठे रहने से ‘डेड बट सिंड्रोम’होने लगा है। इतना ही नहीं स्क्रीन को देर तक देखने से ‘डिजिटल आई स्ट्रेन’, तेज आवाज में ईयरफोन लगाने से ‘रिंगिंग सिंड्रोम’, रात में मोबाइल चलाने से ‘स्लीप डिसऑर्डर’, फोन दूर होते ही बेचैनी यानी ‘नोमोफोबिया’और दिनभर बैठे-बैठे सुस्त जीवनशैली, ये सब मिलकर शरीर के पूरे सिस्टम को प्रभावित करते हैं। आज जरूरत टेक्नोलॉजी छोड़ने की नहीं, बल्कि उसके साथ जीने का सही तरीका सीखने की है। रोजाना थोड़ी देर योग करें, एक्सरसाइज करें ताकि हमारा माइंड हिट रहे और बॉडी फिट।
आज की भागदौड़ भरी लाइफ स्टाइल में शरीर और मन के बीच सामंजस्य स्थापित करना काफी कठिन हो आया है। शरीर को स्वस्थ और फिट रखने की कोशिशें एक बार फिर परवान पर है। हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज, अच्छी नींद आदि आदतें हम रोजाना के जीवन में अपनाएं। शारीरिक गतिविधियां फिट और हेल्दी रहने के लिए जरूरी है कि आप रोजाना फिजिकल एक्टिविटी के लिए समय निकालें और अपनी सेहत का ख्याल रखें। फिजिकल एक्टिविटी, जैसे कि एक्सरसाइज, योग और वॉक न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बल्कि हमारे मानसिक और समग्र स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है।
देश में 54 प्रतिशत लोगों की शारीरिक गतिविधियां करने में कोई रुचि नहीं है और 10 फीसदी से कम लोग मनोरंजन के तौर पर शारीरिक गतिविधियां करते हैं। आईसीएमआर डेटा में इस बात का खुलासा हुआ है। आजकल आर्थराइटिस जैसी जोड़ों की बीमारियां उम्र तक सीमित नहीं रह गई हैं बल्कि शारीरिक रूप से काम न करना भी इस बीमारी के बोझ को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के आंकड़ों बताते हैं कि 54.4 फीसदी लोगों की शारीरिक गतिविधियां करने में रुचि नहीं है। इस सरकारी एजेंसी द्वारा की गई स्टडी के अनुसार लोग यात्रा और मनोरंजन से जुड़ी शारीरिक गतिविधियों के मुकाबले काम में ज्यादा समय बिताते हैं। आलसी जीवनशैली, कसरत न करना या प्रोफेशनल की देखरेख के बिना कसरत करने से युवाओं के जोड़ों के लिगामेंट में दिक्कतें होने लगती हैं। चिकित्सकों का कहना है फिजिकली एक्टिव रहना, न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है बल्कि हमारे समग्र स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। नियमित फिजिकल एक्टिविटी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, तनाव को कम करने और जीवन को बेहतर बनाने में सहायक होती है। ऐसे में लोगों को अपनी पसंद के अनुसार फिजिकल एक्टिविटी में खुद को बिजी रखना चाहिए।
बदलती जीवनशैली के चलते दफ्तर में घंटों कंप्यूटर और लैपटॉप पर बैठे रहकर काम करने और फिर घर में निष्क्रिय जीवन जीने से हमारे शरीर में जंग लगने लगा है और हम बीमारियों का आसान शिकार बनते जा रहे हैं। यह स्थिति तब और भी ज्यादा बिगड़ जाती है जब उम्र 25 पार करती है। 40 की उम्र में आते-आते ज्यादातर लोग आजकल बेहद अनफिट हो जाते हैं। ऐसे में कोलेस्ट्रॉल लेवल के बढ़ने, ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल के नॉर्मल न रह पाने, हड्डियों के भुरभुरा होने, मसल्स में तकलीफ होने, तनाव, डिप्रेशन, मोटापा आदि जैसी समस्याएं घर करने लगती हैं। डिप्रेशन तनाव, चिंता और उदासी का बहुत बड़ा कारण बनता है, जो जल्द ही आपके जीवन पर असर करना शुरू कर देता है। इससे पहले की यह गंभीर रूप धारण कर लें डिप्रेशन निपटने के उपाय करने चाहिए। अवसाद से निपटने का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक तरीका शारीरिक गतिविधि है।

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