ईरान के विदेश मंत्री ने कहा, अमेरिकी कार्रवाइयों से शांति वार्ता की निरंतरता पर खतरा

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तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका की “उकसाने वाली कार्रवाइयां” और युद्धविराम उल्लंघन दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को जारी रखने में बड़ी बाधाएं हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका की “उकसाने वाली कार्रवाइयां” और युद्धविराम उल्लंघन दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को जारी रखने में बड़ी बाधाएं हैं। अपने पाकिस्तानी और रूसी समकक्षों के साथ अलग-अलग फोन वार्ताओं के दौरान अराघची ने ईरानी वाणिज्यिक जहाजरानी के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाइयों की निंदा की, जिसमें कंटेनर पोत टौस्का और उसके चालक दल की कथित जब्ती भी शामिल है। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, उन्होंने वॉशिंगटन की “विरोधाभासी नीतियों और धमकी भरी बयानबाज़ी” का भी हवाला दिया।
8 अप्रैल को 40 दिनों की लड़ाई के बाद लागू हुआ युद्धविराम अभी भी नाज़ुक बना हुआ है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने तेहरान और वॉशिंगटन के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं में मध्यस्थता की है और 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहले दौर की मेजबानी की लेकिन ईरान ने अगले दौर में भागीदारी की पुष्टि नहीं की है।
ईरान की अर्ध-आधिकारिक तसनीम समाचार एजेंसी ने बताया कि तेहरान की भागीदारी वॉशिंगटन द्वारा पूर्व शर्तें पूरी करने पर निर्भर करती है। इसमें अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और “अत्यधिक मांगों” को प्रमुख बाधाओं के रूप में बताया गया है।
अराघची ने कहा कि ईरान “मुद्दे के सभी पहलुओं” और अमेरिका के व्यवहार के आधार पर कूटनीति जारी रखने या न रखने का निर्णय करेगा। उन्होंने जोड़ा कि तेहरान अपने हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
सोमवार को इससे पहले वॉशिंगटन की “विरोधाभासी कार्रवाइयों” का हवाला देते हुए ईरान ने स्पष्ट किया कि उसने अभी तक अमेरिका के साथ वार्ता के अगले दौर में भाग लेने पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने तेहरान में साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संवाददाताओं से कहा, “अब तक हमने वार्ता के अगले दौर के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है।”
प्रवक्ता ने अमेरिका की आलोचना करते हुए उस पर कूटनीति की बात करते हुए भी विरोधाभासी कार्रवाइयों में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि युद्धविराम की शुरुआत से ही ईरान को वॉशिंगटन से “खराब नीयत और लगातार शिकायतों” का सामना करना पड़ा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने शुरुआत में दावा किया था कि लेबनान युद्धविराम का हिस्सा नहीं है जबकि इसके विपरीत दावे किए जा रहे थे।
तनाव 28 फरवरी से तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर अमेरिका-इज़रायल के संयुक्त हमलों के बाद बढ़ा, जिनमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, वरिष्ठ कमांडरों और नागरिकों की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई लहरें चलाईं।

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