बाल मुकुंद ओझा
देश के अधिकांश राज्य विशेषकर देश की राजधानी दिल्ली एनसीआर सहित उत्तर और मध्य भारत इस समय झुलसाने वाली गर्म हवाओं की चपेट में है। त्वचा को झुलसाने और शरीर का पानी सुखाने वाली गर्म हवाएं चल रही हैं। इसे हम लू भी कह सकते है। साधारण शब्दों में लू अत्यधिक गर्म मौसम को कहते है जो आमतौर पर दो या उससे अधिक दिनों तक रहता है। मौसम विभाग के देश के 8 राज्यों के लिए भीषण गर्मी और लू का अलर्ट जारी किया है। इस समय सूरज आग उगल रहा है और तापमान 48 डिग्री तक पहुँच गया है। कई क्षेत्रों में 50 डिग्री का दावा भी किया जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जब तापमान किसी दिए गए क्षेत्र के सामान्य औसत से अधिक हो जाता है तो उसे लू या हीट वेव कहते हैं। ये घटनाएं मौसम में दिन-प्रतिदिन बदलाव का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण देश में हर साल मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है।
गर्मी अकेले नहीं आती बल्कि अपने साथ-कई तरह की परेशानियां भी लेकर आती है। इनमें लू की समस्या प्रमुख है। लू के बारे में हर कोई जानता है। गर्मी के मौसम में शुष्क और बेहद गर्म हवा चलने को लू कहा जाता है। गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान से लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी के मौसम में अक्सर लोग लू लगने से परेशान रहते हैं। मजबूत इम्युनिटी वाले लोग गर्म हवाओं को सहन कर लेते हैं मगर अधिकांश लोग इन हवाओं को सहन नहीं कर पाते हैं और इनके संपर्क में आते ही बीमार पड़ जाते हैं। ज्यादा देर तक धूप में काम करना और शरीर में पानी की कमी होना लू लगने के प्रमुख कारण हैं। बच्चे और बूढ़े लोग लू की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। विशेषकर मई – जून के महीने में लू की समस्या भयावह होती है। इस अवधि में पारा बहुत हाई होता है और बेहद गर्म और ड्राई हवाएं बहती हैं। साधारणतया उत्तरी भारत में गर्मियों में उत्तर-पूर्व तथा पश्चिम से पूरब दिशा में चलने वाली धुलभरी, प्रचण्ड उष्ण तथा शुष्क हवाओं को लू कहतें हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मानव और पशुधन के साथ खेत खलिहान भी बढ़ते तापमान और लू की चपेट में आ रहे है। देश में कई स्थानों पर खेतों में खड़ी फसलों के पत्ते और बेल झुलस रहे हैं। उनकी वृद्धि रुक गई हैं।
गर्मी और गर्म हवाएं शरीर में अक्सर ऐसा असर डालती हैं, जिस वजह से जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो जाती है। लू लगना भी इन्हीं स्थितियों में से एक है। धूप, गर्मी और गर्म हवा से शरीर को बचाकर ही हम इस स्थिति से बच सकते हैं। साल-दर-साल लू लगने से मरने वालों के आंकड़े में इजाफा होता ही जा रहा है। इसलिए, खुद को लू से बचाने के लिए लू लगना क्या होता है और इससे संबंधित अन्य सभी जानकारियों के बारे में पता होनी जरूरी है, क्योंकि, इलाज से बेहतर हमेशा बचाव होता है। लू के समय तापमान 45 डिग्री सेंटिग्रेड तक जा सकता है। गर्मियों के इस मौसम में लू चलना आम बात है। लू लगना गर्मी के मौसम की बीमारी है। लू गर्मी की एक समस्या है। इसका समय पर इलाज भी जरूरी है। इस दौरान हमारे शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है। बाहरी तापमान और गर्म हवा की वजह से शरीर ठंडा नहीं हो पाता और शरीर का तापमान 106 डिग्री फेरनहाइट या इससे भी ज्यादा हो जाता है। लू लगना, आतप ज्वर, ऊष्मा-मूर्छा (हीट स्ट्रोक या सन स्ट्रोक) शरीर की वह रुग्ण अवस्था है। लू लगने पर सिर में भारीपन महसूस होता है। खून का बहाव बॉडी में बहुत तेजी से होता है। सांसे काफी तेज चलती हैं। ऐसा लगता है जैसे शरीर टूट रहा है। अचानक से काफी तेज बुखार के साथ आंखों में भी जलन होती है और पानी आता है। लू के थपेड़े तन झुलसा रहे हैं। लू से शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित हो जाती है। जनहानि भी हो सकती है, इससे बचाव बहुत ही जरूरी है। प्रख्यात आयुर्वेद चिकित्सक और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की आयुर्वेद विद्वत परिषद् के सदस्य वैद्य बालकृष्ण गोस्वामी ने कहा है सावधानी ही लू से बचने का उपाय है। उन्होंने भीषण गर्मी के दौरान लू से बचने के लिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ पीने, धूप में निकलते समय छाता, टोपी या गमछे का उपयोग करने, खाली पेट घर से बाहर नहीं निकलने, ज्यादा मसालेदार और तला हुआ भोजन खाने से बचने, बच्चों और बुजुर्गों को तेज धूप से दूर रखने और लू लगने पर तुरंत छायादार स्थान पर जाकर पानी या ओआरएस का सेवन करने की सलाह दी है।

लू का कहर : बचाव ही उपचार है
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