बाल मुकुन्द ओझा
अप्रैल माह से गर्मी और तेज धूप की शुरुआत हो जाती है, लेकिन बेमौसम बारिश ने देशवासियों को चिंन्तित कर चौंका दिया है। आम आदमी के साथ खेत और खलिहानों लिए मुश्किलें खड़ी हो रही है।मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस समय पूरे उत्तर और मध्य भारत में गेहूं की फसल पककर खेत में खड़ी है. सब्जियों की खेती को भी खासा नुकसान होने की खबरें आम हैं। अप्रैल में बारिश का सबसे बड़ा कारण है। पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर से उठने वाले कम दबाव के तूफान हैं। ये ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को पार करते हुए उत्तर भारत में दाखिल होते हैं। जब ये ठंडी हवाएं हिमालय से टकराती हैं, तो उत्तर और मध्य भारत में बारिश और ओले गिरते हैं ।
बेमौसम बारिश के दौरान मौसमी बीमारियों के वायरस एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। अप्रैल की यह ठंड और बेमौसम बारिश लोगों के रोजमर्रा के जीवन को कई तरह से प्रभावित कर रही है। अचानक मौसम बदलने से शरीर उसे झेल नहीं पाता। सर्दी, जुकाम, बुखार और गले में संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं। इसके साथ ही घर घर में वर्षा जनित बीमारियों से लाखों लोगों के पीड़ित होने के समाचार निरंतर मिल रहे है। अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लगातार बारिश होने के कारण गर्मी के बजाय हल्की ठंड का अहसास हो रहा है। मौसम में बदलाव से लापरवाही बरतने की दशा में बेहद खतरनाक साबित हो सकता हैं। क्योंकि इस तरह का मौसम कमजोर लोगों पर हमला कर उन्हें और भी बीमार बना देता है।
देश के कई इलाकों में झमाझम बारिश हो रही है। राजस्थान सहित अनेक राज्यों में मौसम विभाग ने बारिश का अलर्ट जारी किया है। बेमौसम बारिश से उत्तर भारत सहित देश के अनेक प्रदेशों में घर-घर में सर्दी, खासी, जुखाम, बुखार, फ्लू जैसे वायरल इंफेक्शन के केस बढ़ने लगे है। मौसम में आये बदलाव के साथ ही मौसमी बीमारियों ने दस्तक दे दी है। घर घर में मौसमी बीमारियां से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ती ही जारही है। अस्पतालों के आउटडोर में खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। इस मौसम में ठंडी हवा चलती है जिससे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस का खतरा रहता है। मौसम का यह बदलाव मानव के स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। विशेषकर जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है वे मौसमी बीमारियों का शिकार हो जाते है। मौसम परिवर्तन और बीमारियों का चोली दामन का साथ है। इससे बचने का एक मात्र उपाय सतर्कता और जागरूकता ही है। यह बीमारियां आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर कई बार आपके आंतरिक अंगों को भी प्रभावित करती हैं। इनसे बचने के लिए सावधानी रखना बेहद आवश्यक है।
डॉक्टरों के अनुसार तापमान में उतार-चढ़ाव के चलते मौसमी बीमारियां बढ़ी हैं। इस मौसम में जोड़ों में दर्द, बदन दर्द, सिरदर्द, खांसी, जुकाम एवं बुखार होता है। बदलते मौसम में खान पान में सतर्कता रखनी जरूरी है। इस मौसम में बचाव करने की बेहद जरूरत है। ध्यान न दे पाने की वजह से चिकनगुनिया और डेंगू की समस्या से लोगों को दो दो हाथ करने पड़ रहे है। मौसम बदलने के साथ ही बीमारियों का होना भी शुरू हो जाता है और बुखार- जुकाम आदि बीमारियां ज्यादा होने लगती है। चिकनगुनिया, डेंगू आदि होने का खतरा भी बढ़ जाता है और कई बार हम पहचान नहीं कर पाते हैं कि रोगी को चिकगुनिया की बुखार है या डेंगू बुखार या फिर सामान्य बुखार। इस वजह से बीमारी ज्यादा बढ़ जाती है और मुश्किल से नियंत्रण में आती है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम परिवर्तन और तेजी से होने वाले शहरीकरण के असर ने इन बीमारियों को फैलने में सहायता की है।
जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार जब हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते हैं, तो प्रकृति भी अपना संतुलन खो देती है। इसीलिए कहा गया है पर्यावरण का संरक्षण ही बचाव है।
बेमौसम बारिश ने बिगाड़ा जलवायु का संतुलन
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