नई दिल्ली। पाँच राज्यों के हालिया विधानसभा चुनावों में वोटिंग प्रतिशत में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में मतदान का प्रतिशत 3 से 12% तक बढ़ा है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण वोटर लिस्ट रिविजन (SIR) को माना जा रहा है, जिसमें डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटा दिए गए, जिससे कुल वोटर्स की संख्या घट गई, लेकिन वोट डालने वालों की संख्या लगभग समान रही। इसने मतदान प्रतिशत को बढ़ाया।
महिलाओं को कैश सहायता, मुफ्त यात्रा, और आरक्षण जैसे वादों ने महिला मतदाताओं को भारी संख्या में मतदान केंद्रों तक खींचा। महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों की तुलना में बंगाल और तमिलनाडु में 2%, असम में 1%, केरल में 5%, और पुडुचेरी में 3% अधिक रहा। यह संकेत है कि इस बार महिला वोटर्स ने चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पश्चिम बंगाल में 7 एग्जिट पोल में से 5 ने भाजपा की सरकार बनने का अनुमान जताया है, जबकि 3 ने टीएमसी की सरकार को मजबूती से जीतते हुए दिखाया। 2021 में हुए चुनावों में टीएमसी ने बहुमत से जीत हासिल की थी, लेकिन अब भाजपा ने अपनी ताकत बढ़ाते हुए जीत की ओर कदम बढ़ाया है। वहीं, असम में भी भाजपा की वापसी के संकेत मिले हैं, जबकि तमिलनाडु में DMK की सत्ता में वापसी का अनुमान है।
केरल में, जहां 10 साल बाद UDF की वापसी की संभावना जताई जा रही है, यह संकेत मिल रहे हैं कि राज्य में एक नया नेतृत्व सामने आ सकता है।
एग्जिट पोल में सैंपल साइज का महत्व भी है। जितना बड़ा सैंपल साइज होगा, उतना अधिक सटीक रिजल्ट आएगा। सर्वे के सवाल भी न्यूट्रल होने चाहिए ताकि पोल का रिजल्ट सटीक हो सके। सर्वे का दायरा जितना बड़ा होगा, रिजल्ट उतना ही सटीक होने की संभावना अधिक होगी।
इन एग्जिट पोल्स में अहम सवाल यह भी है कि वे चुनाव के नतीजों के बारे में सही अनुमान कैसे लगा पाएंगे, जबकि विभिन्न पोलिंग बूथों और क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ अलग-अलग हो सकती है। हालांकि, ये एग्जिट पोल चुनावी रणनीतियों और सियासी भविष्यवाणियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत देते हैं।



